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First Stars of the Universe: ब्रह्मांड में सबसे पहले कब टिमटिमाए थे सितारे? वैज्ञानिकों ने लगाया पता


ब्रह्मांड में कितने सितारे हैं, इसका जवाब तो शायद ही किसी के पास हो लेकिन सबसे पहले सितारों की रोशनी में ब्रह्मांड कब रोशन हुआ था, इसका पता वैज्ञानिकों ने लगा लिया है। रॉयल ऐस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी में छपी स्टडी में बताया गया है कि बिग बैंग के करीब 25-35 करोड़ साल बाद ही सबसे पहले सितारे चमकने लगे थे।
इस साल लॉन्च होने वाले अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA के James Webb Space Telescope की मदद से उन गैलेक्सी को भी साफ-साफ देखा जा सकेगा जिनमें ये सितारे बने।
कब बने थे सितारे? : यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के प्रफेसर रिचर्ड इलिस इस Cosmic Dawn का पता लगाने में जुटे रहे हैं। उनकी टीम ने 6 सबसे दूर स्थित गैलेक्सीज को स्टडी किया। ये इतनी दूर थीं कि स्क्रीन पर एक डॉट की तरह दिखती थीं। इनकी उम्र का पता लगाकर सबसे पहले सितारे बनने का समय खोज लिया गया। 13.8 अरब साल पहले बिग बैंग के बाद ब्रह्मांड बना था जिसके बाद लंबे वक्त तक अंधकार ही था।
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के डॉ. टॉन्गयान लिन का कहना है कि इसके पीछे तीन संभावनाएं हो सकती हैं। दो के मुताबिक ये सूरज से आने वाले पार्टिकल्स या रेडियोऐक्टिव कंटैमिनेंट हो सकते हैं। तीसरे के मुताबिक यह डार्क बोसॉन के कारण हो सकते हैं जिन्हें डार्क मैटर का दूसरा रूप माना जाता है। साइंस लेखक और स्पीक कॉलिन स्टुअर्ट के मुताबिक बोसॉन ऐसे सबअटॉमिक पार्टिकल होते हैं जिनमें फोर्स होती है। जैसे फोटॉन ऐसे बोसॉन होते हैं जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फोर्स कैरी करते हैं। डार्क बोसॉन या तो डार्क मैटर हो सकते हैं या इनकी वजह से डार्क मैटर जैसे आम मैटर पर असर डालते हैं।
अगर आगे की रिसर्च में यह साबित हो सकता है तो हो सकता है डार्क बोसॉन मिलने का पहला संकेत हो। अगर डार्क बोसॉन पर ग्रैविटी का असर होता है तो वे आम मैटर की तरह गुच्छे में बंध सकते हैं। नीदरलैंड्स की रैडबॉड यूनिवर्सिटी के डॉ. हेक्टर ओलिवर्स का कहना है कि ये खुद ही बोसॉन स्टार में ग्रैविटेट हो सकते हैं। इनमें न्यूक्लियर फ्यूजन नहीं होता, इसलिए इनमें रोशनी नहीं पैदा होती और देखे नहीं जा सकते।
ये पारदर्शी भी होंगे जिससे ऑब्जेक्ट्स इनके आर-पार हो सकेंगे। इसीलिए इन्हें ‘गोस्ट’ कहा गया है क्योंकि आम मैटर और डार्क मैटर के बीच ग्रैविटेशनल इंटरैक्शन न होने के कारण ऐसा लगेगा जैसे दीवार से भूत आर-पार हो रहा हो। ओलिवर्स का कहना है कि बोसॉन स्टार महाविशाल ब्लैक होल जितना बड़ा होने की क्षमता रखा है जो हर गैलेक्सी के केंद्र में होते हैं। हो सकता है इन्हें देखकर ऐस्ट्रोनॉमर्स को देखकर लगे कि ये ब्लैक होल है। इसीलिए अब यह भी खोजा जा रहा है कि मिल्की वे गैलेक्सी के केंद्र में ब्लैक होल है या बोसॉन स्टार।
साफ होगी तस्वीर :रिसर्चर्स का मानना है कि Hubble Telescope के बाद और ज्यादा शक्तिशाली James Webb Space Telescope की मदद से इन्हें और ज्यादा साफ तरीके से देखा जा सकेगा। दिलचस्प बात यह है कि ये सितारे आज के सितारों से अलग भी रहे होंगे। ऐसे में इनके बारे में जानने के लिए विज्ञान जगत बेहद उत्साहित रहा है। सितारों का जीवन खत्म होने से पहले होने वाले विस्फोट के दौरान कई अहम एलिमेंट्स बनते हैं।