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चीन को घेरने के लिए साथ आ रहे ताइवान और तिब्‍बती, दलाई लामा कर सकते हैं यात्रा


चीन की बढ़ती दादागिरी के खिलाफ ड्रैगन के दो धुर विरोधी ताइवान और तिब्‍बत साथ आते दिखाई दे रहे हैं। भारत की ओर से तिब्‍बती सैनिकों के चीन को मुंहतोड़ जवाब देने के बाद यह दोस्‍ती और गहरी होती दिखाई दे रही है। तिब्‍बतियों के सर्वोच्‍च धर्मगुरु दलाई लामा ने जहां अगले साल ताइवान की यात्रा करने की इच्‍छा जताई है, वहीं ताइवान के राष्‍ट्रपति की प्रवक्‍ता ने विकास फोर्स में शामिल तिब्‍बती सैनिक के शहीद होने पर दुख जताया है।
दलाई लामा ने वाइस ऑफ तिब्‍बत फेसबुक पेज पर घोषणा की कि उन्‍हें ताइवान के एक संगठन की ओर से न्‍यौता म‍िला है। दलाई लामा ने कहा कि वह वर्ष 2021 में ताइवान की यात्रा कर सकते हैं। उन्‍होंने यह नहीं बताया कि उन्‍हें किस संगठन से न्‍यौता म‍िला है। वुहान कोरोना वायरस के दुनिया में फैलने के बाद से ही दलाई लामा लोगों से नहीं मिल रहे हैं और न ही व‍िदेशों की यात्रा कर रहे हैं।

शी जिनपिंग के आने पर कम हुई दलाई लामा की यात्रा
उधर, इस यात्रा पर ताइवान के व‍िदेश मंत्रालय ने कहा है कि दलाई लामा दुनिया के नामचीन आध्‍यात्मिक गुरु हैं। उनके सराहनीय कार्य की वजह से ही उन्‍हें नोबेल पीस प्राइज मिला था। मंत्रालय ने कहा कि दलाई लामा के बड़ी संख्‍या में समर्थक ताइवान में भी हैं जो चाहते हैं कि दलाई लामा उन्‍हें उपदेश देने के लिए दोबारा आएं। उन्‍होंने बताया कि अभी दलाई लामा की ओर से कोई आवेदन नहीं मिला है लेकिन अगर आवेदन आता है तो वह इस पर विचार करेगा।

अमेरिकी सैन्‍य ताकत के प्रतीक यूएसएस रोनाल्‍ड रीगन के नेतृत्‍व में कैरियर स्‍ट्राइक ग्रुप ने विवादित दक्षिण चीन सागर में जोरदार अभ्‍यास किया है। अमेरिकी सेना ने एक बयान जारी करके कहा कि इस अभ्‍यास का मकसद अपने सहयोगियों के साथ संयुक्‍त भागीदारी करना है और अपनी मारक क्षमता को बढ़ाना है। साथ ही इंडो-पसफिक इलाके में स्‍वतंत्र और मुक्‍त आवागमन बनाए रखना है। अमेरिकी नौसेना ने यह अभ्‍यास ऐसे समय पर किया है जब चीन से इलाके में तनाव बढ़ता जा रहा है।

अमेरिका ने चीन के साउथ चाइना सी पर दावे का विरोध किया है। चीन के किसी भी दुस्‍साहस का जवाब देने के लिए अमेरिका लगातार साउथ चाइना सी में अपने एयरक्राफ्ट कैरियर भेज रहा है। अमेरिका ने कहा है कि चीन कोरोना वायरस महामारी का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है और अपने क्षेत्रीय दावे को आगे बढ़ाने में लगा है। चीन ने अमेरिका के इस अभ्‍यास का विरोध किया है। यही नहीं चीन अब तटीय इलाके में अपने सैन्‍य ठिकानों की संख्‍या को काफी ज्‍यादा बढ़ा रहा है।

चीन ने ताइवान पर दबाव बनाने के लिए ताइवान स्‍ट्रेट के पास करीब 40 हजार सैनिक तैनात किए हैं। इसके लिए उसने दो मरीन ब्रिगेड बनाए हैं। चीन ने धमकी दी है कि अगर राजनीतिक तरीके से ताइवान चीन का हिस्‍सा नहीं बनेगा तो वह ताकत के बल पर ताइवान पर कब्‍जा कर लेंगे। पेइचिंग के सैन्‍य विशेषज्ञ झोउ चेनमिंग ने कहा कि हालिया युद्धाभ्‍यास ताइवान सरकार को राजनीतिक चेतावनी है। हॉन्‍ग कॉन्‍ग के सैन्‍य विशेषज्ञ सोंग झोंगपिंग का कहना है कि नवंबर में अमेरिकी चुनाव से पहले चीन और बड़े पैमाने पर युद्धाभ्‍यास कर सकता है।

इस बीच चीन से निपटने के लिए ताइवान ने सोमवार को अमेरिका की हथियार निर्माता कंपनी लॉकहीड के साथ 62 अरब डॉलर के F-16 फाइटर जेट खरीदने का सौदा किया है। यह सौदा करीब 10 साल में पूरा होगा। माना जा रहा है कि इस सौदे के बाद ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव काफी बढ़ सकता है। इस सौदे की संवेदनशीलता को देखते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इस सौदे का तो ऐलान किया लेकिन खरीददार का नाम नहीं बताया है। उधर, इस सौदे से जुड़े लोगों ने पुष्टि की है कि 62 अरब डॉलर की भारी-भरकम डील ताइवान के साथ की गई है।

नए सौदे के तहत ताइवान शुरू में 90 फाइटर जेट खरीदेगा जो अत्‍याधुनिक तकनीकों और हथियारों से लैस होंगे। इससे पहले पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम और स्ट्रिंगर मिसाइल भी अमेरिका ने ताइवान को द‍िए थे। अमेरिका ने भले ही वर्ष 1979 में चीन को मान्‍यता दी हो, फिर भी वह ताइवान का सबसे शक्तिशाली सहयोगी और हथियारों का सप्‍लायर है। यह सौदा ऐसे समय पर हुआ है जब हॉन्‍ग कॉन्‍ग के लिए चीन ने जबरन सुरक्षा कानून पारित किया है। इस कानून के बाद ताइवान की टेंशन और ज्‍यादा बढ़ गई है। उसे यह डर सता रहा है कि अगला नंबर उसका हो सकता है। इस सौदे से ठीक पहले अमेरिका के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ताइवान की यात्रा पर गए थे। वर्ष 1979 के बाद पहली बार इतने शीर्ष स्‍तर का नेता ताइवान पहुंचा था।

दलाई लामा वर्ष 1997, 2001 और 2009 में ताइवान की यात्रा कर चुके हैं। हालांकि जब से चीन में शी जिनपिंग ने सत्‍ता संभाली है, दलाई लामा की यात्राएं कम हो गई हैं। उधर, भारत के विकास स्‍पेशल फोर्स में तिब्‍बती सैनिक की शहीद होने पर ताइवान के राष्‍ट्रपति की प्रवक्‍ता ने दुख जताया है। उन्‍होंने कहा कि भारत के स्‍पेशल फ्रंटियर फोर्स में शाम‍िल जवान नयमा तेनजिन के पार्थिव शरीर को तिब्‍बती राष्‍ट्रीय झंडे में लिपटे देखकर दुख हो रहा है।