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AI समिट के पीछे भारत की बड़ी रणनीतिक और कूटनीतिक सोच, चीन-अमेरिका को लग सकता है झटका


भारत ने ऐसे समय में एआई इंपैक्ट समिट (AI Impact Summit) आयोजित किया है,जिस समय जियोपॉलिटिक्स में बहुत ही ज्यादा उथल-पुथल है। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई में एक ऐसी सरकार है, जो अपने देश को फिर से ग्रेट बनाने की मृग मरीचिका में उलझा है। मध्य एशिया, खाड़ी संकट कम होने का नाम नहीं रहा। विस्तारवादी चीन अपने मंसूबे को अंजाम देने के मिशन में चुपचाप लेकिन, खतरनाक शांत भाव से जुटा हुआ है। ऐसे समय में भारत ने उस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विषय पर दुनिया को एकजुट करने का बीड़ा उठाया है, जिसमें राजनीतिक और कूटनीतिक तौर विवाद की ज्यादा गुंजाइश नहीं है और भविष्य के लिए इसमें अनंत संभावनाएं भरी पड़ी हैं।
एआई इकोसिस्टम में कहां है भारत – भारत में एआई समिट का आयोजन दो सफल ट्रेड डील के तुरंत बाद हो रहा है। भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपियन यूनियन के बीच व्यापारिक समझौते, वैश्विक चर्चा के मुद्दे हैं। इस माहौल में भारत की ओर से दुनिया भर के देशों को एआई समिट के लिए जुटाने का संदेश बहुत ही सकारात्मक है। ET के एक विश्लेषण के अनुसार एआई इकोसिस्टम के लिए मोटे तौर पर चार आधार स्तंभ चाहिए। पहला एक विशाल चिप-मेकिंग इंडस्ट्री, इस इकोसिस्टम को संभालने के लिए ऊर्जा क्षमता, चिप के लिए रिसर्च और डिजाइन की क्षमता और इसके विकसित हो रहे बाजार में स्थान बनाने की स्थिति। इनमें से कम से कम अंतिम दो में भारत का कोई हाथ नहीं पकड़ सकता।
एआई समिट के प्रति अमेरिकी रोल – भारत के लिए सबसे अच्छी बात ये है कि एआई क्षेत्र में फिलहाल किसी तरह का कोई घरेलू या अंतरराष्ट्रीय विवाद नहीं है। ऊपर से जिस तरह ट्रंप के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार मिशल क्रैट्सियोस एक भारी-भरकम प्रतिनिधिमंडल के साथ इस शिखर सम्मेलन का हिस्सा हैं, उससे दुनिया में संदेश यही जा रहा है कि इस वैश्विक विषय पर दोनों देशों के बीच बहुत ही बेहतरीन तालमेल है।
एआई इकोसिस्टम में बड़ा अवसर – अगर दूसरे शब्दों में कहें तो यह उस स्थिति से बिल्कुल अलग है, जिसमें दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों को अमेरिकी और चीन के बीच खींचतान को ध्यान में रखना पड़ता है। दुनिया को एआई की क्षमता का अंदाजा है। लेकिन, इसके कई पहलू ऐसे हैं, जिनको लेकर दुनिया के वैज्ञानिकों में अभी भी आशंका बनी हुई है। भारत दुनिया भर के सभी एआई स्टेकहोल्डर्स को एक मंच पर लाकर आपसी चिंताओं को दूर करने और समाधान का बहुत बड़ा अवसर दे रहा है। मतलब, भारत इस एआई समिट के जरिए एक तरह से इतने महत्वपूर्ण वैश्विक विषय पर लीडरशिप की रोल निभा रहा है। अगर चीन क्रिटिकल मिनरल्स पर बढ़त के चलते खुद को आगे समझ रहा है तो यह उसके लिए कम बड़ा झटका नहीं है। वहीं, अमेरिका को भी इस मामले में बढ़त बनाने का अभी अवसर नहीं मिल पाया है।