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मिस्र ने अमेरिका और रूस को दिया बड़ा झटका, चीन से खरीदेगा J-10C फाइटर जेट, इस कारण बाइडन के हाथ से निकली डील


मिस्र ने अपने पुराने F-16 फाइटर जेट के बेड़े को बदलने के लिए चीन के साथ एक डील की है। इस अधिग्रहण के तहत मिस्र चीन से J-10C फाइटर जेट खरीदेगा। यह मिस्र की रक्षा खरीद में एक रणनीतिक बदलाव दिखाता है। चीन के J-10C विमान को ‘माइटी ड्रैगन’ कहा जाता है। इन्हें खरीदने का निर्णय ऐसे समय में आया है जब इस बात की अटकलें लगाई जा रही थीं कि मिस्र अपने F-16 को F-16 वी वेरियंट में अपग्रेड करने के लिए अमेरिका से बातचीत करेगा।
J-10C कम लागत में बेहतर लड़ाकू क्षमताएं देता है। मिस्र के लिए यह आकर्षक विकल्प है। कथित तौर पर 19 अगस्त को इस समझौते पर हस्ताक्षर किया गया। यह पाकिस्तान के बाद मिस्र को J-10C का दूसरा अंतरराष्ट्रीय खरीदार बनाता है। मिस्र अपनी वायुसेना को आधुनिक बनाने के तरीकों की तलाश कर रहा है। वह पुराने F-16 विमानों को चरणबद्ध तरीके से रिटायर कर रहा है। J-10 C एक मल्टीरोल फाइटर जेट है। यह हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने वाले हथियारों से लैस है। इसकी तुलना अमेरिका के F-16 से की जाती है।
रूस और अमेरिका ने दिया था ऑफर – J-10C के अधिग्रहण से पहले अमेरिका और रूस दोनों की ओर से मिस्र को ऑफर मिला था। मिस्र ने दोनों को ही अस्वीकार कर दिया। कथित तौर पर मिस्र अपने F-16 संस्करण को आधुनिक बनाने के लिए नए एफ-15 खरीदने पर विचार कर रहा था। लेकिन अंततः इसे स्वीकार नहीं किया गया। इसके अलावा 2015 में रूस से मिस्र ने मिग-29 विमानों को खरीदा था। लेकिन उससे मिले नकारात्मक अनुभवों के कारण मिस्र ने इसे भी खरीदने से इनकार कर दिया।
अमेरिका से नहीं मिली मदद – मिस्र के इस फैसले के पीछे का कारण अमेरिकी है। मिस्र दुनिया का चौथा सबसे बड़ा F-16 जेट का यूजर है। लेकिन इसके बावजूद अमेरिका ने बार-बार उसे दृश्य-सीमा से परे (BVR) क्षमता देने से इनकार किया। मिस्र के बेड़े में लगभग 200 F-16 हैं जो उसकी एयरफोर्स के रीढ़ की हड्डी हैं। पिछले कुछ वर्षों में मिस्र को F-16 के आधुनिकीकरण और उन्नत हथियारों से लैस करने में कई तरह की राजनीतिक बाधाओं का सामना करना पड़ा है। उदाहरण के लिए 2013 में राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को हटाने के बाद अमेरिका ने अस्थायी रूस से सैन्य सहायता रोक दी।