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NASA की ऐतिहासिक छलांग.. मंगल ग्रह के रहस्यों को जानने ‘लाल सतह’ पर सफलतापूर्वक उतरा Perseverance रोवर

अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA का Perseverance रोवर धरती से टेकऑफ करने के 7 महीने बाद शुक्रवार को सफलतापूर्वक मंगल ग्रह पर लैंड हो गया। नासा की कैलिफोर्निया स्थित जेट प्रपल्सन लेबरोटरी में पर्सविरन्स को लाल ग्रह की सतह पर उतारने को लेकर लोगों में उत्साह चरम पर था। भारतीय समय के अनुसार रात 2 बजकर 25 मिनट पर इस मार्स रोवर ने लाल ग्रह की सतह पर सफलतापूर्वक लैंड किया। रोवर की मंगल की सहत पर उतरते ही लेबोरेटरी में परियोजना पर काम रहे लोग खुशी से उछल पड़े।
बता दें कि 6 पहिए वाला यह रोवर मंगल की सतह पर जीवन की संभावनाओं की तलाश करेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर कभी मंगल ग्रह पर जीवन रहा भी था तो वह तीन से चार अरब साल पहले रहा होगा, जब ग्रह पर पानी बहता था। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि रोवर से दर्शनशास्त्र, धर्मशास्त्र और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े एक मुख्य सवाल का जवाब मिल सकता है।
जीवन की संभावनाएं तलाशेगा रोवर : इस परियोजना के वैज्ञानिक केन विलिफोर्ड ने कहा कि क्या हम इस विशाल ब्रह्मांड रूपी रेगिस्तान में अकेले हैं या कहीं और भी जीवन है? क्या जीवन कभी भी, कहीं भी अनुकूल परिस्थितियों की देन होता है?पर्सविरन्स नासा का भेजा गया अब तक का सबसे बड़ा रोवर है। 1970 के दशक के बाद से अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी का यह नौवां मंगल अभियान है। नासा के वैज्ञानिकों ने कहा कि रोवर को मंगल की सतह पर उतारने के दौरान सात मिनट का समय सांसें थमा देने वाला होगा। यदि सब कुछ ठीक रहा तो यह आज देर रात मंगल की सतह पर उतर जाएगा।
आखिरी सात मिनट पर टिका था पूरा मिशन : मिशन के आखिरी के 7 मिनट सबसे खतरनाक थे, जिस पर पूरे मिशन की सफलता निर्भर थी। दरअसल रोवर की लैंडिंग के वक्त सबसे पहले Perseverance को लेकर गया स्पेसक्राफ्ट एंट्री कैप्सूल से अलग हुआ। इसके 10 मिनट बाद स्पेसक्राफ्ट ने मंगल के वायुमंडल को 12 हजार मील प्रतिघंटा की रफ्तार से छुआ। वायुमंडल से संपर्क पर होने वाले घर्षण (Friction) से स्पेसक्राफ्ट के निचले हिस्से का तापमान करीब 1300 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
कुछ इस तरह उतरा Perseverance : इसके तीन मिनट बाद स्पेसक्राफ्ट ने सुपरसोनिक स्पीड पर अपना पैराशूट रिलीज किया। पैराशूट निकलने के 20 सेकंड बाद एंट्री कैप्सूल का प्रोटेक्टिव कैप्सूल डिटैच हो गया। इससे रोवर ने रेडार की मदद से यह समझा कि सतह से कितनी दूरी रह गई है। यहां पर एक खास Terrain Relative Navigation टेक्नॉलजी का इस्तेमाल किया गया, जिससे लैंडिंग के लिए सुरक्षित स्थान तय हो सका।
कहां थी चुनौती? : एंट्री कैप्सूल का आधा हिस्सा रोवर और उसके जेटपैक से अलग हो गया। जेटपैक ने रेट्रोरॉकेट की मदद से स्पीड कम किया और लैंडिंग साइट की ओर उड़ा। लैंड करने के लिए Jezero Crater को चुना गया। NASA की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के प्रिंसिपल रोबॉटिक्स सिस्टम्स इंजिनियर ऐंड्र जॉनसन के मुताबिक जेजरो 28 मील चौड़ा है लेकिन इसके बीच पगाड़, चट्टानी मैदान, रेत के पहाड़ और गड्ढे की दीवारें भी हैं। अगर इनमें से किसी से भी लैंडर टकराता तो पूरा मिशन फेल हो सकता था।
इसके तीन मिनट बाद स्पेसक्राफ्ट सुपरसोनिक स्पीड पर अपना पैराशूट रिलीज करेगा। हालांकि, यह समय इस बात पर निर्भर करेगा कि स्पेसक्राफ्ट कहां और कितने देर में लैंड करेगा। पैराशूट निकलने के 20 सेकंड बाद एंट्री कैप्सूल का प्रोटेक्टिव कैप्सूल डिटैच हो जाएगा। इससे रोवर रेडार की मदद से यह समझ पाएगा कि जमीन से कितनी दूरी रह गई है। यहां पर एक खास Terrain Relative Navigation टेक्नॉलजी का इस्तेमाल किया जाएगा जिससे लैंडिंग के लिए सुरक्षित स्थान तय हो सकेगा।
एंट्री कैप्सूल का आधा हिस्सा रोवर और उसके जेटपैक से अलग हो जाएगा। जेटपैक रेट्रोरॉकेट की मदद से स्पीड कम करेगा और लैंडिंग साइट की ओर उड़ेगा। लैंड करने के लिए Jezero Crater को चुना गया है। NASA की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के प्रिंसिपल रोबॉटिक्स सिस्टम्स इंजिनियर ऐंड्र जॉनसन के मुताबिक जेजरो 28 मील चौड़ा है लेकिन इसके बीच पगाड़, चट्टानी मैदान, रेत के पहाड़ और गड्ढे की दीवारें भी हैं। अगर इनमें से किसी से भी लैंडर टकराया तो पूरा मिशन फेल हो सकता है।
स्काई क्रेन मनूवर के जरिए नाइलॉन टीदर्स की मदद से रोवर को लैंड कराने की कोशिश की जाएगी। माना जा रहा है कि 1.7 मील प्रति घंटा की रफ्तार से रोवर को लैंड कराया जाएगा। Perseverance टेरेन रेलेटिव नैविगेशन (TRN) के इस्तेमाल से लैंडिंग करेगा। इसमें एक मैप होता है और एक नैविगेशन कैमरा। कैमरे से मिल रहे नजारे की मैप से तुलना की जाती है। इससे इन रुकावटों से बचते हुए लैंडिंग कराई जाती है। NASA ने इसकी मदद से ऐस्टरॉइड Bennu पर OSIRIS-REx लैंड कराया था।
कैसे हुई लैंडिंग? : स्काई क्रेन मनूवर के जरिए नाइलॉन टीदर्स की मदद से रोवर को लैंड कराने की कोशिश की गई। तय किया गया कि 1.7 मील प्रति घंटा की रफ्तार से रोवर को लैंड कराया जाएगा। Perseverance ने टेरेन रेलेटिव नैविगेशन (TRN) के इस्तेमाल से मार्स की सतह पर लैंडिंग की। दरअसल इसमें एक मैप होता है और एक नैविगेशन कैमरा। कैमरे से मिल रहे नजारे की मैप से तुलना की जाती है। इससे इन रुकावटों से बचते हुए लैंडिंग कराई जाती है। NASA ने इसकी मदद से ऐस्टरॉइड Bennu पर OSIRIS-REx लैंड कराया था।