
रूस ने साल 2019 में अपना पहला तैरता न्यूक्लियर प्लांट अकादमिक लोमोनोसोव (Akademik Lomonosov) लॉन्च किया था। एक तरफ पश्चिमी देश सोच रहे हैं कि रूस पर लगे प्रतिबंधों से उसकी अर्थव्यवस्था बर्बाद हो गई है, लेकिन इसके उलट रूस अब दूसरा तैरता परमाणु प्लांट बनाने जा रहा है। रूस का ये नया तैरता हुआ न्यूक्लियर प्लांट चीन में बनेगा। ये जहाज अकादमिक लोमोनोसोव का अपग्रेड वर्जन होगा। इसका इस्तेमाल खानों और रूस के सबसे पूर्वी चुकोटका स्वायत्त क्षेत्र में ऊर्जा के लिए किया जाएगा।
ये जहाज 19,000 टन वजन वाला, 140 मीटर लंबा और 30 मीटर चौड़ा होगा। इसमें दो RITM-200 रिएक्टर होंगे, जो 55 मेगावाट की बिजली पैदा करेंगे। चीनी कंपनी सिर्फ जहाज बनाएगी जो 2023 तक पूरा हो जाएगा। इसे बाद उस पर रिएक्टर लगाने के लिए रूस ले जाया जाएगा। अकादमिक लोमोनोसोव ने मई 2020 में कॉमर्शियल लेवल पर काम करना शुरू किया था। इस पर 35 मेगावाट क्षमता वाले KLT-40S रिएक्टर लगे हैं। इस परियोजना की देखरेख देश की ऊर्जा कंपनी रोसाटॉम की मैकेनिकल इंजीनियरिंग सहायक कंपनी एटोमेनरगोमाश (AEM) करेगा।
दूर दराज के इलाकों में पहुंचाएगा बिजली : AEM के डायरेक्टर ने कहा कि ये फ्लोटिंग न्यूक्लियर पावर प्लांट के परिवार की शुरुआत है। तीन अन्य पावर प्लांट बनाने की भी योजना है। अकादमिक लोमोनोसोव की अगर बात करें तो रूस ने इसे दूर-दराज के इलाकों में बिजली पहुंचाने के लिए बनाया है। इसका नाम 18वीं सदी के रूसी वैज्ञानिक मिखाइल लोमोनोसोव के नाम पर रखा गया था। रूसी न्यूक्लियर एजेंसी इस तरह के जहाजों को बनाने के बाद उनका निर्यात भी करना चाहती है।
बर्फ पर तैरता चर्नोबिल! : दरअसल परमाणु शक्ति से भरपूर तत्व बेहद खतरनाक होते हैं। अगर जरा भी चूक हो जाए तो बड़ा हादसा संभव है। इतिहास में चर्नोबिल को हम देख चुके हैं, जिसने एक पूरे शहर को ही तबाह कर दिया था। आज कई दशकों बाद भी वहां खतरनाक रेडिएशन है। अकादमिक लोमोनोसोव को पर्यावरणविदों ने बर्फ पर तैरने वाला चर्नोबिल नाम दिया था।
तैरते रिएक्टर को लेकर रही हैं ये चिंताएं : रूस के नए तैरते रिएक्टर का निर्माण शुरू हुआ है, लेकिन उसका एक रिएक्टर आर्कटिक क्षेत्र में काम कर रहा है। तैरते परमाणु प्लांट को लेकर ग्रीनपीस ने चेतावनी दी थी कि इससे निकलने वाले रिडियोएक्टिव कचरे से दुर्घटना हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये एक तैरता प्लांट है जो तूफानों में फंस सकता है और हादसे का शिकार हो सकता है। रोसाटॉम ने कहा था कि वह आने वाले भविष्य में इसी पर जरूरी ईंधन रखेगा। इस पर चेतावनी दी गई थी कि आर्कटिक क्षेत्र में रेडिएशन फैल सकता है और पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है।
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