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कूलर चलाने वालों की 1 गलती सेहत पर पड़ती है भारी, डॉ. मानस ने बताया गंदे पैड ना बदलने के नुकसान


गर्मियों में एयर कूलर का काफी इस्तेमाल किया जाता है। क्योंकि ना सिर्फ यह गर्मी से राहत देता है, बल्कि जेब पर भी हल्का बैठता है। लेकिन डॉक्टर होने के नाते मेरा ध्यान इसके पैड पर बराबर रहता है, जिसे आम बोलचाल में कूलर के पर्दे भी कहते हैं। अगर कूलर पैड को सही टाइम पर साफ या बदला ना जाए तो ये घर के अंदर इंडोर एयर पॉल्यूशन और रेस्पिरेटरी हेल्थ प्रोब्लम्स कर सकते हैं।
बता दें कि इंडोर एयर पॉल्यूशन बाहर के हैवी पॉल्यूशन या पानी के प्रदूषण की तरह साफ-साफ दिखाई नहीं देता। पल्मोनोलॉजिस्ट के मुताबिक, कूलर पैड के रखरखाव का ध्यान ना रखने पर धूल-मिट्टी, नमी, फंगस, बैक्टीरिया उसके अंदर फंस सकते हैं और घर के अंदर दूषित हवा का संचार हो सकता है।
कूलर पैड को कितने दिन में बदल देना चाहिए? – सबसे पहले यह समझ लें कि एयर कूलर के पैड दो प्रकार के आते हैं। एक हनीकॉम्ब पैड और दूसरे घास वाले पैड। आमतौर पर, गर्मियों के दौरान कूलर पैड को हर 2 से 3 हफ्तों बाद अच्छी तरह साफ करना चाहिए। अगर घास वाले पैड हैं तो आप हर सीजन की शुरुआत में इसे बदल सकते हैं। अगर हनीकॉम्ब पैड है तो उसकी कंपनी द्वारा दिए गए बदलने के निर्देश का ध्यान रखें। यह भी ध्यान रखें कि जिन घरों में कूलर लगातार या ज्यादा समय चलते हैं, वहां पैड्स की क्वालिटी जल्दी गिर सकती है।
अगर आपको कूलर से अजीब-सी गंध आ रही है, उसपर फंगल पैच दिखने लगे हैं, ज्यादा धूल-मिट्टी जम गई है या ठंडा करने की क्षमता कम हो गई है तो कूलर पैड को तुरंत बदल देना चाहिए। इसे बदलने में देरी करने पर कूलिंग परफॉर्मेंस और इंडोर एयर क्वालिटी दोनों खराब हो जाती हैं।
गंदे कूलर पैड सेहत को कैसे पहुंचाते हैं नुकसान? – कूलर पैड में हमेशा नमी बनी रहती है, जिससे उनके अंदर धूल-मिट्टी, प्रदूषक और बाहर से पोलेन इकट्ठा हो जाता है। ऐसा माहौल मोल्ड, फंगस और बैक्टीरिया की ग्रोथ के लिए काफी उपयुक्त है। कूलर चलाने पर यह तत्व घर की अंदरुनी हवा में घुल जाते हैं और सांस के साथ शरीर में प्रवेश करते हैं।
मैंने देखा है कि अधिकतर लोगों को पता ही नहीं चलता कि उन्हें गर्मियों के दौरान सांस लेने में जो तकलीफ हो रही है, वो कभी-कभी कूलर की दूषित हवा के कारण भी हो सकती है। इंडोर एयर पॉल्यूशन के लगातार संपर्क में रहने से रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट को नुकसान पहुंचने लगता है और पहले से मौजूद सांस की बीमारी गंभीर रूप लेने लगती है।
कूलर के गंदे पैड किन बीमारियों को ट्रिगर कर सकते हैं? – कूलर के गंदे पैड्स के कारण एलर्जी और रेस्पिरेटरी इंफेक्शन ट्रिगर हो सकते हैं। लोगों को इसकी वजह से लगातार छींक आना, गले की दिक्कत, खांसी, सांस लेने पर सीटी की आवाज आना, साइनस कंजेशन, आंखों से पानी आना या सांस लेने में तकलीफ होती है।
कुछ लोगों को कूलर की नमी में फंगल ग्रोथ होने की वजह से फेफड़ों को प्रभावित करने वाली एलर्जिक ब्रोंकाइटिस या हाइपरसेंसिटिविटी रिएक्शन का सामना भी करना पड़ता है। अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), एलर्जिक राइनाइटिस या कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों को इन दिक्कतों का खतरा अधिक होता है, क्योंकि उनकी सांस की नली पहले से संवेदनशील होती है। बच्चे और बुजुर्गों को भी इनका खतरा ज्यादा रहता है, क्योंकि वो हवा से फैलने वाले इरिटेंट और इंफेक्शन के संपर्क में आसानी से आ जाते हैं।
क्या गंदे कूलर पैड से अस्थमा के लक्षण गंभीर हो सकते हैं? – डॉक्टर होने के नाते मेरी तरफ से इसका जवाब हां है। क्योंकि गर्मी के मौसम में अस्थमा का फ्लेयर अप (लक्षण परेशान करना) घर के अंदर के वातावरण से काफी जुड़ा होता है। गंदे कूलर से धूल-मिट्टी के कण, फंगल स्पोर्स और नमीदार हवा की वजह से सांस की नली में दिक्कत आ सकती है और अस्थमा के मरीजों में इंफ्लामेशन बढ़ सकती है।
कुछ मरीजों को कूलर की दूषित हवा में रहने से रात में ज्यादा खांसी आना, छाती में जकड़न, सांस के साथ आवाज आना या सांस फूलने की दिक्कतों में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है। कुछ मामलों में कूलर की सफाई या कूलर पैड के बदलने के बाद इन लक्षणों में राहत देखी जाती है।
एयर कूलर इस्तेमाल करते हुए किन बातों का ध्यान रखें? – कूलर का सही रखरखाव व सफाई बहुत जरूरी है। पानी को इकट्ठा होने से रोकने के लिए कूलर टैंक को नियमित रूप से साफ करना चाहिए। पैड्स को सही समय पर साफ करना चाहिए और हर सीजन में बदल देना चाहिए। कमरे में वेंटिलेशन का सही होना भी जरूरी है, क्योंकि ज्यादा ह्यूमिडिटी से मोल्ड ग्रोथ हो सकती है।
सफाई के लिए साफ पानी का इस्तेमाल करें और इस्तेमाल ना होने पर कूलर को सुखाकर रखें। अस्थमा या क्रॉनिक रेस्पिरेटरी बीमारी के मरीजों को कूलर की सफाई के प्रति ज्यादा सावधान रहना चाहिए। मैंने देखा है कि अधिकतर लोग केवल कूलर की कूलिंग पर ध्यान देते हैं, लेकिन रेस्पिरेटरी हेल्थ के लिए उसे साफ रखना भी बहुत जरूरी है।