
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति निराशाजनक बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) की तरफ से भी राहत पैकेज पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। इस स्थिति के बीच ही आईएमएफ ने चालू वित्त वर्ष के लिए पाकिस्तान की जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर को लेकर जो आंकड़ा जारी किया है, वह निराशा को बढ़ाने वाला है। आईएमएफ ने जीडीपी के अनुमान को 2 फीसदी से से घटाकर 0.5 फीसदी कर दिया है। मंगलवार को जारी हुई ग्लोबल इकॉनमी आउटलुक (डब्ल्यूईओ) नई रिपोर्ट में, आईएमएफ की तरफ से यह अनुमान लगाया गया है।
देश की आर्थिक तरक्की होगी कम – संगठन ने पहले अनुमान लगाया था कि वित्त वर्ष 2024 में देश की जीडीपी वृद्धि दर 3.5 फीसदी रहेगी। जबकि जनवरी में जारी अपनी अंतिम रिपोर्ट में, आईएमएफ ने जीडीपी अनुमान को घटाकर 2 फीसदी कर दिया था जो कि पहले 3.5 फीसदी थी। आईएमएफ की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की तरफ से मापी गई महंगाई जो वित्त वर्ष 2023 में करीब 27.1 फीसदी तक दर्ज की गई थी, वित्त वर्ष 2024 में 21.9 फीसदी तक पहुंच जाएगी। इस बीच, चालू खाता घाटा वित्त वर्ष 2023 और 2024 में 2.3 फीसदी से 2.4 फीसदी पर रहने का अनुमान लगाया गया है।
बेलआउट न मिलने से दिक्कतें – विश्व बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने भी पाकिस्तान की विकास दर के अनुमानों को 0.4 फीसदी से 0.6 फीसदी तक बताया था। इन बैंकों के अनुमानों के कुछ ही दिन बाद आईएमएफ की रिपोर्ट आई है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सुधार के लिए संघर्ष कर रही है। जबकि देश में महंगाई एक दशक बाद उच्च स्तर पर है। कई कंपनियों ने भी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए ऑपरेशन बंद कर दिए हैं या फिर प्रोडक्शन कम कर दिया है। आईएमएफ की तरफ से बेलआउट जारी होने में देरी स्थिति को और मुश्किल बना रही है।
दो वक्त की रोटी भी मुश्किल – पाकिस्तान की स्थिति दिन पर दिन और खराब होती जा रही है। देश में महंगाई रोज नए रिकॉर्ड बना रही है। रमजान के इस महीने में रोजा खोलने में भी लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जहां केले 400 रुपए दर्जन हैं तो सेब 450 रुपए किलो बिक रहा है। वहीं प्याज की कीमतों में भी इजाफा हुआ है और यह 200 रुपए किलो बिक रहा है। आटा, दूध, चावल, मीट और चिकन तक आम लोगों की पहुंच से बाहर हो गए हैं। कुछ लोग एक दिन का खाना दो दिनों तक खाने को मजबूर हैं। वहीं अभिभावक भी अब पैसे बचाने के चक्कर में बच्चों को अच्छे इंग्लिश मीडियम स्कूल से निकालकर सरकारी उर्दू माध्यम में पढ़ा रहे हैं ताकि फीस की रकम में बचत की जा सके।
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