
अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ 2020 के चुनाव से पहले अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के आदेश संबंधी अपने बयान से पीछे हटते प्रतीत हुए और उन्होंने कहा कि बलों की वापसी के लिए ‘‘कोई समय सीमा नहीं” है और यह निर्णय जमीनी स्तर पर हालात के आधार पर लिया जाएगा। पोम्पिओ ने 29 जुलाई को कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2020 में देश में होने वाले राष्ट्रपति पद के चुनाव से पहले युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की संख्या कम करने के आदेश दिए हैं।
अमेरिका और तालिबान के बीच चल रही वार्ता के बीच आया पोम्पिओ का यह बयान अमेरिकी मीडिया की सुर्खियां बना था, लेकिन शीर्ष राजनयिक ने उनके साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र की यात्रा कर रहे पत्रकारों से मंगलवार को कहा कि उनके इस बयान की सटीक रिपोर्टिंग नहीं की गई। पोम्पिओ ने कहा, ‘‘मैंने इससे संबंधित खबरें देखीं। संवाददाताओं ने जो कहा, काश वे उसे लेकर थोड़ा और सावधानी बरतते। उन्होंने इसे गलत समझा। इसके लिए कोई समयसीमा नहीं है।”
उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान सुलह के लिए अमेरिका के विशेष दूत जलमय खलीलजाद इस समय तालिबान के साथ वार्ता कर रहे हैं, ताकि अफगानिस्तान से अमेरिकी बलों की वापसी संबंधी समझौता किया जा सके। पोम्पिओ ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प अपनी इन अपेक्षाओं को लेकर बहुत स्पष्ट रहे हैं कि अफगानिस्तान में मौजूद अमेरिकी बलों की संख्या में अमेरिका जल्द से जल्द कमी करे और साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि अमेरिका के पास जोखिम कम करने के लिए एक पर्याप्त योजना हो।
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