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‘हिंद महासागर के देशों को एकजुट होना होगा’, होर्मुज स्ट्रेट संकट के बीच एस जयशंकर ने मॉरीशस से दिया बड़ा संदेश


मॉरीशस के दौरे पर गए विदेश मंत्री डॉक्टर एस. जयशंकर ने कहा है कि हिंद महासागर के देशों को एकजुट होने की जरूरत है क्योंकि हम भारी उथल-पुथल का सामना कर रहे हैं। शुक्रवार को मॉरीशस में 9वें हिंद महासागर सम्मेलन में बोलते हुए जयशंकर ने यह बातें कही हैं। जयशंकर ने खासतौर से ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद समुद्री व्यापार में आई रुकावट की ओर दुनिया का ध्यान खींचा है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से हुई दिक्कतों पर जयशंकर ने हिंद महासागर के देशों से मिलकर काम करने की अपील की है।
हिंद महासागर सम्मेलन में बोलते हुए जयशंकर ने कहा, ‘हम यहां एक ऐसे समय में फिर से इकट्ठा हुए हैं, जब दुनिया और खुद हिंद महासागर क्षेत्र में उथल-पुथल अपने चरम पर है। यह हालात हमारी बातचीत को एक विशेष महत्व देते हैं और मुझे विश्वास है कि आप सभी भी इस बात से सहमत होंगे।’
आज फायदा उठाने की होड़: जयशंकर – जयशंकर ने आगे कहा कि दुनिया आज ज्यादा बंटी हुई हो सकती है लेकिन हम हिंद महासागर के देशों को ज्यादा मजबूती से एकजुट होने की कोशिश करनी चाहिए। वैश्वीकरण के फायदों पर आज दूसरों का फायदा उठाने और चीजों को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की होड़ हावी हो गई है। इससे हमें सीखना चाहिए और चीजों को हल खोजना चाहिए
विदेश मंत्री ने कहा कि हम सभी आज ज्यादा मजबूती और टिकाऊपन की तलाश में हैं। हम ज्यादा भरोसेमंद साझेदारों की खोज कर रहे हैं। ‘चोक पॉइंट्स’ (अवरोधक बिंदु) आज दुनिया भर के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गए हैं। हम इनके बारे में भौतिक रूप से सोचते हैं लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि वित्त, प्रौद्योगिकी और संसाधनों जैसे क्षेत्रों में भी इन ‘चोक पॉइंट्स’ की अवधारणा को विकसित किया गया है।
मॉरीशस के दौरे पर जयशंकर – विदेश मंत्री एस जयशंकर शुक्रवार को मॉरीशस गए हैं। वह 9-10 अप्रैल के मॉरीशस के आधिकारिक दौरे पर हैं। यहां उन्होंने 9वें इंडियन ओशन कॉन्फ्रेंस में अपनी बात रखी है। मॉरीशस के बाद वह 11 अप्रैल से संयुक्त अरब अमीरात के दौरे पर जाएंगे, जहां दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा होगी।
जयशंकर ने अपने संबोधन में बीते छह हफ्ते से विश्व के सामने चल रहे संकट की ओर ध्यान दिलाया है। अमेरिका और इजरायल के 28 फरवरी के ईरान पर हमले के बाद होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री गलियारे में यातायात प्रभावित है। इसने दुनिया के बड़े हिस्से की उर्जा आपूर्ति को संकट में डाल रखा है। इससे प्रभावित देशों में भारत भी शामिल है।