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कोरोना लॉकडाउनः दुनिया में इस साल टूटेंगे गर्मी के सारे रिकॉर्ड


कोरोना वायरस के चलते लगाए गए लॉकडाउन से बेशक वायु व ध्वनि प्रदूषण में बेहद कमी आई है और इसका असर फिजाओं में देखने को भी मिल रहा है। लेकिन मौसम वैज्ञानिकों का कहना है इसका जलवायु पर कोई खास असर नहीं पड़ने वाला । मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस साल गर्मी के सारे पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं। जबसे धरती के तापमान का रिकॉर्ड रखना शुरू किया गया, उससे लेकर अब तक 2020 सबसे गर्म वर्ष हो सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस साल गर्मी का रिकॉर्ड टूटने की 50 से 70 फीसदी गुंजाइश है। माना जा रहा है कि कोरोनावायरस के कारण दुनियाभर में लॉकडाउन है जिससे आसमान साफ हो रहा है और प्रदूषण में कमी आ रही है लेकिन इससे जलवायु को ठंडा रखने में कोई मदद नहीं मिली है।
वास्तव में गर्मी का रिकॉर्ड टूटने की शुरुआत जनवरी से हुई थी। यही वजह है कि अमेरिकी मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि इस बात की 75 फीसदी गुंजाइश है कि 2020 अब तक का सबसे गर्म साल होगा। इस साल ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में आग लगने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। इसकी वजह अधिक तापमान को माना जा रहा है। ’ पिछले साल कैलिफोर्निया और यहां तक कि आर्कटिक जैसे इलाकों में आग ने भारी तबाही मचाई थी। यह जून का सबसे गर्म महीना था जिसमें ग्रीनलैंड से लेकर साइबेरिया और अलास्का तक जंगलों में भयानक आग लगी थी।गर्म और सूखे मौसम के साथ सूखे और तेज हवाओं ने आग को तेजी से फैलने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाई थी। ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग से 50 लाख से अधिक जीव मारे गए थे।
दुनिया में तापमान को दर्ज करने की शुरुआत 19वीं शताब्दी के मध्य से अंत में हुई थी। सबसे अधिक गर्मी का रेकॉर्ड 2016 में बना था। यह कम असामान्य था क्योंकि यह अल नीनो वर्ष के आसपास हुआ था, जो गर्म मौसम का एक अनुमानित चरण होता है। 2020 अल नीनो वर्ष नहीं है जो इस बात का संकेत है कि गर्मी बढ़ने के कारण कुछ और है। युनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफर्ड में मौसम विज्ञानी कर्स्टन हॉस्टिन ने कहा कि हाल में भले ही उत्सर्जन में कमी आई है लेकिन ग्रीनहाउस गैसों का उच्च स्तर बरकरार है। उन्होंने कहा, जलवायु का संकट बदस्तूर जारी है।

इस साल उत्सर्जन में कमी आएगी लेकिन कंसंट्रेशन लगातार बढ़ रहा है। वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों के स्तर में कोई कमी आने की संभावना नहीं है। ‘ जनवरी में कई आर्कटिक देशों में कम ही बर्फ रह गई थी क्योंकि वह अब तक का जनवरी को सबसे गर्म महीना था। फरवरी में अंटार्कटिका में एक शोध केंद्र ने अपना अब तक का सबसे अधिक तापमान रेकॉर्ड किया था। अमेरिका के बड़े हिस्से में काफी गर्मी पड़ रही है जबकि ऑस्ट्रेलिया भी गर्मी से जूझ रहा है। अगर 2020 सबसे गर्म साल का रिकॉर्ड नहीं तोड़ता है तब भी अमेरिका मौसम विभाग के मुताबिक यह सबसे गर्म पांच वर्षों में शामिल हो सकता है।