
दूसरे चंद्र अभियान चंद्रयान-2 को लेकर दुनियाभर में भारत के वैज्ञानिकों का लोहा माना जा रहा है। पाकिस्तानी महिला अंतरिक्ष यात्री द्वारा इसरो वैज्ञानिकों की तारीफ के बाद अब अब चीन के नागरिकों ने भी इस अभियान में शामिल इसरो वैज्ञानिकों की जमकर सराहना की है। चीनी माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट पर पोस्ट कर उन्होंने वैज्ञानिकों को उम्मीद न खोने और अंतरिक्ष में अपनी खोज जारी रखने को अपील की।
एक यूजर ने लिखा, ‘अंतरिक्ष के विषय में सब नई जानकारी इकट्ठा करना चाहते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि सफलता किस व्यक्ति या देश ने हासिल की है। सबकी सराहना होनी चाहिए। जो अस्थायी रूप से असफल हुए उनका भी उत्साह बढ़ाया जाना चाहिए।’ कुछ यूजर ने कहा कि अंतरिक्ष में खोज के लिए भारतीय वैज्ञानिकों ने बहुत मेहनत व त्याग किए हैं, जो प्रशंसनीय है। जीहु नामक अन्य वेबसाइट पर किए पोस्ट में एक चीनी यूजर ने कहा, ‘हम सब कहीं बीच में हैं, लेकिन हम में से कुछ तारों की ओर देख रहे हैं। कोई भी देश यदि अंतरिक्ष के विषय में और खोज करने का साहस करता है तो उसका सम्मान होना चाहिए।’
चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग कर चुका है चीन
अमेरिका, रूस के बाद चीन चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने वाला तीसरा देश है। 2013 में उसने अपना पहला अंतरिक्ष यान चांग’ई-3 चांद पर उतारा था। दिसंबर 2018 में चांग’ई-4 लांच किया गया था। यह यान इस साल जनवरी में धरती से ना दिखने वाले चांद के हिस्से पर उतरा था।
पाकिस्तानी वैज्ञानिक दे रहे अपने देश को ये नसीहत
भारत के चंद्रयान-2 मिशन को लेकर पाकिस्तान के वैज्ञानिक भी तारीफ कर रहे हैं। पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्री नमीरा सलीम और पाकिस्तान के वैज्ञानिक और पूर्व में विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री रह चुके डॉक्टर अता-उर-रहमान ने ट्विटर पर चंद्रयान-2 पर तंज कसने वालों को नसीहत दी। उन्होंने ट्वीट में कहा कि भारत के चंद्र मिशन की ‘असफलता’ की आलोचना बहुत ही गलत है। लक्ष्य के इतने करीब आना अपने आप में बहुत बड़ी तकनीकी उपलब्धि है। पाकिस्तान उनसे दशकों पीछे है। भारत की असफलता पर जश्न मनाने की जगह हमें जागने और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में निवेश करने की जरूरत है। जागो पाकिस्तान।
विक्रम लैंडर चांद की सतह पर ही मौजूद
बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का शनिवार को चांद की सतह पर लैंड करने से कुछ मिनट पहले विक्रम लैंडर से संपर्क टूट गया था। लैंडर चंद्रमा की सतह से 2.1 किमी ऊपर था जब बेंगलुरु में इसरो मुख्यालय में ग्राउंड स्टेशन के साथ इसका संपर्क टूट गया था। हालांकि, इसरो ने ऑर्बिटर द्वारा भेजी गई थर्मल इमेज के माध्यम से पता लगाया की लैंडर चांद की सतह पर ही मौजूद है। विक्रम के पूरी तरह सुरक्षित होने पर ही संपर्क संभव इसरो के अधिकारी का कहना है कि विक्रम के सारे अंग सुरक्षित होने पर ही उससे संपर्क हो सकेगा। इसके बगैर दोबारा संपर्क बहुत मुश्किल है। यदि उसकी सॉफ्ट लैंडिंग होती और सारे सिस्टम काम करते तो ही उससे संचार संपर्क बहाल हो सकता है, जिसकी संभावना अभी बहुत कम है। हालांकि, इसरो के ही एक अन्य वैज्ञानिक ने कहा कि संपर्क बहाली की संभावना कायम है। इसरो ने पहले भी अंतरिक्ष यानों से संपर्क जोड़ा था। विक्रम का केस भी वैसा ही है।
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