
अमेरिका ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के संस्थापक इमरान खान को सुनाई गई 10 साल की सजा पर विस्तार से टिप्पणी करने से इनकार किया है। यह वही अमेरिका है, जो पूरी दुनिया के मामलों में टांग घुसाने से बाज नहीं आता, भले ही मामले से उसका कोई लेना-देना हो या नहीं। ऐसे में अमेरिका की इस खामोशी को इमरान खान की खिलाफत के नजरिए से देखा जा रहा है। अमेरिका से इमरान खान की दुश्मनी की कहानी काफी पुरानी है, जिसका सीधा कनेक्शन अफगानिस्तान से है। ऐसे में माना जा रहा है कि पाकिस्तान को एक भूराजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए अमेरिका ने इमरान खान से पल्ला झाड़ लिया है।
अमेरिका ने बयान देने से किया इनकार – मंगलवार को दैनिक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने इमरान खान को मिली सजा के सवाल पर कहा, “यह पाकिस्तानी अदालतों का मामला है।” उन्होंने कहा कि इमरान खान की सजा अंतत पाकिस्तानी अदालतों के लिए एक कानूनी मामला था। उन्होंने कहा, “हम मामले पर नजर रख रहे हैं, मुझे यह कहना चाहिए पूर्व प्रधान मंत्री के खिलाफ कई लाए गए हैं, लेकिन सजा पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।”
इमरान खान और कुरैशी को 10-10 साल की सजा – इमरान खान और उनकी पार्टी नेता शाह महमूद कुरेशी दोनों को सिफर मामले में 10-10 साल की सजा सुनाई गई है। आरोप लगा था कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने वाशिंगटन में देश के राजदूत द्वारा इस्लामाबाद में सरकार को भेजे गए एक गुप्त केबल की सामग्री को सार्वजनिक कर दिया था। पाकिस्तान की तत्कालीन सरकार ने इसे ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट का उल्लंघन बताया था। तब इमरान खान ने दावा किया था कि इस गुप्त केबल में उनकी सरकार को हटाने की साजिश की जानकारी लिखी है। हालांकि बाद में नई सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था।
इमरान खान को सुनाई गई दूसरी बार सजा – हाल के महीनों में विवादों में घिरे पीटीआई संस्थापक इमरान खान के लिए यह दूसरी सजा है। इससे पहले उन्हें भ्रष्टाचार के एक मामले में तीन साल की सजा सुनाई गई थी। हालांकि भ्रष्टाचार की दोषसिद्धि को चुनौती देने के कारण उनकी जेल की सजा निलंबित कर दी गई थी, लेकिन इसने उन्हें अगले महीने होने वाले आम चुनावों से पहले ही बाहर कर दिया है। सजा पर टिप्पणी करते समय मिलर ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान के खिलाफ मुकदमा चलाना एक कानूनी मामला है और विदेश विभाग “कानूनी मामलों से संबंधित पाकिस्तानी अदालतों पर टिप्पणी नहीं करेगा।
इमरान का साथ क्यों नहीं दे रहा अमेरिका – अमेरिका को इमरान खान पर भरोसा नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन शुरू से ही इमरान खान को नापसंद करते हैं। यह उन्होंने अमेरिका का राष्ट्रपति बनते ही प्रदर्शित कर दिया था। बाइडन के राष्ट्रपति बनने के डेढ़ साल बाद तक इमरान खान प्रधानमंत्री की कुर्सी पर रहे, लेकिन इस दौरान दोनों नेताओं के बीच एक बार भी बात नहीं हुई। इमरान खान ने अपने कार्यकाल के दौरान कई मौकों पर अमेरिका के खिलाफ तीखी टिप्पणियां की थी, जिसमें अफगानिस्तान का मुद्दा भी शामिल था। अमेरिका ने अफगानिस्तान में तालिबान पर नजर रखने के लिए पाकिस्तान का साथ मांगा था, लेकिन तत्कालीन इमरान सरकार ने इनकार कर दिया था।
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