
लद्दाख में भारतीय सरजमीं पर नजरें गड़ाए बैठे चीन को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी कांग्रेस के एक द्विदलीय विधेयक में भारत के प्रति चीन के आक्रामक रुख की निंदा की गई है। यह विधेयक अब कानून का रूप ले चुका है क्योंकि सदन ने इस पर डोनाल्ड ट्रंप के वीटो को खारिज कर दिया। सदन ने 740 अरब अमेरिकी डॉलर के रक्षा नीति विधेयक पर ट्रंप के वीटो को खारिज कर दिया। इस विधेयक में कई अन्य चीजों के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की निंदा भी शामिल है।
‘नैशनल डिफेंस ऑथोराइजेशन एक्ट’ (NDAA) शुक्रवार को कानून बन गया। इसमें एक ऐसा भी प्रस्ताव है जिसमें चीन सरकार से अपील की गई है कि वे वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत के प्रति सैन्य आक्रामक रुख को खत्म करें। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 23 दिसंबर को इस विधेयक पर वीटो इस्तेमाल किया था। हालांकि इस विधेयक को डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन सांसदों का समर्थन हासिल हुआ। वहीं राष्ट्रपति ट्रंप का कहना था कि इसमें ऐसे प्रावधान हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है।
ट्रंप के कार्यकाल के अंतिम दिनों में उनके लिए यह झटके की तरह है। भारतीय-अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने कहा, ‘आज नए साल के अवसर पर सदन में वोट के साथ संसद ने नैशनल डिफेंस ऑथोराइजेशन एक्ट को कानून बना दिया है। इसमें मेरे प्रस्ताव की कुछ बातें भी शामिल हैं जिसमें चीन से भारत के प्रति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आक्रामक रुख खत्म करने के लिए कहा गया है।’
फ्रांस की ला ट्रिब्यून फाइनेंशियल वेबसाइट ने पहले ही इस डील का खुलासा किया था। लेकिन उसकी रिपोर्ट में 36 के बजाय 48 राफेल का उल्लेख था। इसमें लिखा था कि जकार्ता अपने व्यापक रक्षा सहयोग को बढ़ाने के लिए फ्रांस के साथ राफेल विमानों की डील को अंतिम रूप देने के लिए उत्सुक है। उस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इस साल के अंत तक राफेल विमानों की डील पर सहमति बनने की संभावना जताई गई थी।
फ्रांस और इंडोनेशिया के बीच रक्षा संबंधों की हाल में ही शुरुआत हुई है। राफेल डील के पहले 2019 में इंडोनेशियाई एयरफोर्स के लिए आठ की संख्या में एयरबस हेलीकॉप्टर H225M हेलिकॉप्टर का सौदा हुआ था। निक्केई एशियन रिव्यू के अनुसार, इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री पार्बोवो सुबिआंतो की अक्टूबर में पेरिस दौरे के समय इस डील को लेकर बातचीत हुई थी।
चीन और इंडोनेशिया के बीच दक्षिणी चीन सागर में नातुना द्वीप को लेकर विवाद है। सितंबर में ही इंडोनेशिया ने अपने जलीय सीमा में पहुंचे चीन के एक युद्धपोत को खदेड़ दिया था। इसके बाद से चीन ने इंडोनेशिया के चारों ओर घेराबंदी को बढ़ा दिया था। साउथ चाइना सी में चीन से बढ़ते खतरे को देखते हुए इंडोनेशिया लगातार अपनी सेना को मजबूत कर रहा है।
इंडोनेशिया ने चीन के जहाज को नातुना द्वीप के पास से खदेड़ा था। यह क्षेत्र इंडोनेशिया के एक्सक्लूसिव इकनॉमी जोन में आता है। इंडोनेशियाई समुद्री सुरक्षा एजेंसी के जहाज चीनी युद्धपोतों और मछुआरों के इस क्षेत्र में लगातार घुसपैठ करने के कारण लगातार गश्त करती रहती हैं। इससे जलीय क्षेत्र की सुरक्षा के साथ-साथ चीन की हरकतों पर भी नजर बनी रहती है।
नातुना द्वीप के पास चीनी झंडे वाले मछली पकड़ने की नौकाएं अक्सर देखी जाती हैं। चीनी सरकार समर्थित ये नौकाएं ड्रैगन के दावे को लेकर भेजी जाती हैं। जिनकी रखवाली करने के लिए चीनी पेट्रोल वेसल भी तैनात होते हैं। जिसके बाद इस इलाके में इंडोनेशिया ने भी अपनी नौसेना की तैनाती बढ़ा दी है।
साउथ चाइना सी के 90 फीसदी हिस्से पर चीन अपना दावा करता है। इस समुद्र को लेकर उसका फिलीपींस, इंडोनेशिया, मलेशिया, ब्रुनेई और वियतनाम के साथ विवाद है। वहीं, पूर्वी चाइना सी में जापान के साथ चीन का द्वीपों को लेकर विवाद चरम पर है। हाल में ही अमेरिका ने साउथ चाइना सी पर चीन के दावे को खारिज कर दिया था।
साउथ चाइना सी में ‘जबरन कब्जा’ तेज कर दिया है। कुछ महीने पहले ही चीन ने साउथ चाइना सी की 80 जगहों का नाम बदल दिया। इनमें से 25 आइलैंड्स और रीफ्स हैं, जबकि बाकी 55 समुद्र के नीचे के भौगोलिक स्ट्रक्चर हैं। यह चीन का समुद्र के उन हिस्सों पर कब्जे का इशारा है जो 9-डैश लाइन से कवर्ड हैं। यह लाइन इंटरनैशनल लॉ के मुताबिक, गैरकानूनी मानी जाती है। चीन के इस कदम से ना सिर्फ उसके छोटे पड़ोसी देशों, बल्कि भारत और अमेरिका की टेंशन भी बढ़ गई है।
लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गतिरोध जारी : चीन और भारत के बीच पिछले साल मई से ही पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गतिरोध जारी है। इस गतिरोध को खत्म करने के लिए दोनों ही देशों के बीच कई चरणों की वार्ता हो चुकी है लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम निकलकर सामने नहीं आया है। कृष्णमूर्ति ने कहा, ‘वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत के साथ चीन की सेना का हिंसक आक्रामक रुख या कहीं भी इस तरह का रुख स्वीकार्य नहीं है। साथ ही इस कानून में लिखी गई बातें भारत और दुनिया के अन्य सहयोगियों को नव वर्ष में प्रवेश के साथ समर्थन और एकजुटता का स्पष्ट संदेश देती है।’
चीन द्वारा सीमा पर लगातार भारत के प्रति आक्रामक रुख रखने को लेकर ‘नैशनल डिफेंस ऑथोराइजेशन एक्ट’ में ‘गंभीर चिंता’ प्रकट की गई है। एनडीएए में कहा गया है कि चीन को ‘भारत के साथ मौजूदा राजनयिक तंत्रों के जरिए तनाव कम करने की दिशा में काम करना चाहिए और विवाद को बल पूर्वक निपटाने की कोशिश से बचना चाहिए।’
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