
जापान ने उत्तर कोरिया के खिलाफ लागू प्रतिबंध की अवधि दो और साल बढ़ा दी है। उत्तर कोरिया जापानी नागरिकों के अपहरण के मामले पर विवाद सुलझाने की दिशा में कोई प्रगति किए बिना अपने परमाणु हथियार विकसित करना जारी रखे हुए है, जिसके मद्देनजर जापान ने यह कदम उठाया है। जापान ने दोनों देशों के बीच सभी प्रकार के व्यापार पर रोक लगा रखी है और उत्तर कोरिया में पंजीकृत पोतों को उसके बंदरगाहों में प्रवेश की अनुमति नहीं है। वे केवल मानवीय उद्देश्य से प्रवेश कर सकते हैं।
इसके अलावा दोनों देशों के बीच उड़ानों पर भी प्रतिबंध है। जापान, उत्तर कोरिया के परमाणु एवं मिसाइल कार्यक्रमों के खिलाफ लगाए गए संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों का भी पालन करता है। जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव कातसुनोबु कातो ने मंगलवार को घोषणा की कि कैबिनेट ने प्रतिबंध की अवधि बढ़ाने का फैसला किया है। पहले यह अवधि 13 अप्रैल को समाप्त होने वाली थी। उत्तर कोरिया ने करीब एक साल में पहली बार 25 मार्च को दो बैलिस्टिक मिसाइलों का प्रक्षेपण किया था, जिसकी जापान, अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने निंदा की थी।
उत्तर कोरिया ने अपने जासूसों को जापानी भाषा एवं संस्कृति का प्रशिक्षण देने के लिए 13 जापानी नागरिकों का 1970 और 1980 के दशक में अपहरण किए जाने की बात 2002 में स्वीकार की थी। इनमें से पांच लोगों को 2002 में लौटने की अनुमति दे दी गई थी। प्योंगयांग का कहना है कि अन्य लोगों की मौत हो गई। जापान का मानना है कि उसके और नागरिकों का भी अपहरण किया गया है और इनमें से कई लोग अभी जीवित हैं।
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