
इंसान की तरह कुत्ते और बिल्ली में भी डायबिटीज होने का खतरा रहता है। अगर इन लक्षणों पर ध्यान न दिया जाए तो डायबिटीज बढ़ने का जोखिम बढ़ जाता है। हालांकि कुत्तों और बिल्लियों में डायबिटीज का इलाज संभव है। जानें कैसे कर सकते हैं बचाव।
आज के समय में इंसानों में डायबिटीज (Diabetes) की समस्या आम हो गई है। दुनियाभर में हर साल बड़ी संख्या में लोग इस बीमारी से अपनी जान गवां रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं इंसानों के अलावा कुत्ते और बिल्लियों को भी डायबिटीज हो सकती है। कई पेट लवर्स को इस बारे में जानकारी ही नहीं होती है। इसलिए उनमें बदलते लक्षणों को इग्नोर कर बैठते हैं, जिससे समय पर पेट्स का इलाज संभव नहीं हो पाता है।
जो लोग कुत्ते-बिल्ली पालते हैं, वो उनके लिए केवल जानवर नहीं बल्कि परिवार के एक सदस्य की तरह होते हैं। सोचिए, अगर ये पता चले कि आपके पेट डॉग या कैट को डायबिटीज हो गई है तो आपको जोर का झटका लगना तो तय है। वैसे तो बिल्लियों के कुछ मामलों में इस बीमारी को ठीक किया जा सकता है, लेकिन कुत्तों के केसेस में डायबिटीज से रिकवर करना अधिक मुश्किल हो जाता है।
कुत्तों और बिल्लियों को डायबिटीज तब होती है जब अग्नाशय हार्मोन इंसुलिन (Pancreatic Hormone Insulin) की कमी हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप हाइपरग्लेसेमिया (Hyperglycemia) होता है और कई ऑर्गन्स को नुकसान होता है। इंसानों की तरह खराब लाइफस्टाइल और खानपान जानवरों में भी डायबिटीज की वजह बनता है। हालांकि कुत्तों और बिल्लियों दोनों में मधुमेह का इलाज संभव है। आइए जानते हैं इसके इलाज और बचाव के टिप्स।
कुत्ते और बिल्लियों में डायबिटीज के प्रकार – सबसे पहले तो बता दें कि लगभग 1.5% कुत्तों और 0.5-1% बिल्लियों को डायबिटीज होती है। नॉर्थ शोर एनिमल लीग अमेरिका के मुताबिक, कुत्तों में मधुमेह के दो प्रकार होते हैं- डायबिटीज मेलिटस (डीएम) और डायबिटीज इन्सिपिडस (डीआई)। इसमें से सबसे आम प्रकारDMहोता है औरडीआई दुर्लभ है। वहीं,कुत्तों के विपरीत टाइपIIबिल्लियों में मधुमेह का सबसे आम प्रकार है और डायबिटीज मेलिटस (डीएम) दूसरा सबसे आमEndocrine Diseasesहै।
क्यों होती है कुत्ते और बिल्लियों को डायबिटीज – कुत्ते या बिल्ली को टाइप 1 डायबिटीज तब होता है, जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन प्रोड्यूस नहीं कर पाता है। यह जेनेटिक फैक्टर, किसी अन्य बीमारी या कंडीशन की वजह से हो सकता है। वहीं, टाइप 2 डायबिटीज तब होता है, जब शरीर इंसुलिन का उचित रूप से पता नहीं लगा पाता है या उस पर प्रतिक्रिया नहीं करता है। इसे इंसुलिन-प्रतिरोध (Insulin-Resistance)के रूप में भी जाना जाता है। यह ज्यादातर कम एक्टिव और ओवरवेट पेट्स में अधिक प्रचलित है।
कुत्तों और बिल्लियों में डायबिटीज का खतरा बढ़ाती हैं ये आदतें-
1-हाई कार्बोहाइड्रेट डाइट का सेवन
2- इंडोर या गतिहीन लाइफस्टाइल
3- मोटापा
4- मिडिल एज और अधिक उम्रहाई कार्बोहाइड्रेट डाइट का सेवन डायबिटीज अधिक आम है
5- जेनेटिक्स
6- क्रोनिक पैन्क्रियाटाइटिस
7- हाइपरथायरायडिज्म।
कुत्ते-बिल्ली में डायबिटीज के लक्षण – कुत्तों और बिल्लियों के डायबिटीज से पीड़ित होने पर उसके लक्षण नजर आ सकते हैं-
प्यास में वृद्धि
पेशाब का बढ़ना
वजन में कमी
भूख का बढ़ना
मोटापा/ओवरवेट
बिल्लियों का पोस्चर बदलना
दृष्टि हानि
मोतियाबिंद
एनर्जी कम होना
क्रोनिक इंफेक्शन या ठीक न होने वाले घाव।
कुत्तों और बिल्लियों को अगर डायबिटीज का इलाज जल्दी मिल जाए तो उनके ठीक होने के चांस बढ़ जाते हैं। ऐसे में अपने पेट की आदतों और लक्षणों पर ध्यान जरूर दें।
कैसे करें बचाव – पालतू जानवरों को इलाज के साथ-साथ डायबिटीज से ठीक होने के लिए कुछ खास देखभाल की भी जरूरत होती है। कुत्तों और बिल्लियों में ब्लड शुगर कंट्रोल में रखने के लिए,ये तरीके अपना सकते हैं:-
-अपने डॉग या कैट को हाई फाइबर और कम कार्बोहाइड्रेट वाली डाइट दें।
-डाइट के प्रकार के साथ ही समय पर भी ध्यान दें। डॉक्टर से पूछकर उन्हें उतने ही गैप में खाना खिलाएं।
-कुत्ते-बिल्लियों को पैक्ड फूड्स,पिज्जा,बिस्कुट वगैरह देने से बचना चाहिए।
-अपने पालतू जानवर की फिजिकल एक्टिविटी को बढ़ाएं।
-ब्लड शुगर लेवल की नियमित रूप से जांच करानी चाहिए।
-पशु चिकित्सक से नियमित जांच कराते रहें।
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