Wednesday , March 4 2026 10:12 PM
Home / Uncategorized / ब्रह्मपुत्र की धारा पर शिकंजा कसने की साजिश, बहाव को मोड़कर भारत को घुटनों पर लाने की चाल, चीन के डैम से कैसे आ रही तबाही की आहट?

ब्रह्मपुत्र की धारा पर शिकंजा कसने की साजिश, बहाव को मोड़कर भारत को घुटनों पर लाने की चाल, चीन के डैम से कैसे आ रही तबाही की आहट?


चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा डैम बना रहा है, जिससे भारत की जल सुरक्षा को गहरा खतरा पहुंच सकता है। यह डैम न सिर्फ भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि चीन की “डैम डिप्लोमेसी” भारत पर रणनीतिक दबाव बनाने का एक नया हथियार बन सकती है। अरुणाचल प्रदेश और असम जैसे राज्यों में जलसंकट, बाढ़ और कृषि प्रभावित हो सकते हैं।
चीन के डेवलपमेंटल प्रोजेक्ट्स अकसर किसी ना किसी के लिए खतरे की वजह बनते हैं। ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा जलविद्युत बांध बनाने की चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना, दक्षिण एशिया के जियो-पॉलिटिक्स पर गंभीर असर डाल सकती है। ये प्रोजेक्ट सिर्फ चीन की टेक्नोलॉजी के चमत्कार की बात नहीं है, बल्कि इस हाईड्रोपावर प्रोजेक्ट से भारत के सामने गंभीर संकट खड़ा होने की आशंका है। चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा डैम बनाने की योजना पर काम तेज कर दिया है। यह परियोजना तिब्बत के मेडोग काउंटी में यारलुंग त्सांगपो नदी पर बनाई जा रही है, जो भारत में ब्रह्मपुत्र के नाम से जानी जाती है।
चीन इस डैम को 70 गीगावॉट उत्पादन क्षमता के साथ बना रहा है और ये बांध, दुनिया के सबसे बड़े थ्री गोरजेस डैम से भी कहीं ज्यादा क्षमता वाला होगा। लेकिन इस डैम का मकसद सिर्फ ऊर्जा उत्पादन नहीं है, बल्कि इसके पीछे चीन की रणनीतिक चालें भी छिपी हैं, जिसका गंभीर असर भारत पर पड़ेगा। पाकिस्तान इस बांध को अपने जियो-पॉलिटिकल वजहों से एक रणनीतिक लाभ के रूप में देखता है, जबकि भारत इसे अपनी जल सुरक्षा, सीमा स्थिरता और क्षेत्रीय प्रभाव के लिए एक बहुत बड़ा खतरा मानता है।
ब्रह्मपुत्र पर मेगा डैम से पूर्वोत्तर भारत में तबाही का अलार्म? – जब चीन ने हाल ही में बांध योजना प्रोजेक्ट की घोषणा की थी, तो भारत ने जवाब दिया था कि वह “अपने हितों की रक्षा करेगा।” तिब्बत में यारलुंग त्संगपो के नाम से जानी जाने वाली ब्रह्मपुत्र नदी कैलाश पर्वत के पास से निकलती है और बंगाल की खाड़ी में गंगा में मिलने से पहले चीन, भारत और बांग्लादेश से होकर गुजरती है। नदी की बहाव खास तौर से तिब्बत में “ग्रेट बेंड” पर, जलविद्युत उत्पादन की अपार संभावनाएं प्रदान करती है। भारत में ब्रह्मपुत्र नदी पूर्वोत्तर राज्यों के लिए जीवनरेखा है, खासकर अरुणाचल प्रदेश और असम जैसे राज्यों के लिए। इस मेगा डैम के बनने से चीन के पास नदी के प्रवाह को कंट्रोल करने की ताकत आ जाएगी।