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भारत का इंतजार होगा खत्म या साउथ अफ्रीका का सपना होगा पूरा, फाइनल में किसका पलड़ा भारी?


टीम इंडिया एक बार फिर इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ी है। साल 2007 में टी20 वर्ल्ड कप के पहले ही एडिशन को जीतकर कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने भारतीय क्रिकेट फैंस को एक बेमिसाल तोहफा दिया था। टीम इस फॉर्मेट में वह कमाल दोबारा नहीं कर पाई। एक दशक से अधिक समय से टीम इंडिया ने आईसीसी की कोई ट्रॉफी भी नहीं जीती है। वेस्टइंडीज के ब्रिजटाउन में टीम आज जब मैदान पर उतरेगी तो उम्मीदें आसमान छू रही होंगी। हर भारतीय रोहित शर्मा की टीम को ट्रॉफी उठाते देखना चाहेगा।
किसका पलड़ा भारी? – मौजूदा टूर्नामेंट में भारत और साउथ अफ्रीका दोनों ही टीमें अपराजेय रही हैं। हालांकि, टीम कॉम्बिनेशन, ओवरऑल प्रदर्शन और खेल के हर विभाग की तुलना करें तो भारतीय टीम का पलड़ा भारी नजर आता है। साउथ अफ्रीकी टीम पहली बार किसी वर्ल्ड कप के फाइनल (वनडे या टी20) में पहुंची है। टीम इंडिया के कई खिलाड़ियों को एक से अधिक वर्ल्ड कप फाइनल खेलने का अनुभव है। टीम को सिर्फ उन गलतियों से बचना होगा जो उसने पिछले साल हुए वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में की थीं। इस निर्णायक जंग से पहले अलग-अलग मोर्चों पर दोनों टीमों को आंक आंकते हैं।
टॉप ऑर्डर – भारत: कप्तान रोहित शर्मा खतरनाक अंदाज में दिख रहे हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 41 बॉल पर 92 रनों की तूफानी पारी खेली, फिर सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ शानदार अर्धशतक जड़ा। हालांकि, दिग्गज विराट कोहली सात मैचों में 10.71 के निराशाजनक औसत से सिर्फ 75 रन बना पाए हैं। ऋषभ पंत का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है और कुछ मैचों में उन्होंने टीम को संकट से निकाला है।
साउथ अफ्रीका: इस टीम का टॉप ऑर्डर टीम इंडिया से कमतर दिख रहा है। ओपनर क्विंटन डीकॉक ने टीम के लिए आठ मैचों में 25.50 के औसत से सर्वाधिक 204 रन जुटाए हैं। रीजा हेंड्रिक्स का प्रदर्शन लचर रहा है जो आठ मैचों में 15.57 के औसत से 109 रन ही बना पाए हैं। कप्तान एडेन मार्कराम (8 मैचों में 119 रन, औसत 17.00) भी नाम के हिसाब से काम नहीं कर पाए हैं।
मिडिल ऑर्डर – भारत: मिडिल ऑर्डर के भारतीय बल्लेबाजों ने टूर्नामेंट में उत्साहजनक प्रदर्शन किया है। सूर्यकुमार यादव (7 मैचों में 196 रन, ऐवरेज 32.66), हार्दिक पंड्या (7 मैचों में 139 रन, ऐवरेज 46.33) और शिवम दुबे (7 मैचों में 106 रन, ऐवरेज 21.20) ने अहम मौकों पर उम्दा योगदान कर टीम को जीत दिलाई है। विराट की बल्ले से विफलता के बावजूद भारत के लिए यह सफलता का सूत्र साबित हुआ है।