
उत्तर कोरिया के टॉप सीक्रेट हथियार को लेकर अमेरिका समेत पश्चिमी देशों की उत्सुकता बढ़ती जा रही है। उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन अगले महीने इस हथियार को दुनिया के सामने प्रदर्शित करेंगे। इस हथियार को उत्तर कोरिया के लिए गेम चेंजिंग मिसाइल माना जा रहा है। कहा यह भी जा रहा है कि किम जोंग इस साल के अंत तक देश के पहले परमाणु हथियार का ट्रायल करने की भी योजना बना रहे हैं।
परमाणु परीक्षण की भी योजना बना रहे हैं किम जोंग
उत्तर कोरिया के प्रमुख विशेषज्ञ मार्कस गैरलॉस्कस ने सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) को बताया कि उत्तर कोरिया 10 अक्टूबर को आयोजित परेड में नई मिसाइल का अनावरण करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि दिसंबर 2020 से पहले उत्तर कोरिया परमाणु परीक्षण की योजना बना रहा है। इससे अमेरिका के नए राष्ट्रपति के समक्ष भी किम जोंग से निपटने की चुनौती पैदा हो जाएगी।
अमेरिका के साथ बैठक नहीं करेंगे किम जोंग
गैरलॉस्कस ने सीएसआईएस से बातचीत में कहा कि अमेरिका में होने वाले चुनाव से पहले उत्तर कोरिया कोई भी बैठक नहीं करेगा। लेकिन, उत्तर कोरिया की संस्थापक पार्टी की 75 वीं वर्षगांठ के मौके पर 10 अक्टूबर को इस मिसाइल को जरूर प्रदर्शित करने की योजना है। दक्षिण कोरिया के कई सांसदों ने इस मिसाइल की क्षमताओं के बारे में चर्चा की है।
पहले ही इस हथियार का अनावरण कर चुका है कोरिया
सीएसआईएस में एक वरिष्ठ फेलो और कोरिया मामलों की विशेषज्ञ सू मी टेरी ने कहा कि किम जोंग-उन ने 1 जनवरी 2020 को एक रणनीतिक हथियार का अनावरण करने का उल्लेख किया था। इसलिए, मुझे लगता है कि अक्टूबर में होने वाली परेड में इसे दिखाए जाने की बहुत संभावना है। उन्होंने कहा कि परमाणु परीक्षण या अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल परीक्षण करने के बजाय, मुझे लगता है कि वे 10 अक्टूबर को इस नए हथियार का अनावरण करेंगे।
उत्तर कोरिया के पास परमाणु बमों का भंडार, अमेरिका और जापान हैं निशाना
यूएस डिपॉर्टमेंट ऑफ आर्मी हेडक्वॉर्टर की नार्थ कोरिया टेक्टिस नाम की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि किम जोन उन अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए इन हथियारों का त्याग नहीं करेंगे। आर्मी हेडक्वॉर्टर ने अनुमान जताया है कि उत्तर कोरिया के पास 20 से लेकर 60 परमाणु बम है। इसके अलावा उसके पास हर साल 6 नए उपकरणों को बनाने की क्षमता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उत्तर कोरिया के पास लगभग 20 प्रकार के 2,500 से 5,000 टन तक रासायनिक हथियार होने का अनुमान है। संभावना जताई गई है कि उत्तर कोरिया की सेना इन रसायनिक हथियारों का इस्तेमाल तोपखाने के गोले बनाने में कर सकती है। इसके अलावा किम की सेना ने बॉयोलॉजिकल वेपन को भी विकसित किया है, जिसे किसी भी मिसाइल में फिट किया जा सकता है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम को इसलिए विकसित कर रहा है क्योंकि उसे लगता है कि परमाणु हमला करने का खतरा उसके दुश्मन देशों को उत्तर कोरिया में तख्तापलट करने की संभावनाओं से रोकेगा। यह भी कहा गया कि किम जोंग उन लीबिया में मुअम्मर गद्दाफी की मौत के गवाह रहे हैं और वह नहीं चाहते कि उत्तर कोरिया में ऐसा हो।
एक तरफ किम जोंग उन परमाणु हथियार बनाने में व्यस्त हैं, वहीं दूसरी ओर हालात ऐसे के हैं कि देश के नागरिकों के सामने खाने का संकट पैदा हो गया है। चावल, मक्का, फल, मीट और मछली की कमी पड़ने के साथ लोगों को कछुए जैसा जीव terrapin खाने को मजबूर होना पड़ रहा है। यहां तक कि देश के वैज्ञानिकों ने लोगों को ज्यादा खाना खाने से रोकने के लिए पतला करने वाली गोलियां बांटना शुरू कर दिया है। एक्सपर्ट्स ने देश की नीति को ‘Nukes before Nutrition’ करार दिया है। यानी लोगों को खाना देने से पहले तानाशाह किम जोंग उन परमाणु हथियार बनाने में लगे हुए हैं।
विशाल परेड की योजना बना रहा उत्तर कोरिया
हाल में ली गई एक सैटेलाइट तस्वीर से यह पता चला है कि उत्तर कोरिया आर्थिक तंगी और कोरोना वायरस के संक्रमण के बावजूद अक्टूबर में विशाल परेड की योजना बना रहा है। इस परेड में 23 हजार सैनिक हिस्सा लेंगे। इस परेड के जरिए किम जोंग उन अपने जीवित होने का प्रमाण भी दुनिया के सामने प्रस्तुत करेंगे।
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