
कजाख्स्तान की एक इंसानों की जेल में एक मादा भालू भी उम्रकैद की सजा काट रही है। मादा भालू को दो लोगों पर हमला करने के जुर्म में उम्रकैद की सजा दी गई और वह इंसानों के कारागार में कुख्यात अपराधियों के साथ 15 साल से सजा काट रही है। मादा भालू का नाम ईकैटरीना रखा गया है जिसे कारागर के लोग कात्या के नाम से भी पुकारते हैं।
15 साल पहले कोस्ताने की अदालत में उसे सजा सुनाई गई थी। कात्या पर दो लोगों पर अलग-अलग समय में हमला करने का आरोप था। कात्या ने एक कैंप साइट पर दो लोगों पर हमला किया था। पूर्व में कात्या को इसी जगह पर पिंजरे में रखा गया था। कजाख्स्तान की इस जेल में 730 कुख्यात अपराधी सजा काट रहे हैं। इनमें कई हत्यारे भी शामिल हैं जिनकी सजा 25 साल है। इस जेल में कात्या इकलौती ‘महिला’ है। उसे इंसानों से दूर एक अलग सेल में रखा गया है। यहां उसके लिए एक निजी स्विमिंग पूल भी मौजूद है।
जेल अधिकारियों का कहना है कि कात्या की सुरक्षा बेहद कड़ी है और पिछले 15 सालों में वह काफी सामान्य हो गई है। अब वह गुस्सैल होने की जगह काफी दोस्ताना हो गई है। जेल के दूसरे कैदी उससे मिलने आते हैं। कात्या जेल की सिंबल बन गई है और उसकी एक मूर्ति भी जेल में लगाई गई है। जेल के अधिकारियों ने बताया कि कात्या को किसी भालू के साथ समागम करने नहीं दिया जा सकता, लेकिन जेल के अधिकारी कृत्रिम गर्भधारण द्वारा उसे मां बनाने की कोशिश में हैं।
कात्या ने 2004 में दो लोगों पर अलग-अलग समय में हमला किया था। इनमें एक 11 साल का लड़का भी था जिसके पैर को कात्या ने काट लिया था। इसके अलावा कात्या ने एक 28 साल के व्यक्ति पर हमला कर उसे मार डाला था। इन दोनों हादसों के दौरान कात्या छोटी थी और उसे एक सर्कस ट्रेनर ने छोड़ दिया था। उसके गुस्सैल स्वभाव और हमला करने की प्रवृत्ति को देखकर अदालत ने उसे जेल में रखने का निर्देश दिया क्योंकि आसपास कोई चिड़ियाघर नहीं था।
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