
भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने भारत और भारतीय लोगों का बहुत बहुत आभार जताया है। तेहरान ने अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध के दौरान सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद भारतीयों के सपोर्ट का बहुत-बहुत शुक्रिया कहा है। ईरान की यह प्रतिक्रिया तब आई है, जब पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता खटाई में पड़ गई है। ईरान ने कहा है कि यह वार्ता अविश्वास के माहौल में हुई। जानते हैं ईरान के इस बयान के मायने।
इलाही बोले-भारत के महान लोगों की सराहना करते हैं – नई दिल्ली में ईरानियन कल्चरल सेंटर में शहीद-ए-उम्मत के चेहल्लुम में इलाही ने कहा कि खामेनेई को याद करते हुए कहा-खामेनेई ने अपनी जिंदगी मानवता और न्याय के लिए कुर्बान कर दी।
इलाही ने कहा-‘उनकी शहादत के 40 दिन हो गए। हम यहां सिर्फ उन्हें याद करने ही नहीं जुटे हैं, बल्कि ईमानदारी से भारत और इसके महान, बुद्धिमान और भरोसेमंद लोगों की सराहना करते हैं और एहसान जताते हैं।’
भारतीय लोगों के मूल्यों पर ईरानी प्रतिनिधि ने कही बड़ी बात – इलाही ने सुझाव दिया कि भारतीय जनता की प्रतिक्रिया साझा सिद्धांतों के प्रति आपसी समर्पण को रेखांकित करती है। बीते कुछ हफ्तों से उन्होंने एकजुटता दिखाई है।
इलाही ने कहा-इन दिनों भारत के महान लोगों ने इंसाफ के लिए महत्वपूर्ण रूप से भरोसे, बुद्धिमत्ता और प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने कहा-इस तरह के श्रद्धांजिल कार्यक्रमों में भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी नैतिक उद्देश्यों के प्रति सार्वभौमिक सहमति को दर्शाती है।
हमेशा इंसाफ के साथ खड़े रहते हैं भारतीय: ईरानी प्रतिनिधि – इलाही ने भारतीयों के बारे में कहा-इस यादगार आयोजन में भारतीयों की हार्दिक सहानुभूति और मानवीय संदेशों ने यह दिखाया है कि सत्य की कोई सीमा नहीं होती और जागृत हृदय हमेशा इंसाफ के साथ खड़े रहते हैं।
ईरान ने संकट में भी भारत के जहाजों की आवाजाही को दी थी मंजूरी – 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में 86 साल के अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद से ही पश्चिम एशिया का तनाव और बढ़ गया था।
इस वजह से दुनिया की ऑयल सप्लाई की लाइफलाइन कहे जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया गया था। इससे भारत समेत दुनिया में तेल-गैस की आपूर्ति पर खासा असर पड़ा है। हालांकि, ईरान ने युद्ध के दौरान भी भारत, पाकिस्तान, चीन समेत कई देशों के जहाजों की होर्मुज से आवाजाही को मंजूरी दी थी।
अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में पाकिस्तान नाकाम? – अयातुल्ला खामेनेई के बाद से मोजतबा खामेनेई को ईरान का सुप्रीम लीडर बनाया गया। हालांकि, सत्ता का यह हस्तांतरण अब क्षेत्रीय कूटनीति में आई गंभीर विफलता से प्रभावित हो रहा है।
हाल ही में रविवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के इस्लामाबाद से जाने के बाद पूर्ण कूटनीतिक गतिरोध की पुष्टि हो गई, क्योंकि लंबी वार्ता के बाद भी कोई समझौता नहीं हो पाया।
अमेरिका-ईरान में यह फंस गया पेच – जेडी वैंस ने कहा कि कोई समझौता नहीं हो सका क्योंकि तेहरान ने वाशिंगटन की ‘रेड लाइन्स’ को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम के संबंध में यह वार्ता फेल हो गई।
इस विफलता के जवाब में ईरान के एक प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने रविवार को कहा कि तेहरान के वार्ताकारों ने 21 घंटे के सत्र के दौरान अपनी सभी उपलब्ध क्षमताओं का इस्तेमाल किया, लेकिन सफलता ईरान के वैध अधिकारों और हितों की मंजूरी पर निर्भर है।
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