
अफ्रीकी यूनियन ने नाइजर के सैन्य नेताओं के समूह (जुंटा) को देश की लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार को बहाल करने के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है। इस बीच, विद्रोह करने वाले नेताओं ने वरिष्ठ नौकरशाहों से मुलाकात कर देश चलाने के तरीके पर चर्चा की। इसके अलावा अमेरिका और यूरोपीय यूनियन ने सैन्य शासन पर पाबंदियां लगाने की चेतावनी दी है। राष्ट्रपति मोहम्मद बजूम को अपदस्थ करने वाले सैनिकों में शामिल ब्रिगेडियर मोहम्मद टोउम्बा ने बुधवार को सरकारी टीवी पर कहा कि जुंटा ने शुक्रवार को नौकरशाहों से मुलाकात की और संविधान के निलंबन के बाद भी पहले की तरह काम करने का निर्देश दिया।
ब्रिगेडियर जनरल टोउम्बा ने जनरल अब्दुल रहमान टिचइनी के नेतृत्व वाले सैन्य शासन की मंशा का संकेत देते हुए कहा, ‘कामकाज नहीं रोकने का संदेश दिया गया है। जो कुछ भी करना होगा वह किया जाएगा।’ अफ्रीकी यूनियन शांति एवं सुरक्षा परिषद ने शुक्रवार को हुई अपनी बैठक के बाद कहा कि वह तख्तापलट के ‘खतरनाक पुनरुत्थान’ से चिंतित है, जिससे अफ्रीकी महाद्वीप में लोकतंत्र और स्थिरता कमजोर हो रही है।
’15 दिनों के भीतर बैरकों में जाएं सैनिक’ – परिषद ने सैनिकों से कहा कि वे ज्यादा से ज्यादा 15 दिन के अंदर तत्काल और बिना किसी शर्त के अपने बैरकों में चले जाएं और संवैधानिक व्यवस्था बहाल करें। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने शनिवार को कहा कि नाइजर में सैन्य तख्तापलट के कारण राजनीतिक अस्थिरता है। उन्होंने कहा कि इससे अमेरिका की ओर से अफ्रीकी राष्ट्र को प्रदान की जाने वाली आर्थिक सहायता को लेकर खतरा है।
नाइजर में क्या हो रहा? – सेना ने हाल में लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद बजौम को हिरासत में ले लिया था जिससे देश में राजनीतिक अराजकता पैदा हो गई थी। जनरल अब्दुर्रहमान त्चियानी को उन विद्रोही सैनिकों का नेता घोषित किया गया था जिन्होंने तख्तापलट करते हुए लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति को हिरासत में ले लिया था। ब्लिंकन इस समय प्रशांत क्षेत्र के दौरे के तहत ऑस्ट्रेलिया में हैं। उन्होंने कहा कि नाइजर की अमेरिका के साथ जारी सुरक्षा और आर्थिक व्यवस्था बजौम की रिहाई और ‘नाइजर में लोकतांत्रिक व्यवस्था की तत्काल बहाली’ पर निर्भर है।
Home / News / सैन्य शासन पर लगाएंगे पाबंदियां… नाइजर में तख्तापलट के बाद अमेरिका और यूरोपीय यूनियन ने दी चेतावनी
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