
यूक्रेन ने दावा किया है कि उत्तर कोरिया के बाद एक दूसरा देश रूस में अपने सैनिकों को भेजने की तैयारी कर रहा है। इस देश के रूस के साथ घनिष्ठ संबंध हैं और यहां के सैनिकों को बारूदी सुरंगों को हटाने में महारत हासिल है। यह देश चीन के कर्ज से दबा हुआ भी है।
रूस और चीन की दोस्ती जगजाहिर है। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच चीन ने रूस को जमकर मदद की है। इससे न सिर्फ रूसी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है, बल्कि सैन्य रूप से भी रूस ताकतवर हुआ है। इस बीच कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चीन का एक आर्थिक गुलाम देश अपनी सेना भेजकर रूस की सैन्य मदद कर सकता है। यह देश कोई और नहीं, बल्कि लाओस है। लाओस पर चीन का अरबों डॉलर का कर्ज है। कुछ वर्ष पहले चीन ने कर्ज न चुकाने पर लाओस की पावरग्रिड को अपने कब्जे में ले लिया था। लाओस के रूस के साथ भी घनिष्ठ संबंध हैं।
रूस ने लाओस के सैनिकों को की थी नागरिकता की पेशकश – हालांकि, लाओस के सरकारी मीडिया ने बताया है कि सरकारी अधिकारियों ने विदेशी समाचार माध्यमों में चल रहे उन हालिया दावों का खंडन किया है जिनमें कहा गया था कि वह यूक्रेन में रूस के सैन्य अभियानों में सेना तैनात करने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्टों में कहा गया है कि मास्को ने पैसे और रूसी नागरिकता की पेशकश करके लाओस के सैनिकों और नागरिकों को यूक्रेन में लड़ने के लिए मनाने की कोशिश की थी। उन्होंने यह भी कहा कि रूस शुरू में कुर्स्क क्षेत्र में बारूदी सुरंगों को हटाने के अभियानों में लाओस के सशस्त्र बलों के इंजीनियरिंग सैनिकों को शामिल करना चाहता था।
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