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अमेरिका से वार्ता से पहले ईरान की लीडरशिप में मतभेद? IRGC चीफ, विदेश मंत्री-स्पीकर किस बात पर आमने-सामने


इस्लामाबाद में आज से होने वाली शांति वार्ता से पहले ईरान की टॉप लीडरशिप में टकराव की खबरें आ रही हैं। ईरान इंटरनेशनल ने जानकार सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि US-ईरान वार्ता से पहले वरिष्ठ ईरानी अधिकारी बातचीत करने वाली टीम की बनावट को लेकर आपस में असहमत हैं। ईरान इंटरनेशनल ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि IRGC के कमांडर-इन-चीफ अहमद वाहिदी, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर ग़ालिबफ़ के अधिकारों को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि बावजूद इसके मतभेदों को सुलझाकर ईरानी टीम इस्लामाबाद पहुंच चुकी है।
वाहिदी ने बातचीत करने वाली टीम में मोहम्मद बाघर जोलघाद्र को शामिल करने की मांग की थी। ईरान इंटरनेशनल ने पहले बताया था कि जोलघाद्र को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का सचिव, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन पर IRGC के दबाव के सीधे परिणाम के तौर पर नियुक्त किया गया था। बातचीत करने वाली टीम इस मांग का विरोध कर रही है क्योंकि उनका मानना है कि रणनीतिक बातचीत के लिए जोलघाद्र के पास अनुभव की कमी है। ईरान इंटरनेशनल के मुताबिक IRGC के कमांडर-इन-चीफ और IRGC के एयरोस्पेस कमांडर ने भी इस बात पर जोर दिया था कि प्रतिनिधिमंडल ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर किसी तरह की बातचीत करने से इनकार कर दे।
क्या संघर्ष विराम पर सहमति बनेगी? – गालिबफ ने गुरुवार और शुक्रवार को बार-बार यह बयान दिया है कि बातचीत शुरू करने के लिए लागू संघर्ष-विराम में लेबनान में भी संघर्ष-विराम शामिल है जिसे इजरायल और अमेरिका दोनों ने नकार दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के मामले में “बहुत खराब काम करने” का आरोप लगाया है। ट्रंप ने Truth Social पर शेयर की गई एक पोस्ट में लिखा “यह वह समझौता नहीं है जो हमारे बीच हुआ है!”
US के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंचने वाले हैं। उससे पहले उन्होंने कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने बातचीत को लेकर “कुछ काफी स्पष्ट दिशा-निर्देश” दिए हैं। जेडी वेंस ने कहा “अगर ईरानी सद्भावना के साथ बातचीत करने को तैयार हैं तो हम निश्चित रूप से उनकी ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाने को तैयार हैं।”
‘ईरान को बातचीत से ज्यादा उम्मीद नहीं’ – वहीं अलजजीरा से बात करते हुए तेहरान यूनिवर्सिटी के ‘फैकल्टी ऑफ़ वर्ल्ड स्टडीज’ की एसोसिएट प्रोफ़ेसर ज़ोहरे खाराजमी ने इस बातचीत को लेकर कहा ‘ईरानी लोग आशावादी नहीं हैं।’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी नेतृत्व ने इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत को ‘करो या मरो’ वाली स्थिति बताया है। खाराजमी ने अल जजीरा को बताया ‘ईरानी लोग सचमुच आशावादी नहीं हैं क्योंकि उन्हें कोई भरोसा नहीं है।’ उन्होंने कहा ‘उन्हें नहीं लगता कि अमेरिका और उसके सहयोगी किसी भी तरह की बातचीत के लिए सचमुच भरोसेमंद हैं।’
वहीं ईरान की आर्थिक मांगों जैसे प्रतिबंधों में ढील, जब्त की गई संपत्तियों की बहाली, हर्जाना और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाना, इनपर खाराजमी ने कहा कि ये मांगें ‘बेहद तार्किक और सोची-समझी’ हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित करने से ईरान के लिए भारी राजस्व कमाने के दरवाजे खुल जाएगे और ‘अमेरिकी आर्थिक आतंकवाद और प्रतिबंधों के कई सालों बाद’ ईरान एक बार फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ पाएगा।