
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 22 मई को तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन को एक सीक्रेट चिट्ठी लिखी थी। इस चिट्ठी में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की बदहाल स्थिति के बारे में बताया गया था। खुलकर कहें तो इस चिट्ठी में शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान को दरिद्र भिखारी बताया था।
पाकिस्तान हताश होकर तुर्की के साथ समझौते कर रहा है। ऐसे समझौते खुद पाकिस्तान की जगहंसाई करवाते हैं। जैसे पाकिस्तान की नौसैनिक क्षमताओं को आधुनिक बनाने के लिए लाया गया MILGEM प्रोजेक्ट अब खुद संकट में है। पाकिस्तान इस डील को एक वक्त क्रांतिकारी, गेमचेंजर और तुर्की के साथ स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप के लिए माइलस्टोन बता रहा था, लेकिन पाकिस्तान के लिए इस प्रोजेक्ट को शुरू करना ही मुसीबत बन गया है। पाकिस्तान की आर्थिक दुर्दशा की वजह से इस प्रोजेक्ट पर ताला लगना करीब करीब तय हो गया है। डॉलर के मुकाबले पाकिस्तान की करेंसी की कीमत 2018 से अब तक 60% से ज्यादा गिर चुकी है और विदेशी मुद्रा भंडार भी लगातार खतरे में रहा है।
पाकिस्तान ने तुर्की के साथ यूरोपीय करेंसी यूरो में MILGEM प्रोजेक्ट के लिए करार किया था, जिसकी लागत अरबों डॉलर है। जैसे जैसे पाकिस्तानी रुपया पाताल में जा रहा है, इस प्रोजेक्ट की लागत और ज्यादा बढ़ती ही जा रही है। इसके अलावा IMF की शर्तें भी पाकिस्तान के गले में फंदे की तरह है और उसे अपना बजट कम करने के लिए मजबूर होना पड़ा और इसका असर डिफेंस बजट पर भी हुआ है। जिसकी वजह से इस प्रोजेक्ट को लेकर पाकिस्तान भुगतान नहीं कर पा रहा है और प्रोजेक्ट ठप पड़ गया है। इस प्रोजेक्ट के जरिए पाकिस्तान जहाज बनाना चाहता है और अब ऐसा लग रहा है कि बनने से पहले ही पाकिस्तान का ये ख्वाबों वाला जहाज डूब रहा है।
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