
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) लगातार दुनिय को जागरूक कर रहा है। डब्ल्यूएचओ ने शनिवार को लोगों को चेताते हुए एक ट्वीट किया, जिसने दुनिया में हड़कंप मचा दिया। हालांकि बाद में WHO को अपने इस ट्वीट को डिलीट करना पड़ा।
WHO ने अपने इस ट्वीट में कहा था कि COVID-19 से रिकवर होने वाले लोगों के शरीर में एंटीबॉड्रीज बनती हैं या वे सेकेंड इन्फेक्शन से सुरक्षित हैं, इस बात के कोई सबूत नहीं है। दरअसल चीन और दक्षिण कोरिया में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां कोरोना से रिकवर हो चुका मरीज फिर से पॉजिटिव निकल रहा है। डॉक्टर्स ने यह पाया कि कई मामलों में रिकवरी के बाद पेशेंट टेस्ट में नेगेटिव आया, मगर 50 से 70 दिन बाद फिर टेस्ट पॉजिटिव निकला।
WHO के इस ट्वीट को कोट करते हुए अमेरिका की यूनिवर्सिटी और मैरीलैंड में इन्फेक्शियस डिलीजेज के चीफ फहीम युनूस ने कहा कि लोगों को बेवजह डराने की जरूरत नहीं है। वायरल इन्फेक्शन से पूरी तरह रिकवर होने वाले मरीज भी आमतौर पर इम्यून हो जाते हैं। यह इम्यूनिटी महीनों से लेकर सालों तक चल सकती है। इस तरह की बातों से डरने की जरूरत नहीं है। डॉक्टर की प्रतिक्रिया के कुछ देर बाद ही WHO ने अपना ट्ववीट डिलीट कर दिया।
डॉ. यूनुस ने COVID मरीजों के फिर से पॉजिटिव मिलने की दो वजहें भी गिनाई। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि पहले हुआ टेस्ट गलत हो। एक वजह ये भी हो सकती है कि टेस्ट में मृत वायरल RNA पिक हुआ हो, कोई एक्टिव बीमारी ना हो।
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