
चीन के साथ मिलकर भारत को घेरने का मंसूबा बना रहे पाकिस्तान ने अब नई चाल चली है। कंगाली से जूझ रही इमरान खान सरकार ने पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में एक रेल लाइन को बनाने के लिए 6.8 बिलियन डॉलर के बजट को मंजूरी दी है। यह रेल लाइन चीन के महत्वकांक्षी चीन-पाक इकनॉमिक कॉरिडोर का हिस्सा बताया जा रहा है। अभी तक यह साफ नहीं हो सका है कि यह रेल लाइन पीओके में कहां से कहां तक बनाई जाएगी।
चीन ने पाकिस्तान में बनी एक सड़क को खोला
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ दिनों पहले ही चीन ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद से शिंजियांग प्रांत के काशगर तक बनने वाली सड़क के एक हिस्से को आम लोगों के लिए खोल दिया है। पाकिस्तान में बने 118 किलोमीटर के सड़क के इस हिस्से के एक छोर पर थाकोट तो दूसरे छोर पर हवेलियन बसा हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस रेललाइन के मकसद से चीन और पाक भारत पर दबाव बनाने का काम कर रहे हैं।
पाक ने कुछ दिन पहले ही जारी किया था विवादित नक्शा
कुछ दिन पहले ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के विरोध में अपने देश का नया नक्शा जारी किया था। इस नक्शे में पाकिस्तान ने लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के सियाचिन समेत गुजरात के जूनागढ़ और सर क्रीक पर अपना दावा किया था। जिसे भारत ने खारिज कर दिया था।
पाकिस्तान में खतरे में है चीन की सीपीईसी प्रोजक्ट
एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में सीपीईसी प्रोजक्ट में अरबों डॉलर लगा चुका चीन सुरक्षा खतरे में आने और लागत के बढ़ने से चिंता में है। पाकिस्तान में कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे के कारण परियोजना का काम एक तरफ जहां बहुत धीमी गति से बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ बलूचिस्तान में उग्रवादियों के हमले भी तेज हो गए हैं।
स्पेशल फोर्स बनाने के बावजूद नहीं रुके हमले
60 बिलियन अमेरिकी डॉलर के लागत वाले इस परियोजना की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान ने एक स्पेशल फोर्स का गठन किया है, जिसमें 13700 स्पेशल कमांडो शामिल हैं। इसके बावजूद इस परियोजना में काम कर रहे चीनी नागरिकों पर हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। जून में कराची के स्टॉक एक्सचेंज पर हुए हमले की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी की माजिद ब्रिग्रेड ने ली थी।
2018 में बलूच संगठन के किए कई हमले
बलूच लिबरेशन आर्मी के उग्रवादियों ने अगस्त 2018 में ग्वादर से बस के जरिए डालबाडिन जा रहे चीनी इंजिनियरों के एक समूह पर हमला किया था जिसमें 3 लोग मारे गए थे जबकि पांच अन्य जख्मी हो गए थे। इसके अलावा नवंबर 2018 में कराची के चीनी वाणिज्यिक दूतावास पर भी इस ग्रुप ने हमला किया था।
सर क्रीक पर खुलकर ठोका दावा
