Sunday , April 26 2026 6:02 PM
Home / News / चीन की कोरोना वैक्‍सीन पर दुनिया को नहीं हो रहा भरोसा, पाकिस्‍तानियों ने भी किया किनारा

चीन की कोरोना वैक्‍सीन पर दुनिया को नहीं हो रहा भरोसा, पाकिस्‍तानियों ने भी किया किनारा


वुहान से पूरी दुनिया में फैले कोरोना वायरस को लेकर चीन ने ऐसा भरोसा खोया है कि पूरी दुनिया में उसे अपनी कोविड-19 वैक्‍सीन के लिए खरीदार तलाशने में नाको चने चबाने पड़ रहे हैं। आलम यह है कि उसका आयरन ब्रदर पाकिस्‍तान अपने देश में चीनी कोरोना वैक्‍सीन का ट्रायल तो जरूर करा रहा है लेकिन पाकिस्‍तानी जनता को इस वैक्‍सीन पर भरोसा नहीं हो रहा है। वह भी तब जब चीन ने कंगाल पाकिस्‍तान में 70 अरब डॉलर का निवेश कर रखा है।
चीन की कोरोना वैक्‍सीन को लेकर पाकिस्‍तान, इंडोनेशिया, ब्राजील समेत कई विकासशील देशों में जनता के बीच सर्वेक्षण कराया गया और अधिकारियों से उनकी राय जानी गई। इसमें यही खुलासा हुआ है कि चीन अपनी कोरोना वैक्‍सीन को लेकर करोड़ों को आश्‍वस्‍त करने में असफल रहा है जिन्‍होंने पहले उस पर भरोसा किया था। पाकिस्‍तान के कराची शहर के मोटरसाइकल ड्राइवर फरमान अली ने कहा, ‘मैं चीनी वैक्‍सीन नहीं लगवाऊंगा। मुझे इस वैक्‍सीन पर भरोसा नहीं है।’
भरोसे के संकट से जूझ रही है चीन की कोरोना वैक्‍सीन : यह अविश्‍वास और दर्जनों गरीब देशों के चीन पर निर्भरता से दुनिया के समक्ष एक बड़ा राजनीतिक संकट पैदा हो सकता है। वह भी तब जब उस देश के नागरिकों को यह महसूस हो कि चीन ने जो कोरोना वायरस वैक्‍सीन दी है, वह घटिया है। चीन की कोरोना वायरस वैक्‍सीन चीन को गरीब देशों को साधने में बड़ी राजनयिक बढ़त दिलवा सकता है जिनको पश्चिमी देशों की ओर से विकसित कोरोना वैक्‍सीन नहीं म‍िल पा रहा है।
इस संभावना के बीच अभी तक चीनी कोरोना वैक्‍सीन के अंतिम चरण के ट्रायल को लेकर कुछ भी स्‍पष्‍ट नहीं है। अभी तक केवल संयुक्‍त अरब अमीरात और चीन ने ही इस वैक्‍सीन के आपातकालीन इस्‍तेमाल को मंजूरी दी है। इस बीच कुछ अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियों ने सुरक्षा और प्रभावशीलता को लेकर अपने आंकड़े जारी किए हैं। यही नहीं ये वैक्‍सीन अब लगना भी शुरू हो गई हैं। इस अनिश्चितता से चीन को एशिया, अफ्रीका और साउथ अमेरिका में प्रभाव बढ़ाने के अभियान को बड़ा झटका लगा है।
चीन की कोरोना वैक्‍सीन को लेकर इसलिए भी लोगों को भरोसा नहीं हो रहा है कि उसने शुरू में बहुत से देशों को घटिया मास्‍क और पीपीई सूट निर्यात किए थे। इसको लेकर चीन की दुनियाभर में कड़ी आलोचना हुई थी। बता दें कि चीन की कोरोना वायरस वैक्सीन का दुनिया के अगल-अलग देशों में असर में भारी अंतर देखा जा रहा है। चीन की सिनोवेक कंपनी के कोरोना वायरस वैक्सीन कोरोनावेक का ब्राजील और तुर्की में ट्रायल किया गया है। इन दोनों देशों के आधिकारिक डेटा के अनुसार, चीनी कोरोना वैक्सीन ब्राजील में 50 फीसदी तो तुर्की में 91.25 फीसदी कारगर है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर चीन की कोरोना वैक्सीन के असर में इतना अंतर कैसे आ रहा है।
कोरोना के ये नए स्‍ट्रेन बेहद संक्रामक बताए जा रहे हैं। सतर्कता दिखाते हुए भारत समेत कई देशों ने ब्रिटेन के लिए अपनी उड़ानें प्रतिबंधित कर दी हैं। इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका से उड़ानों पर भी रोक लगने लगी है। ब्रिटेन के कई हिस्‍से सख्‍त लॉकडाउन में चले गए हैं जबकि वहां क्रिसमस का मौका है। नए वैरियंट पर अमेरिका, यूके समेत कई देशों में रिसर्च शुरू हो गई है। वायरस के नए रूपों को लेकर इतनी हलचल इसलिए दिख रही है क्‍योंकि ये ‘ज्‍यादा संक्रामक’ हैं और इन्‍हें लेकर हमें ज्‍यादा पता नहीं है।

