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‘हम झुकेंगे नहीं-रुकेंगे नहीं’, परमाणु परीक्षण के बाद जब पश्चिम ने भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की, अटल का जवाब


पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए, लेखक ने उनके राजनीतिक जीवन, भारतीय जनसंघ से भाजपा के गठन और एक अभिभावक के रूप में उनकी भूमिका का वर्णन किया है। वाजपेयी ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर भाजपा की नींव रखी और गैर-कांग्रेसी सरकारों के कार्यकाल पूरा करने की मिसाल कायम की।
डॉ. दिनेश शर्मा: कहते हैं, राजनीति में विरोधी भी सामान पर धूल की तरह ही जमा हो जाते हैं। मगर हमारे पास एक ऐसे शख्स थे जिन्होंने इसे झूठा साबित किया। वह ऐसे इंसान थे, जिनके प्रतिद्वंद्वी तो थे, पर कोई दुश्मन नहीं। दुनिया के लिए वह भारत को नया रूप देने वाले प्रधानमंत्री थे, मेरे और लखनऊ वालों के लिए बस अटल।
पश्चिम के आगे अडिग रहे – यह लिखते-लिखते मैं अमीनाबाद की तंग गलियों और मेरे घर में उनके आने की यादों में खो गया हूं। पहली बार वह जब मेरे यहां आए, तो मैंने उन्हें खीर परोसा। घबराहट में मुझसे थोड़ी खीर उनके कपड़ों पर गिर गई। इस पर नाराज होने की बजाय वह हंस पड़े। अटल बिहारी वाजपेयी देश के पीएम ही नहीं, बल्कि एक अभिभावक थे। उन पर लिखना ‘गागर में सागर’ भरने जैसा है।
पाकिस्तान परमाणु हथियार वाला मिलिट्री शासन, जानें पुतिन ने बुश से क्या कहा था – उन्हें विरासत में सत्ता नहीं मिली थी। इसके लिए उन्होंने कठिन तपस्या की थी। दीनदयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व वाले भारतीय जनसंघ से उन्होंने राजनीति शुरू की। 1957 में पहली बार लोकसभा पहुंचे और उनकी प्रतिभा देख पंडित जवाहरलाल नेहरू ने तब कहा था कि ‘यह लड़का किसी दिन भारत का प्रधानमंत्री बनेगा।’ 1980 में जब जनता पार्टी का प्रयोग विफल हुआ और कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा, तब अटलजी ने ‌‌‌‌‌BJP का गठन किया। उनका यह कहना कि अंधेरा छंटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा आज भी पार्टी कार्यकर्ताओं की जुबां पर है। उन्होंने BJP को आक्रामकता की नींव पर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के स्तंभ पर खड़ा किया।
आज सच्चे राजनेता के तौर पर अटलजी की विरासत एक मिसाल है। उन्होंने साबित किया कि गैर-कांग्रेसी सरकारें भी कार्यकाल पूरा कर सकती हैं। 20 से अधिक दलों को साथ लेकर NDA का गठन किया। हमेशा गठबंधन धर्म का पालन करने वाले अटल जानते थे कि भारत जैसे विविधतापूर्ण लोकतंत्र की ताकत उसका लचीलापन है। लखनऊ में मैंने कई बार देखा कि वह सुबह किसी आलोचक के साथ हंसी-मजाक करते और शाम तक वह शख्स सरकार के विधेयक का समर्थन कर देता। उनके लिए विपक्ष दुश्मन नहीं रहा और देश हमेशा पार्टी से ऊपर। पीवी नरसिम्हा राव ने उन्हें कश्मीर पर पक्ष रखने के लिए जिनेवा भी भेजा।
पीएम बनने के बाद उन्होंने कई ऐतिहासिक निर्णय लिए। पोखरण में परमाणु परीक्षण कर उन्होंने दुनिया को भारत की ताकत का अहसास कराया। तब पश्चिम ने हमें डराने की पूरी कोशिश की, मगर वह अटल रहे। अर्थव्यवस्था में जान डालने के लिए उन्होंने कई काम किए। दिल्ली, मुंबई, चेन्नै, कोलकाता को जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज योजना की शुरुआत की। शहर को गांव से जोड़ने के लिए PMGSY उन्हीं की सोच थी। आज हर हाथ में मोबाइल उन्हीं की टेलिकॉम क्रांति की वजह से है। अंधाधुंध सरकारी खर्च पर रोक लगाने के लिए वह FRBM अधिनियम लेकर आए।