
मुंबई: प्राइवेट डिटेक्टिव सतीश मंगले (39) और उनकी पत्नी श्रद्धा मंगले (30) रंगदारी केस से बरी कर दिए गए हैं। विशेष कोर्ट ने दोनों को संदेह का लाभ दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह देखते हुए कि अभियोजन पक्ष के मामले में संदेह था, कोर्ट का मानना है कि इसका लाभ अभियुक्तों को दिया जाना चाहिए। केस में आरोपी श्रद्धा के भाई अतुल तांबे (30) को भी बरी कर दिया है। तीनों पर 2017 में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राधेश्याम मोपलवार से 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने का आरोप लगा था, तब से सतीश और श्रद्धा जेल में ही बंद थे।
विशेष न्यायाधीश ए एम पाटिल ने आरोपी और मोपलवार के बीच तीन कथित मुलाकातों का जिक्र किया जहां पैसे की कथित मांग की गई थी। नासिक हाईवे पर कथित बैठक की ओर इशारा करते हुए अदालत ने कहा कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड से पता चलता है कि मोपलवार वहां मौजूद नहीं था।
तीन गवाह हुए पेश – बचाव पक्ष की वकील अपेक्षा वोरा ने बरी करने की मांग करते हुए कहा कि तीनों को झूठा फंसाया गया है। फैसला सुनाए जाने के बाद, तीनों गवाह कठघरे में अपने घुटनों पर गिर गए और टूट गए।
एमएसआरडीसी के निदेशक थे राधेश्याम – भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद एमएसआरडीसी के निदेशक आईएएस अधिकारी राधेश्याम मोपलवार को पद से हटाकर छुट्टी पर भेज दिया गया था। उन्होंने श्रद्धा और सतीश पर ब्लैकमेल कर 10 करोड़ रुपये फिरौती मांगने का आरोप लगाया था।
घर से पुलिस ने की थी गिरफ्तारी – पुलिस ने 2017 में शद्धा और उनके पति सतीश को डोंबिवली स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया कर लिया था। उनके पास से दो लैपटॉप, 5 मोबाइल फोन, 4 पेन ड्राइव, 15 सीडी और काफी दस्तावेज जब्त किए थे।
क्या है फिरौती का पूरा मामला – राधेश्याम मोपलवार का उनकी पत्नी से तलाक का मामला अदालत में चल रहा था। आरोप था कि उन्होंने पत्नी पर नजर रखने के लिए निजी जासूस सतीश मांगले की मदद ली थी। इससे सतीश और उसकी पत्नी श्रद्धा उनके करीबी हो गए थे। नजदीकी का फायदा उठाते हुए मंगले ने मोपलवार के भ्रष्टाचार की ऑडियो रिकॉर्डिंग कर ली थी। यह ऑडियो 1 अगस्त को कुछ समाचार चैनलों पर प्रसारित हुआ था। उसके बाद मोपलवार को एमएसआरडीसी से हटाकर छुट्टी पर भेज दिया गया था।
राधेश्याम मोपलवार ने लगाए थे ये आरोप – सतीश और श्रद्धा मंगले ने कई सरकारी कार्यालयों में मोपलवार के खिलाफ शिकायत की थी। आरोप लगे थे कि दोनों मोपलवार को ब्लैकमेल करने लगे थे। उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप वापस लेने और ऑडियो रिकॉर्डिंग लौटाने के एवज में 10 करोड़ रुपये की मांग करके मामला 7 करोड़ रुपये में तय किया। आरोप लगा था कि यह रकम नहीं मिलने पर मोपलवार और उनकी बेटी तन्वी को जान से मारने की धमकी दी गई। इससे परेशान होकर मोपलवार ने ठाणे पुलिस से शिकायत की थी।
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