
जम्मू-कश्मीर के मसले पर पाकिस्तान को दुनिया के सामने लगातार मुहं की खानी पड़ रही है। भारत द्वारा अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले के बाद से ही पाकिस्तान तिलमिलाया हुआ है और इस मसले को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) तक जा पहुंचा लेकिन वहां भारत ने अपने जानदार तर्कों से उसकी बोलती बंद कर दी।
भारत की ओर से पहले विदेश मंत्रालय की सचिव (ईस्ट) विजय ठाकुर सिंह और बाद में UNHRC के लिए भारत के स्थायी मिशन में प्रथम सचिव विमर्श आर्यन ने पाकिस्तान के तर्कों का जवाब दिया और पाकिस्तान को लाजवाब कर दिया। आइए जानते हैं भारत ने UNHRC के मंच पर पाक को किन तर्कों से हेदम कर दिया संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में भारत का सबसे पहला तर्क यह था कि वह इस मुद्दे पर कोई विदेशी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करेगा, क्योंकि यह उसका आंतरिक मामला है।
भारत ने कहा कि उसके द्वारा अपने संवैधानिक ढांचे के अनुरूप ही अनुच्छेद 370 को लेकर फैसला लिया गया है और पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के बारे में गलत और मनगढ़ंत कहानी पेश की है।
भारत मानवधिकारों को बढ़ावा देने और उसकी रक्षा करने में दृढ़ता से विश्वास करता है जबकि पाकिस्तान आतंकवाद का केंद्र है और वह वैकल्पिक कूटनीति के तौर पर सीमा पार आतंकवाद का संचालन करता है।
भारत ने कहा कि जो लोग क्षेत्र में किसी भी रूप में आतंकवाद को बढ़ावा देने व वित्तीय तौर पर इसका समर्थन करते हैं, वास्तव में वही मानव अधिकारों के सबसे बड़े हननकर्ता हैं।
भारत ने पाक के दोहरे चेहरे से नकाब हटाते हुए बताया कि पाकिस्तान पीड़ित बनने का रोना रो रहा है, जबकि वास्तव में वह खुद मानवाधिकारों के हनन का अपराधी है।
भारत का कहना है कि हमें उन लोगों पर लगाम कसनी चाहिए, जो मानवाधिकारों की आड़ में दुर्भावनापूर्ण राजनीतिक एजेंडों के लिए इस मंच का दुरुपयोग कर रहे हैं।
भारत ने लताड़ा कि पाकिस्तान दूसरे देशों के अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों पर बोलने का प्रयास कर रहा है जबकि अपने ही देश में अल्पसंख्यक रौंदे जा रहे हैं ।
भारत ने तर्क दिया कि उसने अनुच्छेद 370 पर संसद द्वारा पारित अन्य विधानों की तरह ही भारतीय संसद द्वारा एक पूर्ण बहस के बाद लिया गया जिसे व्यापक तौर पर समर्थन भी मिला।
भारत ने कहा कि 370 के फैसले से संपत्ति पर अधिकार और स्थानीय निकायों में प्रतिनिधित्व समेत लैंगिक भेदभाव का अंत होगा, बाल अधिकारों का बेहतर संरक्षण होगा। साथ ही घरेलू हिंसा के खिलाफ संरक्षण मिलेगा। शिक्षा, सूचना और काम का अधिकार कानून लागू होगा और शरणार्थियों और वंचितों के खिलाफ भेदभाव समाप्त होगा।
भारत ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद के विश्वसनीय खतरों का सामना करने में हमारे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अस्थायी निवारक और एहतियाती उपायों की जरूरत थी।
भारत ने UNHRC में ये भी बताया कि पाकिस्तान ने आज मानवाधिकारों पर वैश्विक समुदाय की आवाज के रूप में बोलने की झूठी कोशिश की लेकिन अभ दुनिया को बेवकूफ नहीं बना सकता। पाकिस्तान का बुरा रिकॉर्ड अपने आप में इसकी सच्चाई बायन करता है।
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