
बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं पर एक साथ कई जिम्मेदारियां आ जाती हैं, जैसे बच्चे को फीड कराना, दिन-रात उसकी देखभाल करना सहित अन्य ऐसे में कई बार नई मां खुद को अकेला फील करती है। हालांकि, इस पूरे सफर में पति अगर कुछ खास जिम्मेदारियां निभाएं, तो न सिर्फ पत्नी का अकेलापन कम हो सकता है, बल्कि वह ताउम्र उनके प्रति शुक्रगुजार भी रह सकती हैं। पीडियाट्रिशियन डॉ. माधवी भारद्वाज ने इन जिम्मेदारियों के बारे में बताते हुए कहा कि नई मां के लिए सबसे जरूरी है कि पति भावनात्मक रूप से उपलब्ध रहें और उसकी अनकही बातों को समझने की कोशिश करें। ये छोटे-छोटे कदम रिश्ते को और मजबूत बना सकते हैं।
बच्चे के जन्म के बाद कैसे बांट सकते हैं जिम्मेदारी – पीडियाट्रिशियन डॉ. माधवी भारद्वाज बताती हैं कि हाल ही में एक टू बी फादर ने उनसे पूछा, ‘बच्चे के जन्म के बाद ब्रेस्टफीड तो उसकी मां ही करा पाएंगी, लेकिन क्या ऐसा कोई तरीका है जिससे मैं इस सफर को उनके लिए आसान बना सकूं या उनकी जिम्मेदारियां को बराबरी से अपने कंधों पर ले सकूं?’
आप डायपर पहना सकते हैं – यह सुनने के बाद मैंने उस होने वाले पिता से कहा कि बच्चे के जन्म के बाद ऐसी कई जिम्मेदारियां हैं, जिन्हें वे मां के साथ बांट सकते हैं। उदाहरण के लिए, डायपर बैग संभालना, फीडिंग के बाद बच्चे को डकार (बर्प) दिलाना, कॉन्टैक्ट नैपिंग करना, बच्चे की मालिश करना और उसे लोरी सुनाना जैसी चीजें उनकी भूमिका का अहम हिस्सा बन सकती हैं।
स्लीप रूटीन बना सकते हैं – जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, वे उसका स्लीप रूटीन बनाने और उसे फॉलो कराने में भी मदद कर सकते हैं। ये सभी ऐसी जिम्मेदारियां हैं, जिनके बारे में शायद उन्होंने पहले भी सुना होगा। हालांकि, डॉ. माधवी भारद्वाज ने उस होने वाले पिता से कहा कि वे उन्हें कुछ ऐसी बातें भी बताना चाहती हैं, जिनके बारे में शायद उन्होंने पहले कभी नहीं सुना होगा। उनके अनुसार, बच्चे की होने वाली मां यानी उनकी पत्नी फ्यूचर में उनसे कुछ ऐसी उम्मीदें रखेगी, जिनका एहसास उसे अभी शायद न हो।
पत्नी के लिए इमोशनली उपलब्ध रहना -डॉक्टर के मुताबिक, इनमें सबसे महत्वपूर्ण बात है कि वे अपनी पत्नी के लिए भावनात्मक रूप से भी मौजूद रहे। बच्चे के जन्म के बाद आप शारीरिक रूप से तो उसके साथ होंगे ही, लेकिन उतना ही जरूरी है कि आप भावनात्मक रूप से भी उसका साथ दें। उसकी बातों को सुनें, उसकी भावनाओं को समझें और उसे यह महसूस कराएं कि वह इस सफर में अकेली नहीं है।
पत्नी का साथ देना – एक्सपर्ट आगे टू बी फादर को समझाती हैं कि वह अपने परिवार को बेहतर तरीके से समझा सकते हैं, जबकि पत्नी अपनी फैमिली को हैंडल कर लेगी। डिलीवरी के बाद शुरुआती 40 दिनों तक अक्सर महिलाओं को घर से बाहर न जाने की सलाह दी जाती है। कोई बात नहीं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह सिर्फ एक कमरे तक सीमित रहे। आप उसके साथ छत पर, बालकनी में, पार्क में या फिर अपनी गाड़ी में बैठकर कुछ क्वालिटी टाइम जरूर बिताएं।
तुम आराम करो, मैं बच्चे को देखता हूं – जब रात में मां बच्चे को फीड करा रही हो, तो उसका नेटफिलिक्स पसंदीदा सीरीज या शो लगा देना। सुबह उसे यह कहना कि, ‘अब तुम थोड़ा आराम कर लो, मैं बच्चे को संभाल लेता हूं और इसके साथ कॉन्टैक्ट नैप करता हूं।’ वह आगे कहती हैं कि नई मां के मन में कई ऐसी बातें हो सकती हैं, जो उसे परेशान कर रही हों, लेकिन वह उन्हें अपने आसपास के लोगों से कह नहीं पा रही हो। ऐसे में वो बातें तुम कह देना। अपनी पत्नी का ‘मीडिएटर’ बन जाना। Image-pexels
पापा तो बनना, मगर बीवी के अच्छे दोस्त भी बनना – कुल मिलाकर बात बस इतनी है कि आप पापा तो बन जाएंगे, लेकिन अपनी पत्नी के सबसे अच्छे दोस्त बने रहना मत भूलिए। बच्चे के आने के बाद भी उसे यह महसूस होना चाहिए कि उसका पार्टनर पहले की तरह उसके साथ खड़ा है, उसे सुनता है और उसे समझता है।
Home / Lifestyle / पापा बनने के बाद हर पति जरूर निभाएं ये 5 जिम्मेदारियां, पत्नी को महसूस नहीं होगा अकेलापन, ताउम्र रहेंगी शुक्रगुजार
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