
भारत और चीन के बीच लगभग दो महीने से जारी गतिरोध अब शांत होने की उम्मीद है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ लगभग दो घंटे तक बातचीत की और हालात बेहतर होने की उम्मीद जताई। इसके बाद ही चीन की सेना ने अपने तंबू उखाड़े और अपने कदम पीछे खींचे। लेकिन चीन माना कैसे और 2 महीने के बाद दोनों देशों के बीच हालात कैसे सामान्य हुए, यह अभी भी सवाल बना हुआ है। एक सवाल यहां और भी खड़ा होता है कि क्या चीन अब मान जाएगा और आगे से कोई ऐसी हरकत नहीं करेगा जिससे कि दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति पैदा होगी? नए समझौते के मुताबिक दोनों देशों के बीच लगभग दो किलोमीटर का बफर जोन बनाया गया है। इस जोन में दोनों देशों के जवान नहीं आएंगे।
भारत की सेना चीन को बहुत अच्छी तरह समझती है। ऐसा पहली बार नहीं है कि चीन पीछे हटने को राजी हुआ है। इसके पहले भी डोकलाम में हम चीन की बदनीयत से वाकिफ हैं। तीन दिन पहले पीएम मोदी ने एलएसी का दौरा किया था। इस दौरान चीन को बहुत बुरा लगा और चीन की ओर से कहा गया कि भारत कोई भी ऐसी हरकत न करे जिससे तनाव और बढ़े। हालांकि उसके बाद हालात सामान्य होने लगे। चीन अब गलवान घाटी इलाके से लगभग दो किलोमीटर खिसक पीछे खिसक गया है। लेकिन भारत उसकी हर हरकत पर पैनी निगाह बनाए हुए है।
मोर्चे पर उतरे डोभाल
अब जब अजीत डोभाल खुद मोर्चे पर उतरे तो चीन को पीछे खिसकना पड़ा। चीनी सेना ने गलवान घाटी में अपने कैंप पीछे हटाने शुरू कर दिए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि एलएसी पर डिसइंगेजमेंट-प्रक्रिया शुरू हो गई है। हालांकि, सरकार के उच्चपदस्थ सूत्रों ने साफ किया कि अभी चीनी सेना की सभी मूवमेंट्स पर 72 घंटे तक नजर रखी जाएगी, उसके बाद ही डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया को सफल माना जाएगा। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि इससे पहले भी दोनों देशों के बीच सहमति बनी थी लेकिन चीन वापस से भारत की तरफ घुसने लगा था।
दो किलोमीटर पीछे हटा चीन
चीनी सेना के 15 जून को एलएसी पर झड़प वाली जगह से पेट्रोल पॉइंट 14 से 1.5 से 2 किलोमीटर पीछे हटने की खबर है। भारतीय जवान भी पीछे आ गए और दोनों पक्षों के सैनिकों के बीच एक बफर ज़ोन बना दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, चीनी सैनिकों ने गलवान नदी के मोड़ से हटना शुरू कर दिया है और इस इलाके से अस्थायी ढांचों और टेंट को हटा दिया गया है। वर्तमान में, यह प्रक्रिया सिर्फ गलवान घाटी तक में सीमित है।
NSA की पैनी नजर
सरकार के सूत्रों ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भारतीय सेना के साथ भारत और चीन सीमा स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं और दो देशों की सेना के बीच गतिरोध जल्द ही सुलझने की उम्मीद है। अजीत डोभाल और चीनी स्टेट काउंसिलर और विदेश मामलों के मंत्री वांग यी ने रविवार को एक टेलीफोन बातचीत के दौरान ‘फ्रैंक और इन-डीप एक्सचेंज’ किया, जिसके दौरान उन्होंने सहमति व्यक्त की कि दोनों पक्षों को एलएसी पर स्थिति सुधारने की प्रक्रिया जल्द खत्म करनी चाहिए।
चीन की नापाक चाल तो देखिए
एक ओर चीन का नेतृत्व भारत के साथ बातचीत कर शांति स्थापित करने की बात कर रहे हैं, उधर पीपल्स लिबरेशन आर्मी की (PLA) अभी भी सीमा पर गतिविधि जारी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन ने सीमा पर न सिर्फ अपनी पकड़ मजबूत की है बल्कि विवादित जगह पर पोस्ट खड़े करके सर्विलांस कैमरे लगा दिए हैं। इनसे पीपल्स लिबरेशन आर्मी 24 घंटे भारतीय खेमे पर नजर रख रही है। बता दें कि रविवार को ही दोनों के देशों के बीच पहले कायम की गई सहमति को लागू करने पर सहमति बनाई गई है और सेनाओं को पीछे करने पर हामी भरी गई है।
लेह दौरे में पीएम मोदी ने दिया था कड़ा संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को लद्दाख का अचानक दौरा किया था। वहां उन्होंने सैनिकों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा था कि विस्तारवाद के दिन अब लद गए हैं। इतिहास गवाह है कि ‘विस्तारवादी’ ताकतें मिट गई हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत न तो कभी झुका है और न आगे झुकेगा। उनके इस संबोधन को चीन के लिए यह स्पष्ट संदेश माना गया था कि भारत पीछे नहीं हटने वाला है और वह स्थिति से सख्ती से निपटेगा।
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