
अमेरिका में बहुत से वर्कर्स अवैध रूप से पहुंचते हैं और नौकरी करने लगते हैं। इन लोगों को नौकरी देने वाली कंपनियों पर पहले कार्रवाई नहीं हुआ करती थी। मगर एक नया मेमो जारी किया गया है, जिसके तहत अब कंपनियों को भी इस दायरे में लाया गया है और उन पर भी कार्रवाई होगी।
अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने एक नया मेमो जारी किया है। इसमें संघीय अभियोजकों को इमिग्रेशन से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है, जिसमें गैर-दस्तावेज वाले वर्कर्स से जुड़े मामले भी शामिल हैं। मेमो की वजह से अमेरिका में सभी कंपनियों पर बड़ा असर पड़ने वाला है। इसका मतलब है कि जो कंपनियां गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में रहने वाले लोगों या H-1B वीजा होल्डर्स को काम पर रखती हैं, उन पर आपराधिक मुकदमा चल सकता है।
इस मेमो को हाल ही में जारी किया गया है। इसमें DOJ ने इमिग्रेशन इंफोर्समेंट को प्रमुख मुद्दा माना है। इसकी वजह ये है कि पिछले कुछ सालों में गैरकानूनी तौर पर देश में घुसने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है। इस पॉलिसी का मकसद ‘यूएस अटॉर्नी ऑफिस’ को इमिग्रेशन कानूनों के तहत मुकदमा चलाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस कदम से अमेरिका की सभी कंपनियों पर असर पड़ेगा। खासतौर पर उन पर सबसे ज्यादा असर दिखने वाला है, जो विदेशी कर्मचारियों को अपने यहां नौकरी पर रखती हैं।
इमिग्रेशन के नियम तोड़ने पर होगी कड़ी कार्रवाई – मेमो में साफ तौर पर कहा गया है कि इमिग्रेशन से जुड़े उल्लंघनों के खिलाफ सख्त रुप अपनाया जाए। इन उल्लंघनों में अमेरिका में गैरकानूनी रूप से रह रहे लोगों को पनाह देना, उन्हें ले जाना या उन्हें काम पर रखना शामिल है। कुल मिलाकर नई नीति में इमिग्रेशन से जुड़े उल्लंघनों के खिलाफ मुकदमा चलाने को प्राथमिकता दी गई है।
फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, DOJ का नया दृष्टिकोण 8 USC. 1324 जैसे कानूनी प्रावधानों का हवाला देता है। इस प्रावधान के जरिए उन कंपनियों को निशाना बनाया जाता है, जो जानबूझकर या लापरवाही से बिना डॉक्यूमेंट्स वाले वर्कर्स को नौकरी पर रखती हैं। पहले इस तरह के मामलों पर इतनी सख्ती से कार्रवाई नहीं की जाती थी। लेकिन नई नीति के तहत, DOJ को तेजी से और व्यापक रूप से कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
हॉलैंड एंड हार्ट के पार्टनर क्रिस थॉमस ने फोर्ब्स को बताया, “कंपनियों के लिए इसका मतलब है कि निगरानी काफी बढ़ जाएगी और छोटी सी गलती भी गंभीर कानूनी नतीजे दे सकती है।” यह नीति थर्ड-पार्टी कंपनियों और स्टाफिंग एजेंसियों पर भी लागू होने की उम्मीद है, जो अनजाने में बिना दस्तावेजों वाले वर्कर्स को पनाह देते हैं या उन्हें काम पर रख सकते हैं। इससे उन पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ जाती है।
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