
ताइवान के मुद्दे पर अमेरिका और चीन के बीच तनाव चरम पर है। चीन ने अमेरिका को आगाह कर दिया है कि अगर ताइवान के मामले में उसने टांग अड़ाने की कोशिश की तो अंजाम बुरा होगा। इन सबके बीच रूस ने भी अमेरिका को चेताया है कि यदि वह चीन के खिलाफ कोई ‘भड़काऊ’ कदम उठाता है तो हालात बिगड़ सकते हैं। बता दें कि रूस ने फरवरी में यूक्रेन पर हमला बोल दिया था, जिसके बाद जहां पश्चिमी देश उसके खिलाफ हो गए हैं, वहीं चीन ने उसका भरपूर समर्थन किया है।
रूस ने किया चीन का जोरदार समर्थन : शायद यही वजह है कि ताइवान को लेकर तनाव के बीच रूस ने चीन का जोरदार समर्थन करते हुए शुक्रवार को अमेरिका को आगाह किया कि किसी भी ‘भड़काऊ’ कदम से हालात बिगड़ सकते हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन के साथ फोन पर 3 घंटे तक बात की थी और उन्हें ताइवान मामले में हस्तक्षेप को लेकर आगाह करते हुए बताया था कि ‘आग से खेलने वाले राख हो जाते हैं।’
‘हम चीन की संप्रभुता का समर्थन करते हैं’ : इस बारे में पूछे जाने पर रूस के राष्ट्रपति कार्यालय ‘क्रेमलिन’ के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि रूस पुरजोर तरीके से चीन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करता है। पेसकोव ने कहा, ‘हमारा मानना है कि किसी भी दूसरे देश को यह अधिकार नहीं है कि वह सबको दुविधा में डाले या कोई भड़काऊ कदम उठाए।’ उन्होंने अमेरिका को ‘विनाशकारी’ कदमों के खिलाफ आगाह करते हुए कहा कि ऐसे समय जब दुनिया कई मुद्दों से जूझ रही है, इस तरह के व्यवहार से ‘अंतरराष्ट्रीय स्तर’ पर सिर्फ तनाव ही बढ़ेगा।
चीन, रूस के बीच मजबूत रिश्तों पर लगी मुहर : पेसकोव के बयान से रूस और चीन के बीच मजबूत रिश्तों पर मुहर लग जाती है जो कि 24 फरवरी को यूक्रेन में रूस के सैनिकों के हमले के बाद से और मजबूत होते गए हैं। चीन ने अब तक यूक्रेन पर रूस के हमले की निंदा नहीं की है बल्कि अमेरिका और NATO पर ही रूस को भड़काने का आरोप लगाया है। बायडेन के साथ बातचीत में जिनपिंग ने ताइवान मामले में बाहरी ताकतों के दखल को खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘चीन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना 1.4 अरब से अधिक चीनी लोगों की दृढ़ इच्छा है। आग से खेलने वाले झुलस जाएंगे।’
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