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‘अफगान अस्पताल पर बमबारी करने वाले ज्ञान ना दें’, भारत ने UNSC में खोली पाकिस्तान के पाखंड की पोल, लताड़ा


संयुक्त राष्ट्र में भारत के दूत हरीश पर्वथनेनी ने पाकिस्तान को जमकर फटकार लगाई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पी. हरीश ने पाकिस्तान के अफगानिस्तान में हवाई हमलों और 1971 में बांग्लादेश में हुई हिंसा का मुद्दा उठाया। उन्होंने मानवाधिकारों और आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान के दोहरे रवैये की आलोचना की। यूएनएससी में बुधवार को ‘सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा’ के मुद्दे पर सालाना खुली बहस में बोलते हुए भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश पर्वथनेनी ने ये बातें कही हैं।
पी हरीश ने अपने संबोधन की शुरुआत चीन को बधाई देकर की। चीन को इस महीने के लिए UNSC की अध्यक्षता मिली है। उन्होंने कहा कि भारत UN चार्टर के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराता है और इस बात पर जोर देता है कि संघर्ष की स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा करना, अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने का एक केंद्रीय तत्व है।
साल 2025 में बीस सशस्त्र संघर्षों में दर्ज की गई नागरिकों की मौतें 37,000 से अधिक थीं। नागरिकों की लगातार मौतें, विस्थापन, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का विनाश, अस्पतालों, स्कूलों, चिकित्सा कर्मियों तथा मानवीय सहायता कर्मियों पर हमले गहरी चिंता का विषय हैं। पी हरीश
नागरिकों की जान पर जीरो टॉलरेंस – हरीश ने कहा कि भारत नागरिकों की जान के नुकसान के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति चाहता है। सशस्त्र संघर्ष में शामिल पक्षों को अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून का सम्मान करते हुए अबाधित मानवीय पहुंच सुनिश्चित करनी चाहिए। भारत इस बात को दोहराता है कि चिकित्सा कर्मियों और मानवीय सहायता कर्मियों की सुरक्षा हर समय सुनिश्चित की जाए।
UNSG की रिपोर्ट में भी रेखांकित किया गया है कि शहरों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में मिसाइलों, बमों और विस्फोटक हथियारों का इस्तेमाल नागरिकों को नुकसान पहुंचाने का एक प्रमुख कारण बना हुआ है। शहरी क्षेत्रों में विस्फोटक हथियारों को तैनात करने के लिए ड्रोन के इस्तेमाल का बढ़ता चलन विशेष रूप से चिंताजनक है।
पाकिस्तान आक्रामकता के जघन्य कृत्य करता और सुनियोजित नरसंहार करता है। 1971 में ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ के दौरान, पाकिस्तान ने अपनी ही सेना द्वारा 400,000 महिला नागरिकों के साथ सुनियोजित सामूहिक बलात्कार के नरसंहारी अभियान को मंजूरी दी थी। पी हरीश
सीमा पार आतंकवाद पर भारत चिंतित – पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए पी हरीश ने कहा कि भारत सीमा पार से होने वाले आतंकवाद के लगातार बने रहने वाले खतरे पर गहरी चिंता व्यक्त करता है। यह आतंकवाद क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के मूलभूत सिद्धांतों को कमजोर कर रहा है। भारत दशकों से आतंकवाद के इसी स्वरूप का शिकार रहा है। जो देश आतंकवाद को प्रायोजित करते हैं, उनको जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान का नरसंहार के कृत्यों का इतिहास लंबे समय से दागदार रहा है। पाकिस्तानी पक्ष भारत के आंतरिक मामलों का जिक्र कर रहा है। उसे उस रिपोर्ट पर ध्यान देना चाहिए, जिसमें अफगानिस्तान संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) ने बताया है कि 2026 के पहले तीन महीनों में अफगानिस्तान में पाकिस्तानी सैन्य बलों के हमलों में 750 नागरिकों की मौतें दर्ज की गईं, ये हवाई हमलों के कारण हुईं।
पाकिस्तान कर रहा है पाखंड – दुनिया यह नहीं भूली है कि इसी साल मार्च में रमजान के पवित्र महीने के दौरान पाकिस्तान ने काबुल के ‘उमीद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल’ पर बर्बर हवाई हमला किया यह हमला एक ऐसी सुविधा पर किया गया था, जिसे किसी भी तरह से सैन्य लक्ष्य के रूप में सही नहीं ठहराया जा सकता।अंतरराष्ट्रीय कानून के उच्च सिद्धांतों की वकालत करना और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया जाना पाखंड है।
भारत इस बात को दोहराता है कि अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए सुरक्षा परिषद के प्रयासों के केंद्र में नागरिकों की सुरक्षा ही होनी चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को मिलकर काम करना चाहिए ताकि अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के प्रति सम्मान को बहाल और सुनिश्चित किया जा सके। जवाबदेही को मजबूत किया जा सके और मानवीय सहायता की पहुंच सुनिश्चित की जा सके।