Friday , May 1 2026 11:26 PM
Home / Uncategorized / ईरान के खिलाफ पहली बार हाइपरसोनिक मिसाइल तैनाती करेगा US, सेंट्रल कमांड ने की मांग, रूस और चीन की बराबरी

ईरान के खिलाफ पहली बार हाइपरसोनिक मिसाइल तैनाती करेगा US, सेंट्रल कमांड ने की मांग, रूस और चीन की बराबरी


अमेरिका ईरान के खिलाफ संभावित इस्तेमाल के लिए मध्य पूर्व में हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम तैनात करने की तैयारी कर रहा है। अगर ऐसा होता तो यह इस हथियार की पहली ऑपरेशनल तैनाती होगी। ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी है। इसमें कहा गया है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सेना के लंबे समय से अटके हुए डार्क ईगन सिस्टम को इस क्षेत्र में भेजने का अनुरोध किया है।
इसका मकसद अमेरिकी सेना को ईरान के अंदरूनी हिस्सों में मौजूद बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों पर हमला करने की क्षमता देना है। अगर इसे मंजूरी मिल जाती है तो यह पहली बार होगा जब अमेरिका किसी हाइपरसोनिक हथियार सिस्टम तैनात करेगा। इस सिस्टम को तैयार होने में कई साल की देरी हुई है और इसे अभी तक पूरी तरह से ऑपरेशनन घोषित नहीं किया गया है।
इस अनुरोध की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि सेना के लिए अनुरोध प्रस्तुत करने में इस कदम को यह कहकर उचित ठहराया गया है कि ईरान ने अपने लॉन्चरों को सटीक मिसाइल हमले की सीमा से बाहर कर दिया है, जो 480 किमी से अधिक दूरी के लक्ष्यों को भेद सकता है।
ईरान के खिलाफ हमले की तैयारी – मामले की जानकारी रखने वाले शख्स ने नाम न छापने की शर्त पर ब्लूमबर्ग को बताया कि अभी तक अनुरोध पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। वहीं, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। यह अनुरोध इस बात का संकेत देता है कि ईरान के साथ युद्धविराम भले ही लागू है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप आगे बढ़ने का फैसला करते हैं, तो अमेरिका हमला करने की तैयारी में है।
रूस-चीन की बराबरी करेगा अमेरिका – अमेरिका और ईरान के बीच 9 अप्रैल से युद्धविराम लागू है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों पक्ष इस समय का इस्तेमाल फिर से हथियार जुटाने और योजना बनाने के लिए कर रहे हैं। इससे लड़ाई के आने वाले दौर ज्यादा घातक हो सकते हैं।
अगर इस फैसले को मंजूरी मिल जाती है तो यह अमेरिका के रणनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के लिए संकेत होगा कि आखिरकार पेंटागन के पास भी हाइपरसोनिक मिसाइल की क्षमता हासिल हो गई है। रूस और चीन बहुत पहले ही अपने हाइपरसोनिक हथियारों की तैनाती कर चुके हैं।