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मैंने किसी के ब्रेस्ट नहीं कटवाए…फिर क्यों कहा तानाशाह, विस्फोटक इंटरव्यू पर ईरान के सुप्रीम लीडर की बंधी घिग्घी, अब मुश्किल में मुत्तकी


7 अक्टूबर, 1979 के दिन अमेरिका के जाने-माने अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स में एक लेख छपा। दरअसल, उस वक्त वर्ल्ड लीडर्स के साथ अपने विस्फोटक इंटरव्यू के लिए मशहूर इतालवी पत्रकार ओरियाना फलासी ने इस्लामी क्रांति के नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी से मिलने की उम्मीद में ईरान की यात्रा की। तत्कालीन 79 वर्षीय अयातुल्ला खुमैनी का इंटरव्यू लेने के लिए फलासी ईरान के पवित्र शहर कुम पहुंचीं। मगर, उन्हें 10 दिनों तक इंतजार कराया गया, ताकि खुमैनी पूरी तैयारी कर सकें। जब 12 सितंबर, 1979 को फलासी को फैजेया धार्मिक स्कूल में ले जाया गया, तो खुमैनी वहां भारी-भरकम लाव-लश्कर के साथ आए। वहां पर खुमैनी अक्सर अपनी बैठकें करते रहे थे। उनके साथ दो ईरानी भी थे जिन्होंने साक्षात्कार की तैयारी में मदद की थी और जो अनुवादक के रूप में काम कर रहे थे। ट्यूजडे ट्रीविया में जानते हैं फलासी के उस विस्फोटक इंटरव्यू का पहला पार्ट। ये इंटरव्यू हमें न्यूयॉर्क टाइम्स के आर्काइव से मिला, जो आपको भी पसंद आएगा। इस वक्त हम इसकी चर्चा इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी भी हाल ही में भारत दौरे पर थे और एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक भी महिला पत्रकार को आने नहीं दिया गया, जिसे लेकर भारत में बवाल मच गया। हालांकि, बाद में उन्होंने एक और प्रेस कॉन्फ्रेंस करके महिला पत्रकारों को बुलाया।
पूरा देश आपके हाथों में, आजादी नहीं मिली – द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, खुमैनी का इंटरव्यू लेने के लिए मिस फलासी को नंगे पांव, पूरे शरीर पर बुर्का ओढ़े हुए लाया गया। उन्हें एक कालीन पर बैठाया गया। जब अयातुल्ला खुमैनी ने प्रवेश किया, तो टेप किया गया साक्षात्कार शुरू हुआ। जानते हैं इस खास इंटरव्यू के बारे में।
फलासी: इमाम खुमैनी साहेब पूरा देश आपके हाथों में है। आपका हर फ़ैसला एक आदेश है। इसलिए आपके देश में बहुत से लोग कहते हैं कि ईरान में आज़ादी नहीं है, क्रांति से आजादी नहीं मिली।
मैं तो जनता का सेवक हूं, जनता ने सौंपा है ईरान – खुमैनी: ईरान मेरे हाथों में नहीं है। ईरान जनता के हाथों में है, क्योंकि जनता ने ही देश को उस व्यक्ति के हाथों में सौंपा है जो उनका सेवक है और जो सिर्फ उनके भले की कामना करता है। आपने अच्छी तरह देखा कि कैसे अयातुल्ला महमूद तलेघानी की मौत के बाद लाखों लोग बिना किसी हिंसा के सड़कों पर उतर आए। यह दर्शाता है कि आजादी है। यह यह भी दर्शाता है कि लोग केवल ईश्वर के सेवकों का अनुसरण करते हैं। और यही आजादी है।
ईरान में आपका खौफ, लोग कहते हैं तानाशाह – फलासी: अगर मैं जोर दे रही हूं तो माफ करना इमाम खुमैनी। मेरा मतलब था कि आज ईरान में आप डर पैदा कर रहे हैं और बहुत से लोग आपको तानाशाह कह रहे हैं। नया तानाशाह, नया बॉस। नया मालिक। आप इस पर क्या कहेंगे? क्या इससे आपको दुख होता है, या आपको इसकी परवाह नहीं?