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भारत से COVID-19 टीके की आपूर्ति का समझौता करने के करीब है Pfizer: CEO

अमेरिकी दवा कंपनी फाइजर के सीईओ डॉ अल्बर्ट बोर्ला ने मंगलवार को कहा कि कंपनी कोविड-19 टीकों की आपूर्ति के लिए भारत के साथ समझौते के आखिरी चरणों में है। साथ ही उन्होंने टिप्पणी की कि भारत में घरेलू स्तर पर विनिर्मित टीके ही भारतीयों के टीकाकरण अभियान का मूख्य स्तम्भ होंगे।
उन्होंने अमेरिका-भारत चेंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित किए जा रहे 15वें भारत-अमेरिका औषधि और स्वास्थ्य सेवा शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि फाइजर ने एक विशेष योजना बनायी है जिसके तहत भारत सहित मध्य और निम्न आय वाले देशों को इन टीकों की कम से कम दो अरब खुराक मिलेगी।
डॉ बोर्ला ने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि हम जल्द ही भारतीय स्वास्थ्य सेवा अधिकारियों द्वारा भारत में उत्पाद को मंजूरी और सरकार के साथ समझौते को अंतिम रूप दे देंगे ताकि हम अपनी ओर से टीका भेजना भी शुरू कर सके।’ उन्होंने कहा कि सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया में हो रहा टीकों के स्थानीय विनिर्माण से भारतीयों के ‘टीकाकरण की नींव’ हासिल होगी।
Covid Third wave: वैज्ञानिकों का दावा, 12 से 15 साल के बच्चों के लिए 100% असरदार है Pfizer vaccine; कोविड की तीसरी लहर में कम हुई टीएनजर्स की टेंशन!
मई में न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, फाइजर के टीके 12 से 15 वर्ष की आयु के टीनएजर्स में बेहद प्रभावी दिखे। शोध के लिए 12 से 15 वर्ष की आयु के 2,260 बच्चों लिया गया था जिनमें 1,131 को टीका (BNT162b2) और 1,129 को एक प्लेसीबो दिया गया था।
सभी बच्चे 21 दिनों तक सुरक्षित रहे और उनमें किसी तरह के गंभीर साइड इफेक्ट नहीं दिखे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वैक्सीन COVID के खिलाफ 100 प्रतिशत प्रभावी है। फाइजर कंपनी का कहना है कि BNT162b2 के बाद पता चला है कि 18 से 25 साल के युवाओं की तुलना में 12 से 15 साल के बच्चों के लिए ज्यादा प्रभावी हैं।
मालूम होको कि हाल ही में रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र द्वारा (Center for Disease Control and Prevention) की ओर से टीनएजर्स के लिए फाइजर-बायोएनटेक की वैक्सीन (Pfizer-BioNTech COVID-19 Vaccine) का डोज देने के लिए आपातकालीन इस्तेमाल (Emergency Use) की मंजूरी दे दी है।
अमेरिका के अलावा जिन अन्य देशों ने 12 वर्ष से अधिक उम्र के किशोरों के लिए फाइजर वैक्सीन को मंजूरी दी है उनमें चिली, कनाडा, जापान और इटली शामिल हैं। दुबई और फिलीपींस ने भी आपातकालीन प्रयोग के लिए वैक्सीन को मंजूरी दे दी है।
वहीं, दूसरी ओर द लैन्सेट’ पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, फाइजर-बायोटेक टीका (Pfizer-Biontech Vaccine) कोरोना वायरस के डेल्टा स्वरूप (Delta Variant) (B.1.617.2) के खिलाफ कम प्रभावी है। शोध में पाया गया है कि इस वेरिएंट के मरीजों में फाइजर के डोज से शरीर में कम एंटीबॉडी का निर्माण होता है।
अध्ययन में यह भी बताया गया है कि वायरस को पहचानने और उसके खिलाफ लड़ने में सक्षम एंटीबॉडी (Antibodies) बढ़ती आयु के साथ कमजोर होती चली जाती है और इसका लेवल काफी नीचे गिर जाता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि फाइजर-बायोएनटेक का एक डोज लेने वाले लोगों में B.1.617.2 स्वरूप के खिलाफ एंटीबॉडी का स्तर विकसित होने की संभावना इसके पिछले वायरस B.1.1.7 (अल्फा) की तुलना में काफी कम है। हालांकि, ब्रिटेन के फ्रांसिस क्रिक इंस्टीट्यूट के अनुसंधानकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में कहा गया है कि केवल एंटीबॉडी का स्तर ही टीके की प्रभावकारिता की भविष्यवाणी नहीं करता बल्कि संभावित रोगियों पर अध्ययनों की भी जरूरत होती है।
फाइजर के सीईओ ने कहा, ‘लेकिन हमसे और साथ ही मॉडर्ना से भी अतिरिक्त एमआरएनए टीका हासिल करने से भी महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।’ उन्होंने कहा, ‘इस समय हम भारत सरकार के साथ चर्चा कर रहे हैं। हम इस समझौते को अंतिम रूप के बिल्कुल आखिरी चरणों में हैं। पहले हमें भारत में इस टीके के लिए मंजूरी हासिल करने की जरूरत है।’