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा है कि सर क्रीक में हिंदुस्तान जो दावा करता था, नक्शे में उसे खारिज कर दिया है। पाक का दावा है कि उसकी सीमा पूर्वी तट की ओर है जबकि भारत का दावा है कि यह पश्चिम की ओर है। पाकिस्तान का कहना है कि यहां भारत पाकिस्तान के सैकड़ों किलोमीटर के EEZ पर कब्जा करना चाहता है। 70 साल से सर क्रीक को लेकर विवाद जारी है। कच्छ के रण की दलदल के क्षेत्र में सर क्रीक 96 किमी चौड़ा पानी से जुड़ा मुद्दा है। पहले इसे बाण-गंगा के नाम से जाना जाता था। यह अरब सागर में खुलता है और एक तरह से गुजरात के रण को पाकिस्तान के सिंध प्रांत से अलग करता है। इसे लेकर कच्छ और सिंध के बीच समुद्री सीमा पर विवाद है। खास बात यह है कि सर क्रीक मछुआरों के लिए अहम संपदा है और इसे एशिया का सबसे बड़ा फिशिंग ग्राउंड माना जाता है। यही नहीं, मुमकिन है कि यहां तेल और गैस की मौजूदगी भी हो। पाकिस्तान का दावा है कि 1914 में सिंध सरकार और कच्छ के राव महाराज के बीच हुए बॉम्बे सरकार रेजलूशन के तहत पूरा क्रीक पाकिस्तान का है। रेजलूशन के तहत दोनों क्षेत्रों के बीच सीमा क्रीक के पूर्व की ओर की गई जबकि भारत का दावा है कि 1925 में बने नक्शे के मुताबिक यह बीच में है।
इसलिए बौखलाया है पाकिस्तान
1947 में 15 अगस्त को अंग्रेजों से आजादी से ठीक पहले तक जम्मू-कश्मीर और हैदराबाद के अलावा गुजरात के जूनागढ़ ने भारत में शामिल होने का फैसला नहीं किया था। जूनागढ़ में करीब 80 फीसदी हिंदू आबादी थी और भारत सरकार की कोशिश थी कि जूनागढ़ के नवाब मोहम्मद महाबत खानजी III भारत के साथ आ जाएं लेकिन वह राजी नहीं थे। उन्होंने 15 सितंबर, 1947 को पाकिस्तान में विलय का फैसला किया। इस फैसले से जूनागढ़ की जनता भड़क गई और राज्य के कई हिस्से में नवाब के शासन के खिलाफ लोग उठ खड़े हुए। इससे नवाब अपने परिवार के साथ कराची चले गए। इसके बाद सरदार पटेल ने पाकिस्तान से जूनागढ़ के विलय की मंजूरी को रद्द करने और जनमत संग्रह कराने को कहा। जब पाकिस्तान ने इनकार कर दिया तो सरदार पटेल ने 1 नवंबर, 1947 को जूनागढ़ में भारतीय सेना भेज दी। इसके बाद उसी साल दिसंबर में वहां जनमत संग्रह हुआ जिसमें 99 फीसदी लोगों ने भारत में रहने को चुना। बावजूद इसके अचानक पाकिस्तान अब इसे अपने नक्शे में शामिल कर दिया है।
मनवादर पर भी दावा
जूनागढ़ की तरह ही मनवादर में भी 22 अक्टूबर 1947 को भारत ने सत्ता संभाल ली और भारतीय पुलिसबल मनवादर पहुंच गया। यहां के खान साहिब गुलाम मोइनुद्दीन खान्जी ने भी पाकिस्तान में शामिल होना स्वीकार कर लिया था। हालांकि, जूनागढ़ के अंतर्गत आने की वजह से मनवादर के पास इसका अलग अधिकार नहीं था। खान साहिब को सोनगढ़ में नजरबंद कर दिया गया। यहां कार्यकारी प्रशासक को तैनात कर दिया गया और फिर रायशुमारी कराई गई जिसमें भारत के समर्थन में वोट पड़े। इसके बाद 15 फरवरी 1948 को इसका भारत में विलय होगा।
सीपीईसी का इसलिए विरोध, किए कई हमले
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने हमेशा से चीन पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर का विरोध किया है। कई बार इस संगठन के ऊपर पाकिस्तान में काम कर रहे चीनी नागरिकों को निशाना बनाए जाने का आरोप भी लगे हैं। 2018 में इस संगठन पर कराची में चीन के वाणिज्यिक दूतावास पर हमले के आरोप भी लगे थे। आरोप हैं कि पाकिस्तान ने बलूच नेताओं से बिना राय मशविरा किए बगैर सीपीईसी से जुड़ा फैसला ले लिया।
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