
पूर्वी लद्दाख में मंडराते युद्ध के खतरे के बीच भारत और चीन के विदेश मंत्री आज मास्को में तीन बार आमने-सामने होंगे। दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात ऐसे समय पर हो रही है जब भारतीय सैनिकों ने चूशूल सेक्टर में सभी ऊंचाई वाली चोटियों पर कब्जा कर लिया है और चीनी सैनिकों के दोबारा कब्जा करने के प्रयासों को विफल कर दिया है। लद्दाख में चीन ने टैंकों और तोपों के साथ करीब 5 से 7 हजार सैनिकों को तैनात किया है।
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लवरोव की ओर से दिए गए लंच में एक साथ नजर आएंगे। माना जा रहा है कि रूस अपने दोनों ही मित्र देशों के बीच तनाव को कम करने में अहम भूमिका निभा रहा है। भारत और चीन के विदेश मंत्री शाम को द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। मई में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव शुरू होने के बाद दोनों ही देशों के विदेश मंत्रियों में पहली बार आमने-सामने बैठकर बातचीत हो रही है।
पैंगोंग झील के पास हजारों की तादाद में सैनिक तैनात
दोनों ही देशों ने पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के पास हजारों की तादाद में सैनिक और तोपों को तैनात कर रखा है। चीन अपने वादे से मुकरते हुए पैंगोंग झील के उत्तरी हिस्से और गोगरा पोस्ट इलाके से अपने सैनिकों को नहीं हटा रहा है। पूरे लद्दाख बॉर्डर पर चीन ने करीब 50 हजार सैनिकों को तैनात किया है। भारतीय सेना ने भी चीन को जवाब देने के लिए हजारों की तादाद में सैनिकों की तैनाती की है।
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