
जेडी वेंस आज रात जयपुर पहुंचेंगे और कल आमेर फोर्ट के लिए रवाना होंगे, एक ऐसी खूबसूरत जगह जिसे देश के कई ऐतिहासिक किलों में गिना जाता है। अंदर जाने के लिए आपको एंट्री टिकट लेनी होती है और किले को देखने का भी अपना एक समय है।
अमेर किला, जो अपनी खूबसूरत वास्तुकला के लिए मशहूर है और यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट भी है, यूएस के उपराष्ट्रपति के आगमन की वजह से कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया है। टाइट सिक्योरिटी के चलते कोई भी आम पर्यटक यहां नहीं आ सकता। भारत के सबसे महंगे होटल रामबाग पैलेस में रुकने के बाद आज जेडी वेंस शाही किले का दीदार करेंगे। जहां उनका स्वागत पारंपरिक राजस्थानी अंदाज में किया जाएगा। बताया जा रहा है, वेलकम के लिए दो हाथियों को ट्रेन किया गया है, जो भव्य तरीके से उपराष्ट्रपति का स्वागत करेंगे।
आमेर किला, जयपुर के सबसे मशहूर पर्यटन स्थलों में से एक है, ये एक छोटी पहाड़ी पर बना हुआ है और शहर से लगभग 11 किलोमीटर दूर है। ये शानदार किला पीले और गुलाबी पत्थर साथ ही सफेद संगमरमर से बना है। किले को चार मुख्य हिस्सों में बांटा गया है, और हर हिस्से में अलग-अलग आंगन हैं। किले का मुख्य प्रवेश द्वार ‘जलेब चौक’ कहलाता है, जो पहले आंगन की ओर जाता है। चलिए आपको इस किले की और भी कई रोचक बातें बताते हैं। (photo credit: PTI@X)
आमेर किले को कहते हैं शीश महल – आमेर किले की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है शीश महल। इसे “आईनों का महल” कहा जाता है क्योंकि इसकी दीवारों और छतों पर बहुत सारे छोटे-छोटे शीशे और रंग-बिरंगे कांच लगे हैं। कहा जाता है कि जब सूरज की किरणें इन पर पड़ती थीं, तो पूरा महल चमक उठता था।
आज भी लोग इसकी खूबसूरती के दीवाने हैं। महल के अंदर एक हॉल है, जिसे सिर्फ एक मोमबत्ती से रोशन किया जा सकता है! वहां एक खास खंभा भी है, जिस पर एक फूल की नक्काशी है। उसे अलग-अलग एंगल से देखने पर अलग-अलग आकृतियां नजर आती हैं, जो इसे और भी दिलचस्प बनाती हैं।
चील का टीला – सुरंगों और गुप्त रास्तों का रहस्य लोगों को हमेशा से आकर्षित करता है। अगर आपको भी ऐसी रहस्यमयी जगहों में दिलचस्पी है, तो आमेर के पास स्थित चील का टीला जरूर देखना चाहिए। अरावली की पहाड़ियों में बसा ये टीला, जिसे ईगल हिल भी कहा जाता है, एक 2 किलोमीटर लंबी सुरंग के जरिए पहुंचा जा सकता है, जो आमेर किले के बेसमेंट से शुरू होती है। इस सुरंग में चढ़ाई और सीढ़ियां दोनों हैं, और ऐसा माना जाता है कि पुराने समय में हमले के दौरान रानियां इसी रास्ते से बच निकलती थीं।
मावटा झील – मावटा झील ऐसी लगती है जैसे आईना हो, जिसमें किले की झलक चमकते पानी में साफ दिखती है। यह खूबसूरत जगह सिर्फ केसर बाग के लिए ही नहीं जानी जाती, बल्कि पुराने समय में यह झील राजपूतों के लिए पानी का एक अहम स्रोत भी थी। इसकी शांत फिजा और गहरा इतिहास इसे लोगों के लिए एक खास जगह बना देते हैं, जहां वे आकर इस इलाके की खूबसूरती और विरासत से जुड़ते हैं।
