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George Floyd Death: डोनाल्ड ट्रंप का ऐलान, हिंसा में शामिल संगठन को आतंकवादी करार देंगे


अमेरिका के मिनेसोटा में पुलिस हिरासत में मारे गए अश्वेत अमेरिकन George Floyd को इंसाफ दिलाने के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर हैं और हिंसक प्रदर्शन किए जा रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया है कि George के लिए शुरू हुए आंदोलन को हाइजैक कर लिया गया है और अब उन्होंने ऐसे लोगों को आतंकवादी घोषित करने का फैसला किया है। ट्रंप ने ट्वीट करके कहा है कि अमेरिका Antifa को आतंकवादी संगठन करार देगा। ट्रंप ने हिंसा के पीछे वामपंथी संगठनों को जिम्मेदार ठहराया है जिन्हें आमतौर पर Antifa कहा जाता है।
इसलिए जाने जाते हैं Antifa
दरअसल, अमेरिका में फासीवाद के विरोधी लोगों को Antifa (anti-fascists) कहते हैं। अमेरिका में Antifa आंदोलन उग्रवादी, वामपंथी और फासी-वादी विरोधी आंदोलन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ये लोग नव-नाजी, नव-फासीवाद, श्वेत सुपीरियॉरिटी और रंगभेद के खिलाफ होते हैं और सरकार के विरोध में खड़े रहते हैं। इस आंदोलन से जुड़े लोग आमतौर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं, रैलियां करते हैं। हालांकि, विरोध के दौरान हिंसा के भी परहेज नहीं किया जाता है।
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ट्रंप ने लगाया है आरोप
ट्रंप ने पहले भी आरोप लगाया है कि विरोध कर रहे 80% लोग बाहर से आए हैं और स्थानीय लोगों के बिजनस, घरों और संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि इन लोगों को George से कोई मतलब नहीं है। बता दें कि वाइट हाउस के पास प्रदर्शन के दौरान स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि लोगों को खदेड़ने के लिए सीक्रेट सर्विस को रॉयट गियर (दंगारोधी पोशाक) पहनना पड़ा।
एरिक गार्नर
17 जुलाई, 2014 को अफ्रीकन-अमेरिकन एरिक गार्नर की मौत दम घुटने से हो गई थी। न्यू यॉर्क सिटी पुलिस के ऑफिसर डैनियल पैंटेलियो ने उन्हें गिरफ्तार करते वक्त एरिक के गले को पकड़ लिया था। इस दौरान एरिक ने कम से कम 11 बार कहा- ‘मुझे सांस नहीं आ रही है’। एरिक के खिलाफ आरोप था कि वह बिना टैक्स स्टैंप के सिगरेट पैक से निकालकर बेच रहे थे। एरिक ने डैनियल के सामने इस बात का खंडन किया और गिरफ्तारी का विरोध किया। इस पर डैनियल ने उन्हें गले से पकड़कर जमीन पर गिरा दिया। इस दौरान एरिक ने कम से कम 11 बार कहा कि उन्हें सांस नहीं आ रही है लेकिन ऑफिसर्स ने उनकी नहीं सुनी और वह बेहोश हो गए। 1 घंटे बाद अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। कई साल तक इस केस को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए और कार्रवाई चली। आखिरकार 19 अगस्त, 2019 को डैनियल को नौकरी से निकाल दिया गया।
माइकल ब्राउन
9 अगस्त, 2014 को माइकल ब्राउन को फर्ग्युसॉन पुलिस ऑफिसर डैरेन विलसन ने मिजूरी के फर्ग्युसॉन में गोली मार दी थी। यह मामला काफी विवादित रहा था क्योंकि ब्राउन के साथी डोरियन जॉनसन ने आरोप लगाया था कि विलसन ने गाड़ी की खिड़की में हाथ डालकर ब्राउन का गला पकड़ा जिस पर दोनों गाड़ी से निकलकर भागने लगे। विलसन ने अपने बचाव में कहा था कि थोड़ी दूर भागने के बाद ब्राउन ने उन पर हमला किया जबकि जॉनसन ने दावा किया कि विलसन ने ब्राउन पर गोली चलाई जिस पर ब्राउन ने अपने हाथ ऊपर कर लिए थे। इसके बाद विलसन ने ब्राउन को कई गोलियां मारीं और ब्राउन की मौत हो गई। इसके बाद हुए विरोध प्रदर्शन में लोग इससे जुड़ा स्लोगन -‘हैंड्स अप, डोन्ट शूट’ इस्तेमाल करने लगे। हालांकि, विलसन का अपराध कभी साबित नहीं किया जा सका और कोर्ट ने मान लिया कि उन्होंने आत्मरक्षा में गोली चलाई थी।
