
पाकिस्तान की राजधानी इस्लाबाद में पिछले सप्ताह श्रीकृष्ण मंदिर के निर्माण पर रोक लगाने के विवाद के बीच यहां के सैदपुर गांव में स्थित प्रसिद्ध राम मंदिर में हिंदू श्रद्धालुओं के पूजा-अर्चना करने पर बैन लगा दिया गया है। इस मंदिर के केयरटेकर मुसलमान हैं। इस्लामाबाद में हिमालय की तलहटी में दबा हुआ सोलहवीं शताब्दी का यह वही राम मंदिर जहां मान्यता है कि 14 साल के वनवास के दौरान भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के साथ रहते थे। बाद में इस स्थल को मंदिर का रूप दे दिया गया था।
सदियों से, इस राम मंदिर में पूजा करने के लिए दूर-दूर से हिंदू आते रहे हैं। ये श्रद्धालु शांतिपूर्वक इस धर्मशाला में ठहरते थे, जिसे आज के समय में सैदपुर गांव कहा जाता है। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, 1893 तक यहां एक तालाब के पास हर साल एक मेले का आयोजन किया जाता था। मान्यता है कि भगवान राम ने एक बार इस तालाब से पानी पिया था हालांकि, अब ये तालाब एक दुर्गंध वाला नाला बन चुका है। बता दें बीते जून महीने में पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर बनाने की मंजूरी दी थी यह मंदिर इस्लामाबाद का पहला हिंदू मंदिर होता। राजधानी में करीब 3,000 हिंदू आबादी रहती है इसके बावजूद वहां एक भी हिंदू मंदिर नहीं है।
हालांकि कट्टरपंथियों ने इस मंदिर की बन रही दीवार गिराने के बाद पाकिस्तान सरकार को 20 हजार वर्ग फुट पर बन रहे मंदिर के निर्माण पर रोक लगानी पड़ी। ऑल पाकिस्तान हिंदू राइट्स मूवमेंट के एक सर्वे में सामने आया था कि 1947 में बंटवारे के समय पाकिस्तान में 428 मंदिर थे लेकिन, 1990 के दशके के बाद इनमें से 408 मंदिरों में खिलौने की दुकानें, रेस्टोरेंट, होटल्स, दफ्तर, सरकारी स्कूल या मदरसे खुल गए हैं। पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने कृष्ण मंदिर के लिए 10 करोड़ रुपये भी दिए लेकिन इसके बाद धार्मिक और राजनीतिक संगठनों ने इस निर्माण का विरोध करना शुरू कर दिया।
जामिया अशरफिया मदरसे की ओर से शरिया कानून का हवाला देते हुए यह कहा गया कि गैर मुस्लिमों के लिए प्रार्थना के लिए नई जगह पर निर्माण की इजाजत नहीं दी जा सकती है।शरिया कानून के अनुसार जो गैर-मुस्लिम प्रार्थना स्थल धवस्त किए जा चुके हैं, उनके पुर्ननिर्माण की इजाजत नहीं दी जा सकती है. इस्लामिक स्टेट में ऐसा किया जाना पाप है। पाकिस्तान के पंजाब विधानसभा के स्पीकर चौधरी परवेज इलाही ने कहा कि हिंंदु, सिख और इसाईयों की धर्मस्थल पर केवल मरम्मत की इजाजत दी जा सकती है। नए मंदिर, गुरुद्वारे या गिरिजा घरों के निर्माण की इजाजत देना इस्लाम की आत्मा के खिलाफ है।
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