
चीन के वुहान स्थित जानवरों के मार्केट से निकला किलर कोरोना वायरस 5 माह में करीब 2 लाख लोगों की जान ले चुका है और 30 लाख अन्य संक्रमित हैं। विवादों के बीच माना जा रहा है कि यह वायरस चमगादड़ के जरिए आया है जबकि अमेरिका और ब्रिटेन में सीधे इंसानों पर इसके वैक्सीन के ट्रायल शुरू हो गए हैं। लेकिन चीनी वैज्ञानिक पहले चूहों और बंदरों पर पर इसकी वैक्सीन का ट्रायल कर रहे हैं और फिर इंसानों पर। चीन से खबर है कि यहां की कम्पनी सिनोवैक बायोटेक ने रीसस बंदरों पर वैक्सीन का ट्रायल करके संक्रमण को रोकने में सफलता पाई है।
वहीं, ब्रिटेन में दुनिया में सबसे तेज गति से वैक्सीन बनाने में जिस वायरस का इस्तेमाल हो रहा है वह भी इंसानों के पूर्वज कहे जाने वाले चिम्पैंजी से लिया गया है। चीनी कंपनी ने कहा कि उसने अपने वैक्सीन की 2 अलग-अलग खुराकों को आठ रीसस मकाऊ (लाल मुंह वाले भूरे बंदर) प्रजाति के बंदरों में इंजेक्ट किया और तीन सप्ताह बाद उन्हें वायरस के संपर्क में लाने पर पता चला कि उनके अंदर किसी तरह का संक्रमण पैदा नहीं हुआ। सभी बंदर प्रभावी स्तर पर SARS-CoV-2 यानी Covid-19 वायरस के संक्रमण से सुरक्षित थे। वायरस से संक्रमित करने के बाद चार बंदरों को वैक्सीन की ज्यादा खुराक दी गई थी और 7 दिन के बाद के नतीजों में उनके फेफड़ों में वायरस का संक्रमण बहुत ही कम देखा गया।
चार अन्य बंदरों को कम खुराक दी गई थी, लेकिन उन्होंने कम वैक्सीन होने के बावजूद अपनी खुद की इम्यूनिटी से वायरस पर काबू पा लिया। इसके विपरीत चार अन्य बंदरों को कोई खुराक नहीं दी गई और वायरस के संक्रमित किए जाने पर उनमें गंभीर निमोनिया हो गया। साइनोवैक ने मानव परीक्षण शुरू करने के तीन दिन बाद 19 अप्रैल को ऑनलाइन सर्वर बायोरेक्सिव पर इस ट्रायल के नतीजे प्रकाशित किए हैं। इसके निष्कर्षों को दुनियाभर के वैज्ञानिकों द्वारा मूल्यांकन किया जाना बाकी है। सिनोवैक के प्रवक्ता यांग गुआंग ने कहा है कि वैक्सीन बनाने में रासायनिक रूप से निष्क्रिय नोवल कोरोनावायरस पैथोजन्स का इस्तेमाल किया जा रहा है जो असली बीमारी के खिलाफ शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाएगा।
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