
वैज्ञानिकों ने पाया है कि कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए लगाये गये लॉकडाउन के बाद से दो प्रमुख वायु प्रदूषकों का स्तर दुनियाभर में काफी कम हो गया है, लेकिन चीन में एक द्वितीयक प्रदूषक जमीनी स्तर का ओजोन बढ़ गया है।‘जर्नल जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स’ में प्रकाशित दो नए अध्ययनों में पाया गया है कि उत्तरी चीन, पश्चिमी यूरोप और अमेरिका में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड प्रदूषण का स्तर पिछले वर्ष इसी अवधि की तुलना में 2020 के शुरुआती दिनों में 60 प्रतिशत तक कम हो गया। इन अध्ययनों में से एक में यह भी पाया गया कि उत्तरी चीन में 2.5 माइक्रोन से कम आकार वाले कणों में 35 प्रतिशत तक की कमी आई है।
ब्रसेल्स में रॉयल बेल्जियन इंस्टीटयूट एरोनॉमी के वायुमंडलीय वैज्ञानिक जैनी स्टावरको ने कहा कि वर्ष 1990 के दशक में उपग्रहों से हवा की गुणवत्ता की निगरानी शुरू होने के बाद से उत्सर्जन में इतनी गिरावट अभूतपूर्व है। शोधकर्ताओं ने कहा कि हवा की गुणवत्ता में सुधार के अस्थायी रहने की संभावना है लेकिन इन निष्कर्षों से यह पता चलता है कि भविष्य में हवा की गुणवत्ता क्या हो सकती है।
स्टावरको ने कहा, ‘‘हो सकता है कि इस प्रयोग का उपयोग उत्सर्जन नियमों को बेहतर ढंग से समझने के लिए किया जा सके। यह बहुत ही गंभीर स्थिति के बीच कुछ सकारात्मक खबर है।’’ हालांकि, एक अध्ययन में पाया गया है कि नाइट्रोजन डाइऑक्साइड प्रदूषण में गिरावट के कारण चीन में सतह ओजोन के स्तर में वृद्धि हुई है।
जर्मनी में ‘मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर मीटरोलॉजी’ के वायुमंडलीय वैज्ञानिक जी ब्रेजूर के अनुसार, कई क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता में बड़े पैमाने पर सुधार हुआ है। सतह ओज़ोन अभी भी एक समस्या हो सकती है। अध्ययन में पाया गया है कि लॉकडाउन के दौरान पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चीनी शहरों में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड प्रदूषण के स्तर में 40 प्रतिशत की कमी आई और पश्चिमी यूरोप तथा अमेरिका में 20 से 38 प्रतिशत की गिरावट आई। हालांकि, अध्ययन में पाया गया कि ईरान में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड प्रदूषण के स्तर में कमी नहीं आई।
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