
कोरोना वायरस के पहले मामले की जानकारी देने वाला चीन सख्त ‘जीरो कोविड पॉलिसी’ का पालन कर रहा है। पिछले कुछ महीनों से देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद अब इन प्रतिबंधों में छूट दी जा रही है। लेकिन खतरे के सबसे करीब लोगों का टीकाकरण करने में सरकार की विफलता प्रतिबंधों में ढील के बाद बड़ी संख्या में मौतों का कारण बन सकती है। चीन में मौजूदा हालात इस तरफ बढ़ते भी दिखाई देने लगे हैं। सोशल मीडिया पर तस्वीरों और वीडियो में अस्पतालों के भीतर मरीजों और लाशों का अंबार नजर आ रहा है।
चीन में हर रोज हजारों की संख्या में लोग संक्रमित हो रहे हैं और लाखों पर मौत का खतरा मंडरा रहा है। प्रमुख शहर इसकी चपेट में आ रहे हैं लेकिन लोगों में अभी भी वैक्सीन को लेकर हिचकिचाहट देखी जा रही है। उनका कहना है कि वे वैक्सीन के संभावित दुष्प्रभावों के बजाय वायरस का सामना करेंगे। यह हिचकिचाहट बुजुर्गों में ज्यादा है क्योंकि सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि बूस्टर लेने वाले वयस्क 57.9 फीसदी हैं और 80 या उससे अधिक उम्र के लोगों में यह आंकड़ा 42.3 फीसदी है।
लोगों ने वैक्सीन से किया तौबा – न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की खबर के अनुसार 28 वर्षीय चीनी महिला बिना बूस्टर के कोरोना का सामना करने के लिए तैयार है। उसे वायरस से अधिक वैक्सीन के संभावित दुष्प्रभावों का डर सता रहा है। महिला ने पिछले साल सिनोवैक की कोरोनावैक की दो खुराकें ली थीं। उसका कहना है कि ‘मुझे वैक्सीन पर भरोसा नहीं है।’ विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि बड़े पैमाने पर टेस्टिंग और लॉकडाउन जैसे प्रतिबंध हटने के बाद देश में 15 लाख से अधिक मौतें हो सकती हैं।
चीन में फेल हो गई कोरोना वैक्सीन – चीन की वैक्सीन अब पूरी तरह फेल साबित हो रही है। आधिकारिक तौर पर देश की टीकाकरण दर 90 फीसदी से ऊपर है लेकिन बूस्टर शॉट्स वाले वयस्कों की दर काफी कम है। वैक्सीन की दोनों डोज लगवाने के बाद भी चीन में बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हो रहे हैं। एक एक्सपर्ट ने चेतावनी दी है कि आने वाले तीन महीनों में चीन की करीब 60 फीसदी यानी दुनिया की 10 फीसदी जनसंख्या, करीब 80 करोड़ लोग संक्रमित हो सकते हैं। यह चीनी टीके की विफलता को दर्शाता है।
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