
कनाडा में पढ़ाई पूरी कर चुके एक भारतीय छात्र को जब जॉब नहीं मिली तो उसने इसके लिए भारत में रहने वाले लोगों को जिम्मेदार ठहराया है। उसका कहना है कि भारत में बैठे लोग अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में नौकरियों के लिए अप्लाई कर रहे हैं, जबकि उन्हें मालूम है कि उनके पास यहां काम करने का अधिकार नहीं है। छात्र ने आरोप लगाया कि इन लोगों की वजह से यहां पढ़ने वाले छात्रों को जॉब नहीं मिल रही है। उन्हें लगता है कि अप्लाई करने में कोई नुकसान नहीं है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर एक पोस्ट में भारतीय छात्र ने कहा, “आप लोगों को ग्रेजुएशन के बाद जॉब इसलिए नहीं मिल रही है, क्योंकि आपकी प्रोफाइल उन कैंडिडेट्स के साथ मिक्स हो जा रही है, जो भारत में रहते हैं। भारत में बैठे लोग उन नौकरियों के लिए अप्लाई कर रहे हैं, जिन्हें करने के लिए उनके पास कानूनी अधिकार नहीं है।” छात्र ने आगे बताया कि किस तरह उसने पता लगाया कि भारतीयों की वजह से कनाडा जैसे देशों में पढ़ने वाले छात्रों को जॉब नहीं मिल रही है।
15-20 मिनट में 70-80 लोग कर रहे अप्लाई: भारतीय छात्र – अपनी पोस्ट में उसने आगे कहा, “पिछले कुछ महीनों में, जब मैं बेरोजगार था। उस समय मैं दिन रात नौकरियों के लिए अप्लाई करता। मैंने एक चीज नोटिस की कि हर रात जैसे ही एक नई जॉब की लिस्टिंग होती। वैसे ही 15-20 मिनट के भीतर उसके लिए 70-80 लोग अप्लाई कर देते। आखिर कैसे? और ये सिर्फ किसी एक कंपनी या जॉब के लिए नहीं था, बल्कि किसी भी नौकरी के लिए ऐसे ही आवेदन आ रहे थे।”
उसने आगे कहा, “फिर मैंने अलग-अलग कंपनियों के अपने HR दोस्तों से बात की और पाया कि हमारे प्यारे देशवासी और पड़ोसी, जो एशियाई टाइम जोन में काम कर रहे हैं और रह रहे हैं। वे कनाडा और अमेरिका में जॉब के लिए अप्लाई कर रहे हैं। भले ही उन्हें पता न हो कि वे बिना वर्क ऑथराइजेशन के कानूनी रूप से वहां काम नहीं कर सकते हैं। शायद 99.9% कंपनियां उन्हें स्पांसर भी नहीं करेंगी। लेकिन जॉब के लिए आवेदकों के अनुपात को बिगाड़ने के लिए वे अप्लाई करते हैं, क्योंकि उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं है।”
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