केसर क्यारी गार्डन – केसर क्यारी गार्डन वाकई में एक खूबसूरत जगह है, बिल्कुल आसमान की तरह दिलकश। ये शानदार केसर का बाग मुगल शैली में बना है और मावटा झील के बीच एक छोटे से टापू पर बसा है। इसकी खूबसूरती दिन में भी देखी जा सकती है और रात में भी। आमेर किले की ऊंचाई से इसका नजारा और भी शानदार लगता है।
कहा जाता है कि पुराने जमाने में यहां एक बहुत समझदारी से बनाया गया पुली सिस्टम था, जिसकी मदद से हरम की करीब 1600 महिलाएं सीधे इस बाग तक और वापस जाया करती थीं। इससे उनकी प्राइवेसी बनी रहती थी और बाहर के मर्दों से सामना भी नहीं होता था।
आमेर किले का नाम पड़ा इस देवी से – आमेर किले का नाम अंबा माता के नाम पर पड़ा है, जो हिंदू धर्म में फर्टिलिटी और शक्ति की देवी मानी जाती हैं। ऐसा माना जाता है कि उनकी कृपा से किले और उसमें रहने वाले सभी लोग सुरक्षित रहते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि ‘आमेर’ नाम ‘अंबिकेश्वर’ से निकला है, जो भगवान शिव का एक नाम है। वहीं, एक और मान्यता है कि यह नाम अयोध्या के एक पौराणिक राजा ‘अंबरिष’ से जुड़ा हुआ है।
गणेश पोल – गणेश पोल आमेर किले का मुख्य दरवाजा था, जहां से महाराजा सुंदर महलों में प्रवेश करते थे। जब आप वहां जाएंगे, तो ऊपर की मंजिल पर छोटी-छोटी खिड़कियां दिखेंगी, जिन्हें सुहाग मंदिर कहा जाता है। कहा जाता है कि ये खिड़कियां राजघराने की महिलाओं के लिए दूरबीन जैसी थीं, जिससे वे दीवान-ए-आम में होने वाले कार्यक्रमों को आराम से देख सकती थीं। शुरू से ही आमेर किला अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर रहा है।
जयगढ़ फोर्ट को जाती सुरंग – चट्टानी इलाके के नीचे 2 किलोमीटर लंबी सुरंग है, जो आमेर किला को उसके दूसरे किले, जयगढ़ किले से जोड़ती है, जो अरावली पहाड़ियों पर स्थित है। यह छिपी हुई सुरंग लंबे समय तक गुप्त रखी गई थी और माना जाता है कि ये किलों के शाही परिवार के लिए संकट के समय भागने का महत्वपूर्ण रास्ता था, जो आमेर किले के इतिहास को और भी रहस्यमय बनाता है। इस छुपे हुए मार्ग को देखे आप यही कहेंगे इस रास्ते से लोग कैसे जाते होंगे?
किला देखने का समय और फीस – दिन के समय, अंबर पैलेस सुबह 8:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक खुला रहता है। दिन के समय, भारतीय नागरिकों के लिए प्रवेश टिकट 100 रुपए और विदेशी पर्यटकों के लिए 500 है। रात के समय, पैलेस रात 7:00 बजे से 9:00 बजे तक खुला रहता है। रात के समय सभी विजिटर्स के लिए प्रवेश टिकट 100 रुपए है। हालांकि, रात के समय केवल लाइट और साउंड शो का आनंद लिया जा सकता है, और पैलेस के अन्य हिस्सों तक प्रवेश नहीं किया जा सकता।
कैसे पहुंचे आमेर किला – कैब या ऑटो: जयपुर शहर के किसी भी हिस्से से कैब या ऑटो लेकर सीधे आमेर किला जा सकते हैं।
बस: जयपुर शहर के बस स्टेशन से भी एसी और नॉन-एसी बसें आमेर किला के पास तक जाती हैं।
कार से: यदि आप अपनी निजी कार से जा रहे हैं, तो शहर से लगभग 11 किलोमीटर दूर स्थित यह किला आसानी से पहुंच सकते हैं।
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