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भारतीय हाइपरसोनिक मिसाइल ने बदला हिंद महासागर का पावर बैलेंस, कैसे टूट जाएगा चीन का ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’?


भारत ने लंबी दूरी की हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल को सार्वजनिक कर दिया है। ये भारत की समुद्री रणनीति में आए बहुत बड़े बदलाव को दिखाता है। चीन और पाकिस्तान, लगातार हिंद महासागर में दबदबा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। भारत ने इस महीने गणतंत्र दिवस के दौरान अपनी लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (LR-AShM) को दिखाया है। भारत के डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने इस मिसाइल को डेवलप किया है। इसे 1500 किलोमोटीर की रेंज में टारगेट को तबाह करने के लिए डिजाइन किया गया है। सबसे खास बात ये है कि ये मिसाइल, चीन के स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स को तोड़ सकता है।
ये एक एंटी-शिप मिसाइल है, यानि एयरक्राफ्ट कैरियर और युद्धपोत को पूरी तरह से खत्म करने के लिए इसे डिजाइन किया गया है। इसी स्पीड इतनी ज्यादा होगी कि इसे इंटरसेप्ट करना अत्यंत मुश्किल होगा। टू स्टेज सॉलिड प्रोपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल करने से इस मिसाइल की स्पीड Mach 10 तक पहुंच जाती है, जबकि क्वासी-बैलिस्टिक ट्रेजेक्टरी के जरिए ये मिसाइल लगातार Mach 5 की औसत रफ्तार बनाए रख सकती है। स्पीड के अलावा इस मिसाइल की दूसरी सबसे बड़ी क्षमता काफी कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की है, जिससे रडार के लिए इसे ट्रैक करना और एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसे इंटरसेप्ट करना अत्यंत मुश्किल होगा।
भारत ने किया हाइपरसोनिक एंटी शिप मिसाइल का टेस्ट – भारत के घेरने के लिए चीन ने स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स तैयार किया है, जिसके तहत वो भारत के पड़ोसी देशों में सैन्य अड्डे बना रहा है। जैसे पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट, श्रीलंका का हंबनटोटा और म्यांमार पोर्ट। ऐसे में रणनीतिक के लिहाज से देखा जाए तो LR-AShM भारत को अमेरिका, रूस और चीन के साथ उन कुछ देशों में शामिल करता है जिनके पास हाइपरसोनिक एंटी-शिप सिस्टम हैं। भारत के लिए हिंद महासागर क्षेत्र के लिए ये मिसाइल काफी ज्यादा महत्वपूर्ण बन जाती है। LR-AShM को अगले 2-3 सालों में सर्विस में पूरी तरह से शामिल कर लिया जाएगा। इसे फिक्स या मोबाइल लॉन्चर से लॉन्च किया जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत इसे अंडमान में बने अपने सैन्य बेस पर तैनात कर सकता है, जहां से मलक्का स्ट्रेट पर रखा जाता है।