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‘भारत-विरोधी राष्ट्रवाद का दौर खत्म’, बालेन शाह के दिल्ली दौरे से पहले नेपाली वित्त मंत्री का बयान, क्या है नई नीति?


नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने कहा है कि नेपाल में राष्ट्रवाद को भारत-विरोधी भावनाओं से जोड़ने का दौर अब खत्म हो गया है। उनका ये बयान उस वक्त आया है जब नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के अगले महीने नई दिल्ली की यात्रा करने की संभावना है। प्रधानमंत्री बनने के बाद ये उनकी पहली नई दिल्ली की यात्रा होगी और इस दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौते हो सकते हैं। नेपाली वित्त मंत्री ने कहा कि यह नई सरकार के उस इरादे को दर्शाता है जिसके तहत वह नई दिल्ली के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करना चाहती है।
एनडीटीवी से बात करते हुए वागले ने कहा कि नेपाल और भारत के बीच गहरे संबंध हैं और नई सरकार इन द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाना चाहती है। वागले ने कहा ‘भारत और नेपाल के बीच संबंध बहुत गहरे हैं। कभी-कभी कुछ समस्याएं आ सकती हैं लेकिन हम मजबूती से जुड़े हुए हैं। नेपाल के किसी अन्य देश के साथ वैसे संबंध नहीं हैं जैसे भारत के साथ हैं।’
‘एक वक्त नेपाल में था भारत विरोधी भावनाओं का दौर’ – नेपाल के वित्त मंत्री ने कहा कि कि दोनों देशों के बीच न सिर्फ भौगोलिक नजदीकी है बल्कि गहरे सांस्कृतिक संबंध भी हैं। उन्होंने आगे कहा कि नेपाल का नया नेतृत्व इन्हीं संबंधों को और आगे बढ़ाना चाहता है। वागले ने कहा ‘एक समय ऐसा था जब नेपाल में राष्ट्रवाद को भारत-विरोधी भावनाओं से जोड़कर देखा जाता था। लेकिन वह दौर अब खत्म हो चुका है।’
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह 2026 के अंत तक भारत का दौरा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की यात्रा नेपाल-भारत संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने में मदद कर सकती है। हालांकि अभी कोई तारीख तय नहीं हुई है लेकिन दोनों पक्षों ने इस यात्रा की तैयारियों के लिए शुरुआती काम शुरू कर दिया है। काठमांडू पोस्ट ने नेपाली सूत्रों के हवाले से बताया है कि बालेन शाह नवंबर के आखिर तक भारत आ सकते हैं। वागले ने भी संकेत दिया कि यह यात्रा साल के अंत से पहले हो सकती है लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है।
केपी शर्मा ओली की सरकार ने भड़काई भावना! – वित्त मंत्री वागले ने कहा ‘औपचारिक बातचीत और आधिकारिक संवाद में भारत ने हमेशा मदद के लिए अपनी तत्परता दिखाई है। भारत ने साफ कर दिया है कि नेपाल को जिस भी चीज की जरूरत होगी वह उसे देने के लिए तैयार है।’ अगस्त में हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों के विनाशकारी हिमस्खलन और उसके बाद आई बाढ़ से नेपाल में भारी तबाही हुई। इसके बाद कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने राहत और बचाव कार्यों में मदद की।
वागले की बातों ने नेपाल-भारत संबंधों के आर्थिक पहलू पर भी जोर दिया। 2047 तक एक विकसित देश बनने के भारत के लक्ष्य का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नेपाल अपने दक्षिणी पड़ोसी को और अधिक समृद्ध और आर्थिक रूप से मजबूत होते देखना चाहता है जिससे पड़ोसी देशों के लिए भी अवसर पैदा हों। आपको बता दें कि इससे पहले केपी शर्मा ओली की सरकार के दौरान भारत विरोधी भावनाओं को लोगों के मन में भरा गया। सीमा विवाद को जान-बूझकर भड़काया गया। लिपुलेख विवाद ने दोनों देशों के संबंध को काफी नुकसान पहुंचाया जबकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसपर काफी आसानी से बात हो सकती थी। ओली सरकार पर चीन का काफी प्रभाव था और उसका असर भारत-नेपाल संबंध पर देखा गया।
आपको बता दें कि भारत, नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करने, नेपाल में निवेश करने, पारगमन (ट्रांजिट) सुविधाएं देने और सीमा पार ऊर्जा सहयोग को समर्थन देने में अहम भूमिका निभाता है। खुली सीमा और लोगों के बीच गहरे संबंधों के कारण नेपाल की आर्थिक और विदेश नीति में भारत के साथ संबंधों का हमेशा से ही केंद्रीय स्थान रहा है।