ऐल्टन स्टर्लिंग
5 जुलाई, 2016 को लुइजियाना में दो पुलिस ऑफिसर्स के हाथों ऐल्टन स्टर्लिंग की मौत हो गई। ऐल्टन जहां सीडी बेचते थे, उसके सामने एक स्टोर के मालिक ने पुलिस में शिकायत की थी कि एक शख्स ने गन दिखाकर किसी को धमकाया है। ऐल्टन के पास भी गन थी। जब पुलिस ऑफिसर्स हावी लेक II और ब्लेन सैलमन वहां पहुंचे तो उन्होंने ऐल्टन को ही वह शख्स समझ लिया और उसे जमीन पर गिरा दिया। इस दौरान उन्हें लगा कि ऐल्टन अपनी जेब से गन निकालने की कोशिश कर रहा है और उन्होंने उस पर गोली चला दी। हालांकि, बाद में स्टोर के मालिक ने यह साफ किया था कि ऐल्टन वह शख्स नहीं था जिसकी वजह से पुलिस को बुलाया गया था। घटना का वीडियो कई लोगों ने लिया और बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन भी हुए। हालांकि, दोनों ऑफिसर्स के खिलाफ कोई चार्ज नहीं लगाया गया।
फिलांडो कास्टील
6 जुलाई, 2016 फिलांडो कास्टील मिनेसोटा में अपनी कार में अपने साथी डायमंड रेनल्ड्स के साथ जा रहे थे। पुलिस ऑफिसर जेरोनीमो यानेज उनकी गाड़ी को रोका और लाइसेंस मांगा। कास्टील ने उन्हें जानकारी दी कि उनके पास हथियार भी है। इस पर यानेज उनसे कहने लगे कि वह हथियार बाहर न निकालें। कास्टील और डायमंड यानेज से कहते रहे कि वे हथियार नहीं निकाल रहे हैं लेकिन यानेज ने उनकी नहीं सुनी और कास्टील पर 7 बार करीब से गोली चला दी। इनमें से पांच कास्टील को लगीं और 20 मिनट बाद हेनेपिन काउंटी मेडिकल सेंटर में उन्होंने दम तोड़ दिया। यानेज को 2017 में आरोपों से बरी कर दिया गया। डायमंड ने फेसबुक पर घटना का लाइव वीडियो स्ट्रीम किया था जिसके चलते कई महीनों तक विरोध प्रदर्शन चलते रहे।
साफ दिखता है फर्क
साल 2016 में द गार्जियन की एक स्टडी में यह बात पता चली थी कि पुलिस की गोली से मारे गए 10 लाख लोगों में से सबसे ज्यादा दर (10.13%) नेटिव अमैरिकन और अश्वेत (6.6%) ग्रुप के लोग होते हैं जबकि 2.9% श्वेत। वॉशिंगटन पोस्ट के डेटाबेस के मुताबिक अफ्रीकन-अमेरिकन के पुलिस के हाथों मारे जाने की संभावना श्वेत लोगों की तुलना में 2.5 गुना ज्यादा होती है। अमेरिकन जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ की 2018 की स्टडी में यह पता लगा था कि पुलिस के हाथों मॉर्टैलिटी रेट अश्वेत लोगों के लिए एक लाख लगों में 1.9-2.4 होता है जबकि श्वेत लोगों में 0.6-0.7।
George Floyd की मौत के बाद भड़की हिंसा
बता दें कि 20 डॉलर का नकली नोट इस्तेमाल करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए अश्वेत अमेरिकन George Floyd की हिरासत में लिए जाने के बाद हुई दर्दनाक मौत से अमेरिका गुस्से में हैं। घटना का वीडियो सामने आया जिसमें एक पुलिसकर्मी 7 मिनट तक George के गले पर घुटना रखे दिखाई दिया। George यह कहते-कहते बेहोश हो गए कि ‘मुझे सांस नहीं आ रही है’ लेकिन आरोपी पुलिस ऑफिसर डेरेक शॉविन को तरस नहीं आया। George की मौत के बाद लोग पुलिस के इस रंगभेदी अत्याचार से खिलाफ इंसाफ की मांग करते हुए सड़कों पर हैं।