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भारत से रिश्‍ते को तड़प रहा पाकिस्‍तान, दोस्‍ती को तैयार होंगे शहबाज-मोदी? पाकिस्‍तानी विशेषज्ञ से समझें

पाकिस्‍तान में नई सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो, अरबपति मियां मांशा भारत से अच्‍छे रिश्‍ते की वकालत कर चुके हैं। बिलावल भुट्टो ने तो यहां तक कह दिया कि नई दिल्‍ली के साथ संबंध तोड़ना खुद पाकिस्‍तान के हित में नहीं होगा क्योंकि हमारा देश पहले से ही अंतरराष्‍ट्रीय स्तर पर अलग-थलग है। पाकिस्‍तान छोड़ चुके अमेरिका में पूर्व पाकिस्‍तानी राजदूत हुसैन हक्‍कानी का मानना है कि भारत और पाकिस्‍तान के बीच कुछ व्‍यापार शुरू हो सकता है लेकिन कुछ बड़ा होना बहुत कठिन है।
हक्‍कानी ने कहा, ‘भारत और पाकिस्‍तान जानते हैं कि अच्‍छे रिश्‍तों से दोनों को ही फायदा होगा लेकिन ऐसे कारण हैं कि क्‍यों यह जानकारी पिछले 7 दशक में सकारात्‍मक रिश्‍ते के लिए कार्य करने योग्‍य रणनीति में नहीं बदली। ये कारण दोनों ही देशों में सरकारों के बदलने से इतने जल्‍द नहीं खत्‍म हो जाएंगे। यह संभव है कि कुछ व्‍यापारिक रिश्‍ते फिर से शुरू हो सकते हैं। हालांकि कुछ बड़ा होना बहुत कठिन है।’
द्विपक्षीय रिश्‍ते शुरू करने के लिए दोनों देशों को उठाना होगा कदम : हक्‍कानी ने कहा कि भारत और पाकिस्‍तान के बीच द्विपक्षीय रिश्‍ते शुरू करने के लिए दोनों देशों को एक कदम उठाना होगा। पाकिस्‍तानी सेना को भारत को यह सहमत कराना होगा कि उसने भारत में हमला करने वाले जिहादी गुटों पर कार्रवाई की है जो भारत में कार्रवाई करते हैं। साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्‍य में कोई हमला नहीं हो। वहीं भारत को भी पाकिस्‍तान को अलग-थलग करने के अभियान से बचना होगा और दोनों देशों के बीच सभी मुद्दों पर बातचीत करनी होगी। इसमें कश्‍मीर शामिल हो। साथ ही पाकिस्‍तान के नेताओं को फिर से आश्‍वासन देना होगा कि भारत पाकिस्‍तान को अपमानित नहीं करना चाहता है, बल्कि अच्‍छे पड़ोसी रिश्‍ते बनाना चाहता है।
नूपुर शर्मा विवाद पर हुसैन हक्‍कानी ने कहा कि घरेलू नीतियों का असर विदेश नीति पर पड़ता है, फिर चाहे आप कितना ही यह कहते रहें कि धार्मिक अल्‍पसंख्‍यकों के साथ व्‍यवहार का मुद्दा भारत का आंतरिक मामला है। भारत के 90 लाख लोग खाड़ी देशों में रहते हैं और हर साल 40 अरब डॉलर भेजते हैं। उन्‍होंने कहा कि मुस्लिम विरोधी बयानबाजी और भारत की घरेलू राजनीति में उठाए कदमों का खाड़ी देशों के साथ रिश्‍तों पर असर पड़ सकता है। भारत के नेताओं को कार्रवाई करना होगा और सांप्रदायिक तनावों के खिलाफ आवाज उठानी होगी।
‘भारत के साथ व्‍यापारिक रिश्‍ते को बहाल करना होगा’ : उन्‍होंने कहा क‍ि भारत तालिबान से बातचीत भले ही कर रहा है लेकिन उसे और वैश्विक समुदाय को अफगानिस्‍तान में आतंकवाद को लेकर सतर्क रहना होगा। तालिबान ने अभी तक अलकायदा के साथ रिश्‍ते नहीं तोड़े हैं और इस्‍लामिक स्‍टेट खोरासन लगातार हमले कर रहा है। हक्‍कानी ने कहा पाकिस्‍तान को बदहाली से निकालने के लिये यह जरूरी है कि पाकिस्‍तान की सुरक्षा एजेंसियां सरकारी कामकाज में हस्‍तक्षेप करना बंद करें। उन्‍होंने यह भी कहा क‍ि पाकिस्‍तान की आर्थिक समस्‍याएं महामारी बन गई हैं। इससे निकलने के लिए उसे भारत के साथ व्‍यापारिक रिश्‍ते को बहाल करना होगा।