किसी वायरस का अपना रूप बदलना बेहद सामान्‍य है। आबादी में जैसे-जैसे वायरस फैलता है, वह अपना रूप बदलता जाता है। फर्क इतना होता है कि कुछ ज्‍यादा तेजी से बदलते हैं, कुछ धीमे। नया वैरियंट SARS-CoV-2 के स्‍पाइक प्रोटीन में कई सारे म्‍यूटेशंस का नतीजा है।इनमें से एक म्‍यूटेशन को N501Y नाम दिया गया है, यह स्‍पाइक प्रोटीन के उस एरिया में मिला है जो इंसानी कोशिका के एक प्रमुख प्रोटीन ACE2 रिसेप्‍टर से जुड़ता है। इस नए स्‍ट्रेन का पहला केस 16 दिसंबर को मिला था। यूके के हेल्‍थ डिपार्टमेंट के अनुसार, स्‍पाइक प्रोटीन के अभी करीब 4,000 म्‍यूटेशंस मौजूद हैं। कोविड-19 वायरस के कई स्‍ट्रेन सामने आ चुके हैं जिनमें से कुछ ज्‍यादा बड़े इलाके में फैले, कुछ छोटे भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित रहे।
अभी तक इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है। मेडिकल एक्‍सपर्ट्स बस इतना कह रहे हैं कि ये 70% ज्‍यादा संक्रामक है। अभी तक इस स्‍ट्रेन के मामलों में लक्षण सामान्‍य कोविड जैसे ही रहे हैं। यह भी क्लियर नहीं है कि ये नए वैरियंट किस हद तक बीमार करते हैं। इसका इन्‍फेक्‍शन रेट ज्‍यादा है। एक्‍सपर्ट्स से जानिए नए स्‍ट्रेन से कैसे होगा बचाव
वायरस के जेनेटिक कोड में बदलाव से एक नया रूप तैयार होता है। ज्‍यादा चिंता की बात तब होती है जब वायरस अपनी सतह के प्रोटीन्‍स में बदलाव करके म्‍यूटेट होता है। नए स्‍ट्रेन्‍स में यही हुआ है। इसका नतीजा ये होता है कि वायरस इम्‍युन सिस्‍टम या दवाओं से बच जाता है। जिन्‍हें पहले कोविड हो चुका है, उन्‍हें इस नए स्‍ट्रेन से इन्‍फेक्‍शन की बेहद कम संभावना जताई गई है।
यह सबसे अहम सवाल है। अभी तक हां या ना में जवाब नहीं मिला है मगर अधिकतर एक्‍सपर्ट्स यही कह रहे हैं कि वैक्‍सीन नए स्‍ट्रेन पर भी काम करनी चाहिए। मॉडर्ना, फाइजर ने रिसर्च शुरू कर दी है।
ब्राजील में 50 फीसदी प्रभावी है चीनी वैक्सीन : ब्राजील के रिसर्चर्स ने बुधवार को चीन के सिनोवैक बायोटेक की कोरोना वायरस वैक्सीन के ट्रायल डेटा का खुलासा किया। रिसर्चर्स ने बताया कि यह वैक्सीन ब्राजील के लोगों पर लगभग 50 फीसदी के आसपास कारगर है। ब्राजील इस वैक्सीन का लेट स्टेज ट्रायल को पूरा करने वाला भी पहला देश है। लेकिन रिसर्चर्स ने कहा है कि उन्हें पूरे डेटा को प्रासेस करने के लिए और वक्त चाहिए।
क्या देश देखकर असर कर रही चीनी वैक्सीन? : ऐसा माना जाता है कि चीन का ब्राजील के साथ संबंध सही नहीं है। ब्राजीली राष्ट्रपति अक्सर चीन के खिलाफ बयान देते रहते हैं। वहीं, तुर्की को चीन का बेहद करीबी माना जाता है। हाल में ही अमेरिकी प्रतिबंध लगने के बाद तुर्की और चीन के रिश्ते काफी मजबूत हुए हैं। 14 दिसंबर को चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुत कैवसोग्लू के साथ फोन पर बातचीत कर हर संभव मदद का भरोसा दिया था।